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त्योहारों तक राहत: सस्ते प्याज की बिक्री बंद करने की तैयारी, दिवाली तक ही होगी बिक्री


सरकार आम लोगों को सस्ते दामों पर प्याज केवल दिवाली तक ही उपलब्ध कराएगी। इसके बाद सस्ती प्याज की बिक्री बंद कर दी जाएगी। वर्तमान में 100 से अधिक शहरों में नैफेड और एनसीसीएफ द्वारा प्याज की खुदरा बिक्री 35 रुपये प्रति किलो के हिसाब से की जा रही है। हालांकि इसके बावजूद प्याज के थोक और खुदरा भाव में कोई ज्यादा गिरावट नहीं आई है। 

उपभोक्ता मामलों के विभाग के मुताबिक प्याज का अखिल भारतीय खुदरा औसत मूल्य 10 अक्तूबर को 51.71 रुपये प्रति किलो दर्ज किया गया। एक साल पहले प्याज का भाव 26.73 रुपये प्रति किलो था। नोएडा और दिल्ली में अच्छी गुणवत्ता का प्याज 80 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है। 

क्यों बंद होगी सस्ती प्याज की बिक्री?

सरकार और नैफेड व एनसीसीएफ के अनुसार, बाजार में अब नए प्याज की आवक शुरू हो गई है। कर्नाटक और राजस्थान में नई प्याज की आवक शुरू हो चुकी है, जबकि आंध्र प्रदेश में भी नई फसल मंडियों तक पहुंचने लगी है।

सरकार का मानना है कि आने वाले महीने तक नई फसल बड़े पैमाने पर बाजार में उपलब्ध हो जाएगी। चूंकि अभी त्योहारी सीजन चल रहा है और नवरात्रों के बाद मांग में और तेजी आने की संभावना है, इसलिए उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए इसे दीवाली तक ही बाजार में बेचने का निर्णय लिया गया है।

23,000 टन की हो चुकी है बिक्री 

सरकार ने प्याज की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए बफर स्टॉक से बिक्री शुरू की थी। इसके लिए करीब 1.21 लाख मीट्रिक टन प्याज रखा गया था। अब तक नैफेड करीब 11,800 मीट्रिक टन प्याज बेच चुका है। वहीं, एनसीसीएफ भी लगभग इतनी ही मात्रा में प्याज की बिक्री कर चुका है। इस तरह दोनों एजेंसियां मिलकर करीब 23,000 मीट्रिक टन प्याज बेच चुकी हैं। दोनों एजेंसियों के जरिये 100 से अधिक शहरों में प्याज बेचा जा रहा है।

307 लाख मीट्रिक टन उत्पादन

रबी सीजन में प्याज का उत्पादन करीब 307 लाख मीट्रिक टन रहा, जबकि देश में औसतन हर महीने लगभग 17 लाख मीट्रिक टन प्याज की खपत होती है। इस हिसाब से सालाना खपत करीब 204 लाख मीट्रिक टन बैठती है। यानी रबी सीजन का उत्पादन देश की सालाना खपत से करीब 103 लाख मीट्रिक टन अधिक है। हालांकि, प्याज की उपलब्धता पूरे साल समान नहीं रहती। फसल की आवक के बीच अंतर और त्योहारी मांग के कारण कीमतों में उतार-चढ़ाव आता है। नई फसल की आवक बढ़ने से बाजार में आपूर्ति सुधरने और कीमत नीचे आने की उम्मीद है।



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