दिवालिया प्रक्रिया से गुजर रही रियल एस्टेट कंपनी सुपरटेक की रुकी हुई आवासीय परियोजनाओं को पूरा करने की कवायद एक बार फिर देरी का शिकार होती दिख रही है। राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने परियोजनाओं पर काम शुरू करने में हो रही देरी और अंतरिम समाधान पेशेवर (आईआरपी) की नियुक्ति लंबित रहने पर चिंता जताते हुए संबंधित पक्षों को फटकार लगाई है। एनसीएलएटी की तीन सदस्यीय पीठ ने एनसीएलटी और भारतीय दिवाला एवं शोधन अक्षमता बोर्ड को निर्देश दिया है कि वे एक सप्ताह के भीतर आईआरपी के नाम सुझाएं। न्यायाधिकरण ने सरकारी निर्माण कंपनी एनबीसीसी की प्रगति पर भी सवाल उठाए। एनसीएलएटी ने कहा कि उसने 6 मई 2026 के आदेश में परियोजनाओं पर काम शुरू करने के लिए कई शर्तें और समयसीमाएं तय की थीं, लेकिन उनमें से कई अभी तक पूरी नहीं हो सकी हैं। एपेक्स कोर्ट कमेटी की ओर से पेश वकील ने न्यायाधिकरण को बताया कि 20 सितंबर को होने वाली बैठक में लंबित शर्तों को पूरा करने तथा निर्माण कार्य शुरू करने की नई समयसीमा तय की जाएगी।
लाखों वर्गफुट की परियोजनाएं अटकी
12 दिसंबर 2024 को एनसीएलएटी ने सुपरटेक की 16 रुकी हुई हाउसिंग परियोजनाओं को पूरा करने की जिम्मेदारी एनबीसीसी को सौंपी थी। इसके लिए एक शीर्ष समिति और हर परियोजना के लिए समितियों का गठन भी किया गया था, ताकि हजारों फंसे हुए घर खरीदारों को राहत मिल सके। सुपरटेक मार्च 2021 से कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (सीआईआरपी) के तहत है। कंपनी के प्रमुख ऋणदाता यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की याचिका पर एनसीएलटी ने यह प्रक्रिया शुरू की थी।



