सपा मुखिया अखिलेश यादव ने राज्यसभा चुनाव में चौंकाने वाला नाम उतारा है। उन्होंने जाने-माने बिजनेसमैन मुकेश अंबानी के करीबी धनराज परिमल नथवानी को उम्मीदवार बनाया है।
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बुधवार सुबह 11 बजे अखिलेश ने नथवानी और सपा महासचिव रामगोपाल यादव का नामांकन दाखिल कराया। निर्वाचन आयोग कार्यालय में अखिलेश हाथ पकड़कर परिमल को कुर्सी तक लेकर आए। नामांकन के बाद बधाई भी दी।
धनराज, रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड में ग्रुप प्रेसिडेंट हैं। जामनगर और वडोदरा मैन्युफैक्चरिंग डिवीजन से जुड़े रहे हैं। वह रिलायंस न्यू एनर्जी लिमिटेड में भी डायरेक्टर हैं। उनके पिता परिमल नथवानी रिलायंस इंडस्ट्रीज के कॉर्पोरेट अफेयर्स डायरेक्टर हैं। झारखंड से निर्दलीय राज्यसभा सांसद हैं। 3 महीने पहले NDA के समर्थन से राज्यसभा पहुंचे थे।
यूपी में राज्यसभा की 10 सीटों पर चुनाव होना है। मौजूदा विधायकों की संख्या के लिहाज से NDA को 8 और सपा को 2 सीटें मिलना तय है। हालांकि, अखिलेश 3 सीटों पर प्रत्याशी उतारने की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि, तीसरा उम्मीदवार कौन होगा, इस पर सस्पेंस बरकरार है।
परिमल को टिकट देने पर कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता सीपी राय ने कहा-
अच्छा होता कि सपा प्रमुख किसी कार्यकर्ता को राज्यसभा का प्रत्याशी बनाते। ऐसे धनकुबेरों को जनता के हित की चिंता नहीं होती है।

नामांकन की 3 तस्वीरें देखिए-

धनराज परिमल नथवानी (अखिलेश के बाएं) नामांकन दाखिल करते हुए। इस दौरान अखिलेश उन्हें फॉर्म भरने में मदद करते रहे।

रामगोपाल यादव ने भी राज्यसभा के लिए अपना नामांकन दाखिल किया।

नामांकन दाखिल करने बाद सपा नेताओं ने फोटो खिंचवाई। शिवपाल यादव भी मौजूद रहे।
धनराज परिमल नथवानी के बारे में जानिए-
- धनराज का जन्म 5 फरवरी 1986 को मुंबई में हुआ था। लंदन के रेजेंट्स बिजनेस स्कूल से इंटरनेशनल बिजनेस और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट से MBA (कॉर्पोरेट लॉ और पब्लिक रिलेशंस) की पढ़ाई है। 2014 में भूमि नथवानी से शादी हुई।
- खेल प्रशासन में गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन (GCA) के अध्यक्ष हैं। 2022 में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बाद यह पद संभाला था। इससे पहले वे एसोसिएशन के उपाध्यक्ष रह चुके हैं। नरेंद्र मोदी स्टेडियम के निर्माण में अहम भूमिका निभाई थी। द्वारका देवस्थान समिति के उपाध्यक्ष भी हैं।

पीएम मोदी के साथ धनराज परिमल नथवानी और उनके पिता परिमल नाथवानी। (फाइल फोटो)

अनंत-राधिका अंबानी के साथ धनराज परिमल नथवानी और उनकी पत्नी भूमि नथवानी। (फाइल फोटो)
धनरज के पिता परिमल 3 महीने पहले चौथी बार राज्यसभा सांसद बने
- परिमल नाथवानी ने झारखंड से पहली बार 2008 और दूसरी बार 2014 में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीत हासिल की थी। वह 2020 से आंध्र प्रदेश से वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के सहयोग से राज्यसभा सदस्य थे। 2026 में उन्हें NDA ने समर्थन दिया और वे कांग्रेस के प्रणव झा को हराकर राज्यसभा पहुंचे थे।
- परिमल ने कभी मुंबई में कोल्ड ड्रिंक्स और साबुन की फैक्ट्री लगाई थी। 1990 के दशक में उन्होंने गुजरात के वडोदरा में 40 के करीब पीसीओ भी चलाए। शेयर बाजार में किस्मत आजमाने के बाद बड़े आर्थिक नुकसान से गुजरे। लेकिन, 1997 में रिलायंस इंडस्ट्रीज के संस्थापक धीरूभाई अंबानी से मुलाकात ने सब बदल दिया।
- जामनगर भूमि अधिग्रहण नथवानी की देखरेख में हुआ। गुजरात की इसी जमीन पर दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरी बनी। वह धीरूभाई अंबानी के काफी करीब आ गए। परिमल मुकेश और नीता अंबानी के भी काफी करीब हैं। जियो नेटवर्क के विस्तार में अहम भूमिका निभाई है।

3 महीने पहले झारखंड में जीत के बाद नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने परिमल नाथवानी को गले से लगा लिया था।
तीसरा नाम सरप्राइजिंग होगा, पूर्व सांसद ने दावेदारी पेश की
अखिलेश ने मंगलवार को दोबारा अपने विधायकों को पार्टी ऑफिस बुलाया था। इससे पहले, राज्यसभा में नामांकन के लिए पर्चे खरीद लिए गए थे। सपा के पुराने नेता और बदांयू से सांसद रह चुके सलीम इकबाल शेरवानी भी सपा कार्यालय पहुंचे थे।
अखिलेश से मुलाकात कर राज्यसभा के लिए अपनी दावेदारी पेश की थी। अखिलेश ने उन्हें 4 अक्टूबर तक लखनऊ में ही रहने को कहा है। कार्यालय से बाहर निकलते हुए सलीम ने कहा था- हमारी ख्वाहिश है कि पार्टी उन्हें राज्यसभा भेजे। उम्मीद करते हैं कामयाबी मिलेगी।

2 कैंडिडेट का चुना जाना तय, तीसरे के लिए 12 और विधायकों की जरूरत
यूपी विधानसभा में कुल सीटों की संख्या 403 है। मौजूदा समय में 7 सीटें खाली हैं। यानी, मौजूदा समय में 396 विधायक हैं। राज्यसभा की 10 सीटों पर चुनाव के लिए जो फॉर्मूला अपनाया जाएगा, वह 396/11+1 होगा। यानी 396 को 11 से भाग देने पर जो संख्या आएगी, उसमें एक जोड़ा जाएगा। यानी एक सदस्य को चुनने के लिए 37 प्रथम वरीयता वोट की जरूरत पड़ेगी।
सपा के पास मौजूदा समय में 100 विधायक ही हैं। इसमें से भी रमाकांत यादव जेल में बंद हैं। यानी संख्या घटकर 99 रह जाती है। ऐसे में सपा को तीसरे प्रत्याशी को जिताने के लिए कम से कम 12 और वोटों की जरूरत पड़ेगी। सपा को ऐसे प्रत्याशी की तलाश है, जो इस अंतर को खत्म कर सके।

भाजपा को 8वां कैंडिडेट जिताने के लिए 6 वोटों की जरूरत पड़ेगी
वहीं, भाजपा को 8वां कैंडिडेट जिताने के लिए कम से कम 6 वोटों की जरूरत पड़ेगी। ऐसे में दूसरी और तीसरी वरीयता के वोटों की गिनती अहम हो जाती है। इसके लिए विधायकों को बकायदा प्रशिक्षण दिया जाता है। उन्हें बताया जाता है कि किस विधायक को किस कैंडिडेट के लिए प्रथम वरीयता पर रखना है और किसे दूसरी व तीसरी वरीयता पर। इसी तरह गिनती में निर्धारित कोटे तक पहुंचने पर संबंधित प्रत्याशी को विजयी घोषित कर दिया जाता है।

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