Last Updated:
Bageshwar News: बागेश्वर में त्रिवेणी संगम पर स्थित बाबा बागनाथ मंदिर परिसर के बाहर स्थापित भगवान शिव की विशाल प्रतिमा श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए एक प्रमुख आकर्षण बन गई है. यह प्रतिमा, जो सोने जैसी चमक वाली है, विशेष रूप से सुबह की आरती और शाम को सूर्यास्त के बाद रंग-बिरंगी रोशनी में जगमगाते समय और भी भव्य दिखाई देती है.
बागेश्वर: उत्तराखंड के बागेश्वर में त्रिवेणी संगम पर स्थित ऐतिहासिक बाबा बागनाथ मंदिर श्रद्धालुओं व पर्यटकों की आस्था का प्रमुख केंद्र है. साथ ही मंदिर परिसर के ठीक बाहर स्थापित सोने जैसी चमक वाली भगवान शिव की विशाल प्रतिमा लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचती है. इस भव्य प्रतिमा के साथ श्रद्धालुओं व पर्यटक फोटो खिंचवाना पसंद करते हैं. खासकर सुबह की आरती के समय और शाम को सूर्यास्त के बाद जब मंदिर परिसर रंग-बिरंगी रोशनी से जगमगाता है, तब प्रतिमा का दृश्य और भी सुंदर दिखाई पड़ता है.
स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा
स्थानीय जानकार हरीश सोनी बताते हैं कि जिस जगह पर भगवान शिव की मूर्ति बनी है, उस जगह पर पर्यटकों की सेल्फी लेने के लिए लाइन लगी रहती है. श्रद्धालु भी अपनी पूजा-पाठ पूरी करने के बाद इस जगह पर जरूर से फोटो खींचने आते हैं. बागेश्वर आने वाला हर व्यक्ति इस जगह की तस्वीर को यहां की निशानी के रूप में अपने साथ लेकर जाता है.
मूर्ति के ठीक बगल में बागनाथ पुल बनने से अब सीढ़ियों पर खड़े होकर मूर्ति के साथ फोटो खिंचवाते हैं, जो दिखने में बेहद ही खूबसूरत लगता है. मूर्ति के पीछे से सुंदर हरे-भरे पहाड़ और नदियां नजर आती हैं और बीच में मूर्ति साथ में फोटो खींचने वाला व्यक्ति कैद होता है, तो वास्तव में ये नजारा देखने में वाकई आकर्षित करता है.
पूर्व कैबिनेट मंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट
इस मूर्ति का निर्माण तत्कालीन विधायक व पूर्व कैबिनेट मंत्री चंदन राम दास के अथक प्रयास द्वारा किया गया था. शिव मूर्ति का निर्माण उनके ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल था. शिवमूर्ति 11 लाख रुपये विधायक निधि से बनी है. नवंबर 2016 में पूर्व कैबिनेट मंत्री चंदन राम दास ने अनावरण किया था. मूर्ति को ध्यान की अवस्था में बनाया गया है. मूर्ति के नीचे बाग का आसान है और ऊपर से साक्षात शिव भगवान ध्यान अवस्था में खड़े हैं. उनके गले में नाग लपेटे हुए हाथ में त्रिशूल है. यह नजारा ऐसा लगता है जैसे भगवान सिर्फ स्वयं दर्शन दे रहे हों. इस मूर्ति का निर्माण हरिद्वार की तर्ज पर किया गया है. जिस प्रकार से हरिद्वार में आपको बड़ी शिव मूर्ति देखने को मिलती है, ठीक उसी प्रकार जब आप बागेश्वर आएंगे, तो यहां भी आपको बड़ी शिव मूर्ति देखने को मिलेगी.
इस जगह का इतिहास
बागनाथ मंदिर प्रांगण उत्तराखंड के कुमाऊं में प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है. इस जगह को शिवनगरी के नाम से जाना जाता है, क्योंकि पौराणिक काल में मार्कडेय ऋषि ने इस स्थान पर तपस्या की थी और इसी दौरान सरयू नदी को अयोध्या जाना था, लेकिन ऋषि के तप के कारण वह आगे नहीं बढ़ पा रही थी. इसलिए उन्होंने भगवान शिव से मदद मांगी थी. तब भगवान शिव ने इस धरती पर बाघ और माता पार्वती ने गाय के रूप में दर्शन दिए थे. तब से इस जगह का आज तक विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है.
इन्हीं पौराणिक मान्यताओं के कारण देश-विदेश से भक्तगण यहां पहुंचते हैं और भगवान शिव का आशीर्वाद लेते हैं. ऐसे स्थान पर इस प्रकार की विशाल शिव मूर्ति का होना श्रृद्धालुओं की आस्था को बढ़ावा देना है. साथ ही स्थानीय पर्यटन को भी इस मूर्ति की बदौलत काफी मजबूती मिली है.
सोशल मीडिया का क्रेज
इस मूर्ति की वीडियो बनाने का क्रेज भी युवाओं में काफी अधिक है. आए दिन सोशल मीडिया पर इस मूर्ति के वीडियो अलग-अलग एंगल से वायरल होते हैं. खासतौर पर जब मौसम सुहावना हो बारिश हो रही हो या फिर चटक धूप हो, उस दौरान इस जगह की वीडियो खूब वायरल होता है. साथ ही दूरदराज से अन्य शहरों और जिलों से लोग खासतौर पर इस मूर्ति को देखने बागेश्वर आते हैं. अक्सर लोगों के मुंह से ऐसा सुना जाता है कि जब भी वह बागेश्वर दर्शन करने आते हैं, तो वह जरूर से पूछते हैं कि एक बड़ी सी शिवमूर्ति है, वह कहां है? हमें उसके साथ तस्वीर खींचनी है. इन्हीं सब बातों से आज यह मूर्ति पर्यटन को बढ़ावा देने में विशेष भूमिका निभा रही है.
About the Author
आर्यन सेठ, News18 Hindi में डिजिटल डेस्क पर जुड़े हैं और जनवरी 2026 से उत्तर प्रदेश की राजनीति, अपराध, प्रशासन, वायरल और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर खबरें लिखते हैं. जामिया मिलिया इस्लामिया दिल्ली से साल 2024 में…
और पढ़ें



