FSSAI के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) राजित पुनहानी के अनुसार, नियामक इन कंपनियों के लिए नियमों को अधिक सख्त बनाने और उनकी जवाबदेही तय करने की दिशा में काम कर रहा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ग्राहकों को ऑनलाइन खाद्य पदार्थ खरीदते समय सही और पूरी जानकारी मिले। फिलहाल ग्राहक मोबाइल ऐप के जरिए कुछ ही मिनटों में दूध, फल, सब्जियां, पैकेज्ड फूड और अन्य किराना सामान मंगवा सकते हैं। ऐसे में खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण हो जाता है।
प्रस्तावित बदलावों के तहत ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर खाद्य उत्पादों की लिस्टिंग में मैन्युफैक्चरिंग डेट यानी निर्माण की तारीख, एक्सपायरी डेट यानी समाप्ति की तारीख और बैच नंबर जैसी जानकारियां दिखाना जरूरी किया जा सकता है। इससे ग्राहकों को उत्पाद खरीदने से पहले उसकी ताजगी और उपयोग की समयसीमा समझने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, यदि कोई विक्रेता या कंपनी अपने उत्पाद के बारे में भ्रामक दावा करती है, तो संबंधित ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जवाबदेही तय करने पर भी विचार किया जा रहा है। इससे कंपनियों को उत्पादों की जानकारी की निगरानी और सत्यापन के लिए अधिक सतर्क रहना पड़ सकता है।
FSSAI डार्क किचन से जुड़ी जानकारी को लेकर भी नियम सख्त करने पर विचार कर रहा है। डार्क किचन ऐसे स्थान होते हैं, जहां केवल ऑनलाइन ऑर्डर के लिए खाना तैयार किया जाता है और ग्राहकों के बैठकर खाने की व्यवस्था नहीं होती। प्रस्ताव के तहत इन किचन की तस्वीर और पता देना अनिवार्य किया जा सकता है, जिससे उनकी पहचान और संचालन में पारदर्शिता बढ़ेगी।
इसके साथ ही डार्क स्टोर की जांच बढ़ाने पर भी विचार किया जा रहा है। डार्क स्टोर वे गोदाम या छोटे वितरण केंद्र होते हैं, जहां से क्विक कॉमर्स कंपनियां सामान की तेजी से डिलीवरी करती हैं। जांच के दौरान यह देखा जा सकता है कि खाद्य पदार्थ उचित तापमान और सुरक्षित परिस्थितियों में रखे जा रहे हैं या नहीं। खासकर फ्रोजन फूड यानी जमे हुए खाद्य पदार्थों के लिए निर्धारित तापमान बनाए रखना जरूरी है। कुल मिलाकर, इन संभावित नियमों का उद्देश्य ग्राहकों की सुरक्षा बढ़ाना, खाद्य उत्पादों की जानकारी पारदर्शी बनाना और ऑनलाइन डिलीवरी कंपनियों की जवाबदेही मजबूत करना है। हालांकि, इन बदलावों को प्रस्तावित कदमों के रूप में ही देखा जाना चाहिए; इनके अंतिम स्वरूप और लागू होने की स्थिति की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।