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कहीं रिटायरमेंट फंड खत्म न हो: अपनाएं तीन-बकेट फॉर्मूला; दो करोड़ से 57 साल तक चलेगा खर्च का गणित


बढ़ती महंगाई के इस दौर में यदि वृद्धावस्था की आर्थिक सुरक्षा पक्की करनी है, तो समय-आधारित बकेट स्ट्रेटजी, सही एसेट एलोकेशन और सूझबूझ के साथ निकासी नियमों का पालन करना अनिवार्य शर्त है। जीवन के हर पड़ाव पर कमाई की दौड़ के बाद जब व्यक्ति रिटायरमेंट की दहलीज पर पहुंचता है, तो उसके सामने सबसे बड़ा सवाल होता है- क्या जीवनभर की जमापूंजी परिवार को सुरक्षित रख पाएगी? जीएमआई इंडिया रिटायरमेंट रिसर्च रिपोर्ट 2025 के मुताबिक, भारत में केवल 37% लोगों के पास ही रिटायरमेंट प्लान है। आधे से भी कम लोगों को यह पता है कि उन्हें रिटायरमेंट के लिए कितने पैसों की आवश्यकता होगी।

कितना बड़ा होना चाहिए आपका रिटायरमेंट फंड?


  • रिटायरमेंट के समय आपके पास रिटायरमेंट के वर्ष के वार्षिक खर्च के 30 से 35 गुना के बराबर फंड होना एक आदर्श बेंचमार्क माना जाता है।

  • भारतीय अर्थशास्त्र और आंकड़ों के लिहाज से विशेषज्ञ 2.5 से तीन फीसदी की वार्षिक निकासी दर को सबसे सुरक्षित मानते हैं।

  • अगर आप 45 से 60 वर्ष की उम्र के बीच रिटायर हो रहे हैं, तो तीन फीसदी से अधिक की निकासी दर आपके फंड के लिए खतरनाक साबित हो सकती है।


सही एसेट एलोकेशन और प्रोडक्ट्स का चुनाव जरूरी


  • 60 वर्ष की आयु पार करने के बाद भी अपनी पूरी पूंजी को केवल फिक्स्ड डिपॉजिट या डेट में झोंक देना समझदारी नहीं है, क्योंकि महंगाई धीरे-धीरे आपके पैसे की असली ताकत को चाट जाती है।

  • पोर्टफोलियो का 60 से 70 फीसदी हिस्सा आय देने वाले उपकरणों (जैसे सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम, आरबीआई फ्लोटिंग रेट बॉन्ड, या डेट म्यूचुअल फंड) में रखें।

  • शेष 30 से 40 फीसदी हिस्सा इक्विटी या सोने जैसी जोखिम भरी संपत्तियों में रखें, ताकि पोर्टफोलियो की ग्रोथ महंगाई की रफ्तार के साथ बनी रहे।

  • वरिष्ठ नागरिक कैश फ्लो के लिए इक्विटी फंड के बजाय डेट फंड से SWP का विकल्प चुन सकते हैं।


दो करोड़ का फंड चलेगा 57 साल


मान लीजिए मिस्टर ‘ए’ 60 वर्ष की आयु में एक लाख रुपये मासिक खर्च और दो करोड़ रुपये के कुल रिटायरमेंट कॉर्पस के साथ रिटायर होते हैं। वह अगर इस दो करोड़ रुपये को तीन बकेट कंजर्वेटिव हाइब्रिड (8.6% रिटर्न, 25% हिस्सा इक्विटी और 75% हिस्सा डेट), अग्रेसिव हाइब्रिड (11.5% रिटर्न, 75% इक्विटी और 25% डेट) और इक्विटी (12.9% रिटर्न, पूरा शेयर बाजार या इंडेक्स फंड्स में निवेश)। महंगाई दर 6% मानकर जब चरणबद्ध तरीके से पैसे की निकासी की जाती है, तो मूलधन और उस पर मिलने वाले रिटर्न के तालमेल से यह दो करोड़ रुपये का फंड 57 वर्षों तक बिना खत्म हुए चल सकता है। बस शर्त यह है कि पैसे हमेशा पहली बकेट से शुरू करके क्रमानुसार अंत में इक्विटी वाली बकेट से निकाले जाएं। 



फंड सुरक्षित रखने के लिए टाइम-बेस्ड बकेट स्ट्रेटजी


रिटायरमेंट फंड को बाजार के उतार-चढ़ाव और महंगाई से बचाने के लिए तीन अलग-अलग बकेट में बांटकर निवेश करने से न केवल जोखिम कम होता है, बल्कि पैसा लंबे समय तक टिकता है:




























बकेट समय सीमा अनुशंसित निवेश विकल्प मुख्य उद्देश्य और कार्य
पहली बकेट (तत्काल खर्च के लिए) रिटायरमेंट के शुरुआती तीन से पांच वर्ष सुरक्षित उपकरण जैसे शॉर्ट-टर्म डेट या कंजरवेटिव हाइब्रिड फंड मासिक खर्चों को पूरा करना और जोखिम को न्यूनतम करना।
दूसरी बकेट (मध्यम अवधि के लिए) लगभग 8 से 15 वर्ष मध्यम अवधि के डेट और इक्विटी का मिश्रण मध्यम अवधि की जरूरतों को पूरा करना व महंगाई के साथ तालमेल बिठाते हुए पैसे को बढ़ाना।
तीसरी बकेट (दीर्घकालिक विकास के लिए) रिटायरमेंट के 15 साल बाद से निकासी इक्विटी जैसी उच्च विकास क्षमता वाली संपत्तियां शेयर बाजार के रिटर्न के दम पर फंड को महंगाई से ज्यादा तेजी से बढ़ाना।


अनुशासन और सही आवंटन है कुंजी


रिटायरमेंट का मतलब केवल काम बंद करना नहीं है, बल्कि एक ऐसी सुनहरी मंजिल की ओर बढ़ना है, जहां वित्तीय अनुशासन, सही एसेट एलोकेशन और एक सही सलाहकार की मदद से बनाई गई कस्टमाइज्ड निकासी योजना आपके बुढ़ापे को पूरी तरह चिंतामुक्त बना सकती है।



इन गलतियों से रिटायर लोगों को बचना चाहिए


  • लंबी उम्र की अनदेखी: लोग अक्सर अपनी योजना केवल 70 या 75 साल की उम्र तक की बनाते हैं, जबकि चिकित्सा प्रगति के कारण अब जीवनकाल बढ़कर 85 से 90 साल हो गया है।

  • रूढ़िवादी होना: 60 की उम्र पार करते ही पूरा पैसा केवल फिक्स्ड डिपॉजिट में झोंक देना समझदारी नहीं है। पोर्टफोलियो का 60-70% हिस्सा आय देने वाले साधनों में और 30-40% इक्विटी या सोने जैसी संपत्तियों में होना चाहिए, ताकि महंगाई से मुकाबला किया जा सके।

  • तरलता की कमी: सारा पैसा केवल जमीन या प्रॉपर्टी में न फंसाएं। मेडिकल इमरजेंसी और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए कम से कम 12 महीने का खर्च लिक्विड फंड या एफडी में अलग जरूर रखें।

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क्या आपकी रिटायरमेंट स्ट्रेटजी भविष्य के लिए तैयार है?


बढ़ती महंगाई और लंबी होती उम्र के इस दौर में आपका रिटायरमेंट फंड कब तक साथ देगा? क्या आपकी 3-बकेट स्ट्रेटजी और एसेट एलोकेशन का गणित सही है? इन सभी सवालों के जवाब जानने के लिए स्कैन करें।



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