Homeट्रैवलरणकपुर से कुंभलगढ़ तक 16 किमी का नया वनपथ तैयार

रणकपुर से कुंभलगढ़ तक 16 किमी का नया वनपथ तैयार


पाली: पर्यटकों और एडवेंचर के शौकीनों के लिए एक बेहद शानदार और रोमांचक खबर सामने आई है. कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य की सादड़ी रेंज में एक नया 16 किलोमीटर लंबा वनपथ शुरू होने जा रहा है. अब पर्यटक रणकपुर जैन मंदिर से सीधे अरावली की पर्वतमालाओं और सघन जंगलों के बीच से होते हुए कुंभलगढ़ दुर्ग तक पहुँच सकेंगे. मांडीगढ़ और बेड़ाथाक से होकर गुजरने वाला यह नया सफ़ारी मार्ग प्राकृतिक सौंदर्य, ऊंचे पर्वतों और वन्यजीवों के दीदार से भरपूर होगा. कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य की सादड़ी रेंज में नया वनपथ शुरू हुआ है.

पर्यटक रणकपुर जैन मंदिर से सीधे कुंभलगढ़ दुर्ग तक पहुंचेंगे. मांडीगढ़-बेडाथाक होते हुए यह 16 किलोमीटर का जंगल सफर प्राकृतिक सौंदर्य और वन्यजीवों से भरपूर होगा.

पर्यटन को मिलेगा बढावा
सादड़ी रेंज में 6 किलोमीटर और कुंभलगढ़ रेंज में 10 किलोमीटर का पर्वतीय रास्ता शामिल है. वनपथ को सुचारू करने की तैयारियां अंतिम चरण में हैं. उपवन संरक्षक डॉ. रामानंद भाकर, सहायक वन संरक्षक प्रमोद सिंह नरुका और क्षेत्रीय वन अधिकारी अरविंद सिंह झाला ने इसका वेरिफिकेशन किया है. इस नए वनपथ से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और वनकर्मियों की गश्त मजबूत होगी. सादड़ी रेंज में मुच्छाला महावीर-नलवानिया-रणकपुर, तीर्थंकर नेचर ट्रेल और मोडिया-सेवटा बेरा-रूपन माता-बीजापुर संचालित हैं. वन्यजीवों के संरक्षण के लिए यह सहायक के रूप में काम करेगा.

प्रमुख बिंदु और मार्ग की खासियतें
16 किलोमीटर का जंगल सफर: इस नए मार्ग में 6 किलोमीटर का हिस्सा सादड़ी रेंज और 10 किलोमीटर का पर्वतीय रास्ता कुंभलगढ़ रेंज में आता है.

अंतिम चरण में तैयारियाँ: उपवन संरक्षक डॉ. रामानंद भाकर, सहायक वन संरक्षक प्रमोद सिंह नरुका और क्षेत्रीय वन अधिकारी अरविंद सिंह झाला ने मौके पर पहुँचकर रूट का वेरिफिकेशन पूरा कर लिया है.

सफ़ारी का मुख्य आकर्षण: पर्यटक अरावली की हरी-भरी वादियों के बीच मांडीगढ़ और बेड़ाथाक से होकर गुजरेंगे, जहाँ वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक आवास में देखने का अनूठा अनुभव मिलेगा.

पर्यटन और वन्यजीव संरक्षण को मिलेगी मजबूती
नया रास्ता चालू होने से वनकर्मियों की गश्त और निगरानी अधिक प्रभावी होगी, जिससे वन्यजीवों की सुरक्षा मजबूत होगी.सादड़ी रेंज में पहले से ही मुच्छाला महावीर-नलवानिया-रणकपुर, तीर्थंकर नेचर ट्रेल और मोडिया-सेवटा बेरा-रूपन माता-बीजापुर जैसे मार्ग पर्यटकों के लिए संचालित हो रहे हैं.

NTCA के सुझावों पर हो रहा विस्तार, बाघ पुनर्वास की तैयारी
कुंभलगढ़ में बाघ पुनर्वास (Tiger Reintroduction) की तैयारियों के तहत राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) की टीम ने सर्वे कर कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए थे. उन्हीं सुझावों के आधार पर अभयारण्य क्षेत्र में वनपथों का विस्तार किया जा रहा है. इस 16 KM के वनपथ के अलावा विभाग ने एक-दो अन्य मार्गों के प्रस्ताव भी तैयार कर उच्च स्तर पर स्वीकृति के लिए भेजे हैं. इनकी मंजूरी मिलते ही क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों में तेजी आएगी और वन विभाग के राजस्व में भी बढ़ोतरी होगी.



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