कठुआकुछ ही क्षण पहले
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फाइल फोटो
जम्मू-कश्मीर में कठुआ के बसोहली कैंप में CISF जवान ने अपने साथियों पर गोली चला दी। फायरिंग में 4 CISF जवानों की मौत हो गई। मरने वालों में एक असिस्टेंट कमांडेंट भी शामिल हैं।
मरने वालों के नाम असिस्टेंट कमांडेंट अंकित कुमार पांडे, एसआई लक्ष्मण सिंह, कॉन्स्टेबल रफीक अहमद और कॉन्स्टेबल संदीप कुमार हैं।
ये जवान हिमाचल प्रदेश की सीमा से सटे बसोहली के पावर प्रोजेक्ट की सुरक्षा में तैनात थे। किसी बात को लेकर दो जवानों के बीच बहस हुई। इसी बीच उनमें से एक ने अंधाधुंध फायरिंग कर दी।
कठुआ पुलिस ने आरोपी जवान को गिरफ्तार कर लिया है। CISF के सीनियर अधिकारी भी घटनास्थल पर पहुंच गए हैं।

आरोपी के पास AK-47 राइफल और 150 गोलियां थीं
सूत्रों के मुताबिक, आरोपी हेड कॉन्स्टेबल अवधेश कुमार सिंह ने ऑफिस के परिसर में घुसकर अपनी सरकारी AK-47 राइफल से अंधाधुंध फायरिंग की। उनके पास 150 राउंड गोलियां थीं।
सभी सुरक्षाबलों के जवानों के बीच आपसी झगड़ों और विवादों के कारण अक्सर फायरिंग की घटनाएं सामने आती रहती हैं।

जहां इन जवानों की तैनाती थी, वो प्रोजेक्ट 12 साल से बंद पड़ा है
सेवा-3 प्रोजेक्ट 9 मेगावाट का रन ऑफ रिवर प्रोजेक्ट है। यह मस्का गांव, बसोहली तहसील में रावी नदी पर बना है। यह हिमाचल प्रदेश बॉर्डर से सटा इलाका है। इसे 1993 में शुरू किया गया था और 25 जून 2002 को कमीशन हुआ था।
2013 की बाढ़ में इसका 300 मीटर लंबा वाटर कंडक्टर / नहर और इंस्पेक्शन रोड बह गया था। तब से ये पूरी तरह बंद है। अगस्त 2024 / 2025 में फिर से भारी बारिश से और ज्यादा नुकसान हुआ है, डिजाइन में भी खामी बताई गई थी। यह नहर रावी नदी के बहुत करीब बनाई गई थी।
IIT रुड़की को DPR बनाने का काम दिया गया, उसने 2022 में रिपोर्ट दी – लागत 66.43 करोड़ रुपये बताई। मार्च 2023 में JKSPDC के बोर्ड ने इस पर फैसला टाल दिया। अब सरकार इसे PPP मॉडल पर रिवाइव करना चाहती है।





