नई दिल्ली1 घंटे पहले
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एयर फोर्स के 94वें स्थापना दिवस की पूर्व संध्या पर नई दिल्ली में एयर वॉरियर्स को संबोधित करते वायुसेनाध्यक्ष एयर चीफ मार्शल एपी सिंह।
वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कहा कि वायु सेना सही दिशा में आगे बढ़ रही है। लेकिन इसकी रफ्तार थोड़ी और तेज करने की जरूरत है। उन्होंने लाइट फाइटर प्लेन Mk-1A प्रोजेक्ट में देरी पर चिंता जताई।
वे एयर फोर्स के 94वें स्थापना दिवस की पूर्व संध्या पर नई दिल्ली में बुधवार को एयर वॉरियर्स और IAF के पूर्व जवानों को संबोधित रह रहे थे।
तेज भर्ती और ज्यादा लड़ाकू ताकत की जरूरत
एयर चीफ मार्शल सिंह ने तेजी से बदलती तकनीक के दौर में IAF की क्षमताएं बढ़ाने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि IAF में ज्यादा क्षमता, तेज भर्ती और ज्यादा लड़ाकू ताकत की जरूरत है।
बदली रणनीति ऑपरेशन सिंदूर में उपयोगी रही
- IAF चीफ ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में IAF का ध्यान ‘प्लेटफॉर्म-केंद्रित’ से ‘क्षमता-केंद्रित’ रणनीति पर गया है। इस रणनीति ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अपनी उपयोगिता साबित की।
- उन्होंने कहा कि सैन्य अभियानों ने IAF की क्षमता की परीक्षा ली है। सैन्य अभ्यासों ने उसे चुनौती दी है।
- मानवीय मदद और आपदा राहत अभियानों ने IAF को सीमा के बाहर तक पहुंचाया है। वहीं, एयर डिप्लोमेसी ने साझेदारी का दायरा बढ़ाया है।
एयर चीफ मार्शल एपी सिंह इसी महीने रिटायर होंगे। उनकी जगह एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित IAF की कमान संभालेंगे। उन्हें उत्तराधिकारी नामित किया गया है।
तेजस मार्क-1A की डील से अब तक का अपडेट
फरवरी 2021 में रक्षा मंत्रालय ने HAL के साथ 83 तेजस मार्क-1A विमानों के लिए 48,000 करोड़ रुपए का समझौता किया था। विमानों की पहली खेप मार्च 2024 में मिलनी थी। हालांकि, अब तक वायुसेना को एक भी विमान नहीं मिला है।
वायुसेना इन विमानों को शामिल करना चाहती है, क्योंकि उसके फाइटर जेट स्क्वॉड्रन की संख्या घटकर 29 रह गई है। वायुसेना के फाइटर स्क्वॉड्रन की आधिकारिक मंजूर संख्या 42 है।
रक्षा मंत्रालय ने पिछले साल सितंबर में HAL के साथ 97 तेजस मार्क-1A लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट खरीदने के लिए 62,370 करोड़ रुपए का एक और समझौता किया था।
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अभी भारतीय वायुसेना के पास 36 राफेल लड़ाकू विमान हैं।
भारत की 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने की योजना आगे बढ़ रही है। डिफेंस सेक्रेटरी राजेश कुमार सिंह ने कहा कि इस प्रोजेक्ट पर इस वित्त वर्ष के अंत तक फैसला हो सकता है।
अभी कंपनियों से मिले प्रस्तावों की जांच की जा रही है। पढ़ें पूरी खबर…
