दुनिया के सबसे खतरनाक और वांछित ड्रग कार्टेल सरगनाओं में शुमार क्रिस्टी किनाहन का आलीशान और सुरक्षित ठिकाना अब छिनने जा रहा है। द डैपर डॉन के नाम से कुख्यात क्रिस्टी किनाहन ने 2016 से दुबई को अपना ठिकाना बना रखा था और वहीं से अपना आपराधिक साम्राज्य चला रहा था। इसकी पोल उसके डिजिटल लेन-देन से खुली जिसके बाद यूएई ने उसका वीजा निरस्त कर दिया।
यूरोप में पुलिस की बढ़ती सख्ती से भागकर दुबई पहुंचा
उसे 29 सितंबर तक देश छोड़ने का फरमान सुनाया जा चुका है। आयरिश मूल का क्रिस्टी किनाहन (69) वैश्विक आपराधिक सिंडिकेट का सबसे बड़ा चेहरा है। उसके बनाए किनाहन कार्टेल को अमेरिकी सरकार ने अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा घोषित कर रखा है। अमेरिकी विदेश विभाग ने किनाहन की गिरफ्तारी या सजा दिलाने में मदद करने वाली सटीक जानकारी देने वाले को 50 लाख डॉलर (करीब 41 करोड़ भारतीय रुपये) का इनाम देने की घोषणा कर रखी है। किनाहन वर्ष 2016 में यूरोप में पुलिस की बढ़ती सख्ती से भागकर दुबई पहुंचा था। रिपोर्टों के अनुसार, उसने फर्जी पासपोर्टों के आधार पर खाड़ी देश में प्रवेश किया था। वहां रहते हुए करीब 1.5 बिलियन डॉलर की व्यक्तिगत बेनामी संपत्ति जमा कर ली थी। दुबई सरकार के आधिकारिक पोर्टल से खुलासा हुआ कि किनाहन का मूल वीजा इस साल अप्रैल में समाप्त हो गया था और 2024 में जारी रेजिडेंस कार्ड भी अब एक्सपायर हो चुका था।
द डैपर डॉन के अवैध कारोबारों का साम्राज्य
क्रिस्टी किनाहन जन्म 23 मार्च 1957 को डबलिन (आयरलैंड) में हुआ था। उसने 1980-90 के दशक में मादक पदार्थों की तस्करी शुरू कर अपराध की दुनिया में कदम रखा। पकड़े जाने के बाद जेल में रहने के दौरान यूरोप में सबसे बड़े ड्रग नेटवर्क किनाहन कार्टेल बना डाला। यह कार्टेल पूरे यूरोप में कोकीन, हेरोइन और हथियारों की तस्करी के साथ-साथ बड़े पैमाने पर मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल रहा है।
सिंडिकेट चलाने में दोनों बेटे भी कर रहे मदद
क्रिस्टी किनाहन अकेले गिरोह को नहीं चलाता। वह दो बेटों के साथ मिलकर इस सिंडिकेट का संचालन करता है। बड़ा बेटा जो कार्टेल के रोजमर्रा के आपराधिक कार्यों और संचालन को संभालता है। छोटा बेटा क्रिस्टोफर किनाहन जूनियर वित्तीय लेन-देन से जुड़े कामकाज देखता है।
जांचकर्ताओं को ऐसे पता चला क्रिस्टी का ठिकाना
दिलचस्प यह है कि क्रिस्टी किनाहन दुबई में क्रिस्टोफर विंसेंट नाम के नकली ऑनलाइन एकाउंट चलाता था और गूगल पर उन होटलों और रेस्तरां के लिए रिव्यू लिखा करता था जहां वह आया-जाया करता था। उसकी डिजिटल गतिविधियों ने ही जांचकर्ताओं को उसके सटीक ठिकानों का पता लगाने में मदद की। माना जा रहा है कि दुबई से बेदखली के बाद वह खाड़ी के किसी अन्य देश या एशिया में शरण लेने की कोशिश कर सकता है।
हिजबुल्ला के साथ भी जुड़े हैं तार
अमेरिकी वित्त विभाग ने इस नेटवर्क पर कड़े वित्तीय प्रतिबंध लगाए हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार, किनाहन नेटवर्क न केवल नशीले पदार्थों की तस्करी में संलिप्त है, हथियारों की अवैध खरीद-फरोख्त में भी बड़े पैमाने पर शामिल है। इस सिंडिकेट के तार मैक्सिकन और कोलंबियाई ड्रग-कार्टेल, लेबनान के उग्रवादी संगठन हिजबुल्ला और ईरान की खुफिया एजेंसियों से भी जुड़े पाए गए हैं।



