भास्कर रिपोर्टर प्रमोद साहू ने साइबर क्राइम एक्सपर्ट मुकेश चौधरी के साथ बातचीत की। इस दौरान एक्सपर्ट ने कहा कि बच्चों के हाथ में फोन और उसमें ऑनलाइन गेम अब उन्हें व्यस्त रखने का जरिया नहीं रह गया है। गेमिंग के दौरान बच्चे अनजाने में खरीदारी या भुगतान की अनुमति दे रहे हैं, जिससे माता-पिता के बैंक खाते से पैसे कट रहे हैं। रायपुर के एन. कुमार, अनीश वर्मा और विकास कुमार समेत 6 लोगों ने रकम कटने की शिकायत साइबर सेल में की है। साइबर ठग बच्चों को गेम में फ्री कॉइन, रिवॉर्ड, अपडेट या कम कीमत में सुविधा देने के नाम पर लिंक भेजते हैं। बच्चा लिंक खोलकर गेम डाउनलोड या सक्रिय कर देता है। कई बार अनुमतियां भी दे देता है। सेव पेमेंट, ऑटो-पे/ई-मैन्डेट, संदिग्ध लिंक या एप से खतरा बढ़ता है। सिर्फ गेमिंग एप अन-इंस्टल करना काफी नहीं सिर्फ गेमिंग एप को अन-इंस्टाल करना पर्याप्त नहीं खाते से अनजान रकम कटने पर सिर्फ गेमिंग एप अन-इंस्टॉल करना पर्याप्त नहीं है। बैंक स्टेटमेंट में ट्रांजेक्शन का माध्यम देखें। गेमिंग अकाउंट और यूपीआई एप में सक्रिय भुगतान व्यवस्था जांचें। अनजान एपीके से गेम डाउनलोड किया हो तो विशेषज्ञ की मदद लें। गेमिंग ऐप खाते से भुगतान कैसे बंद करें बच्चों को बिना पूछे पैसे खर्च करने से रोकने के लिए फोन सेटिंग में हर खरीदारी पर पासवर्ड या फिंगरप्रिंट लॉक जरूर लगाएं। साथ ही अपने यूपीआई ऐप या बैंक की नेट बैंकिंग में जाकर ‘ऑटो-पे’ बंद कर दें, ताकि कोई भी गेमिंग ऐप खाते से खुद पैसे न काट सके। फर्जी गेम से बचने के लिए किसी अनजान लिंक से ऐप न लें और डाउनलोड करने से पहले देखें कि वह बिना वजह कैमरा या फोन बुक की अनुमति तो नहीं मांग रहा। ——————————– ये खबर भी पढ़ें… भारत में ऑनलाइन सट्टे का 10 लाख करोड़ का बाजार:बैन के बावजूद रोज डेढ़ करोड़ लोग दांव लगा रहे; 854 इन्फ्लुएंसर प्रचार कर रहे भारत में ऑनलाइन सट्टे का 10 लाख करोड़ का बाजार:बैन के बावजूद रोज डेढ़ करोड़ लोग दांव लगा रहे; 854 इन्फ्लुएंसर प्रचार कर रहे। पूरी खबर पढ़ें…
Source link
साइबर ठग फ्री कॉइन, रिवॉर्ड, गेम-अपडेट का लिंक भेजते हैं: साइबर क्राइम एक्सपर्ट बोले- बच्चे मोबाइल पर होते हैं; माता-पिता के खाते से बिना सूचना रकम गायब
RELATED ARTICLES



