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खेती में 18.5% टैक्स-फ्री मुनाफे का झांसा?: सेबी ने ग्रोपिटल पर कसा शिकंजा, 192.88 करोड़ लौटाने का आदेश


खेती में निवेश कर मोटा और टैक्स-फ्री मुनाफा कमाने का सपना दिखाने वाले डिजिटल प्लेटफॉर्म ग्रोपिटल पर बाजार नियामक सेबी ने बड़ी कार्रवाई की है। सेबी ने बिना वैध पंजीकरण के सामूहिक निवेश योजना चलाने के मामले में ग्रोपिटल और उससे जुड़ी 28 इकाइयों पर 25 करोड़ रुपये से ज्यादा की पेनल्टी लगाई है। साथ ही 5,208 निवेशकों से जुटाए गए 192.88 करोड़ रुपये 12 प्रतिशत सालाना ब्याज के साथ लौटाने का आदेश दिया गया है। सेबी के रिकॉर्ड में 28 सितंबर 2026 को ग्रोपिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ा अंतिम आदेश दर्ज है।

ग्रोपिटल ने निवेशकों को किस तरह का मुनाफा दिखाया था?

ग्रोपिटल ने कृषि में निवेश के नाम पर आम लोगों को 18.5 प्रतिशत तक टैक्स-फ्री मुनाफे का भरोसा दिया था। प्लेटफॉर्म ने अप्रैल 2020 से जनवरी 2024 के बीच निवेशकों से पैसा जुटाया। इसके लिए कुल 18 योजनाएं पेश की गईं और निवेश की न्यूनतम रकम सिर्फ 5,000 रुपये रखी गई थी। यानी छोटी रकम से शुरुआत करने वाले लोगों को भी खेती से जुड़े निवेश में पैसा लगाने का रास्ता दिया गया। सेबी के आदेश के मुताबिक, इस पूरी व्यवस्था को अब बंद करने और निवेशकों का पैसा वापस करने का निर्देश दिया गया है।

192.88 करोड़ रुपये कैसे जुटाए गए और एलएलपी का क्या खेल था?

सेबी के अनुसार, ग्रोपिटल ने निवेशकों को विश्वास दिलाने के लिए उन्हें लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप यानी एलएलपी में भागीदार बनाया। इससे निवेशकों को ऐसा लग सकता था कि वे कृषि से जुड़ी जमीन और कारोबार में सीधे हिस्सेदार हैं। लेकिन जांच में सामने आया कि जमीन की लीज और मालिकाना हक से जुड़े दस्तावेज निवेशकों के नाम पर नहीं थे। ये दस्तावेज प्रमोटर कंपनी योटा एग्रो या उसकी सहायक कंपनियों के नाम पर थे। सेबी के मुताबिक, निवेशकों के पास जमीन पर कोई मालिकाना हक नहीं था।

सेबी की जांच में जमीन और कमाई को लेकर क्या सामने आया?

सेबी की जांच में यह भी सामने आया कि प्लेटफॉर्म के पास उसके दावों के मुताबिक पर्याप्त जमीन नहीं थी। जांच में यह सवाल भी उठा कि जितनी उपज और राजस्व का दावा किया गया था, उसके अनुरूप जमीन और उत्पादन मौजूद नहीं था। इसी आधार पर नियामक ने पूरी योजना पर कार्रवाई की। सेबी के पूर्णकालिक सदस्य कमलेश वार्ष्णेय ने 28 सितंबर को जारी अंतिम आदेश में योजना बंद करने और निवेशकों की रकम लौटाने का निर्देश दिया। नियामक ने मुख्य प्रमोटरों और संबंधित इकाइयों को अधिकतम पांच साल तक प्रतिभूति बाजार से दूर रखने का भी आदेश दिया है।

निवेशकों को अब कितना पैसा वापस मिलेगा?

सेबी के आदेश के मुताबिक, निवेशकों से जुटाई गई 192.88 करोड़ रुपये की रकम उन्हें 12 प्रतिशत सालाना ब्याज के साथ लौटानी होगी। इसके अलावा ग्रोपिटल और उससे जुड़ी 28 इकाइयों पर कुल 25 करोड़ रुपये से ज्यादा की पेनल्टी लगाई गई है। कार्रवाई का मकसद निवेशकों की रकम वापस कराना और ऐसी योजना चलाने वालों पर नियामकीय कार्रवाई करना है। सेबी के आदेश में योजना को बंद करने के साथ संबंधित पक्षों पर प्रतिभूति बाजार से प्रतिबंध भी लगाया गया है।



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