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डिविडेंड स्टॉक: मंदी में ढाल और तेजी में कमाल, निवेश पर नियमित आय-सुरक्षा दोनों हासिल करने का अचूक फॉर्मूला


उतार-चढ़ाव वाले बाजार में निवेशक जिस चीज की तलाश करते हैं, वह है सुकून। यहीं पर डिविडेंड देने वाले शेयर चुपचाप अपना काम करते हैं। हो सकता है कि वे तेजी के दौर में सबसे चमकदार नाम न हों, लेकिन अनिश्चितता बढ़ने पर वे बेहद मूल्यवान हो जाते हैं। कल्पना करें, आपने शहर के बीचोंबीच एक दुकान खरीदी। एक तो उस दुकान की कीमत हर साल बढ़ रही है और दूसरा, वहां से हर महीने तय किराया भी आ रहा है। शेयर बाजार में डिविडेंड यील्ड स्ट्रेटजी बिल्कुल यही काम करती है। यह उन निवेशकों के लिए सुरक्षा कवच है, जो बाजार के उतार-चढ़ाव के बीच फिक्स्ड इनकम की चाहत रखते हैं।

क्या है यह स्ट्रेटजी और क्यों है जरूरी?

डिविडेंड उस किराये की तरह है, जो आपको अपनी ही संपत्ति (कंपनी के शेयर) से मिलता है। कंपनी के पास दो विकल्प होते हैं, या तो वह सारा मुनाफा बिजनेस बढ़ाने में लगा दे, या उसका एक हिस्सा आपको नकद में दे। डिविडेंड देने वाली कंपनियां आमतौर पर मैच्योर और स्थापित बिजनेस होती हैं। उनके पास इतना कैश होता है कि वे बिजनेस भी चला सकती हैं और शेयरधारकों को खुश भी रख सकती हैं।

 

पिछले साल से लें सबक

बीता साल बाजार के लिए किसी रोलर-कोस्टर राइड से कम नहीं रहा। रूस-यूक्रेन हो या मिडिल-ईस्ट का तनाव, ग्लोबल कमोडिटी बाजार में भारी उथल-पुथल रही। इसी अनिश्चितता ने कुछ भारतीय कंपनियों को हीरो बना दिया। मेटल सेक्टर की दिग्गज कंपनी वेदांता लिमिटेड ने दिखा दिया कि जब कमोडिटी की कीमतें बढ़ती हैं, तो डिविडेंड का जादू कैसे चलता है। वेदांता ने एक साल में न केवल 56% का रिटर्न दिया, बल्कि 6.32% की डिविडेंड यील्ड भी दी। यानी किसी ने एक लाख रुपये लगाए थे, तो साल के अंत में उसकी वैल्यू 1.56 लाख रुपये हुई और करीब 6,300 रुपये कैश भी मिले। यही है टोटल रिटर्न की ताकत।

डिविडेंड की शहंशाह कंपनियां






























कंपनी डिविडेंड यील्ड
Coal India 6.15%
BPCL 4.65%
ONGC 4.37%
Powergrid 3.75%
Vedanta Ltd. 6.32%

डिविडेंड री-इन्वेस्टमेंट है असली फायदा

डिविडेंड का असली फायदा तब मिलता है, जब आप उसे खर्च न करें। अगर आप मिलने वाले डिविडेंड को वापस उसी शेयर में निवेश कर देते हैं, तो आप कंपाउंडिंग के पहिये को रफ्तार देते हैं। लंबे समय में, पोर्टफोलियो की ग्रोथ में 30% से 40% हिस्सा सिर्फ री-इन्वेस्ट किए गए डिविडेंड का होता है।

किसे अपनानी चाहिए यह रणनीति?

यह रणनीति हर किसी के लिए फिट नहीं होती, लेकिन तीन तरह के लोगों के लिए यह ब्रह्मास्त्र है, इसमें शामिल हैं;


  • रिटायरमेंट की योजना बना रहे लोग: जिन्हें वेतन की तरह एक फिक्स्ड इनकम चाहिए ताकि वे बाजार की हर छोटी-बड़ी गिरावट पर शेयर बेचने को मजबूर न हों।

  • जोखिम से बचने वाले निवेशक जिन्हें रातों-रात पैसा डबल नहीं करना,  बल्कि अपनी मेहनत की कमाई को महंगाई से बचाकर धीरे-धीरे बढ़ाना है।

  • हाइब्रिड पोर्टफोलियो वाले युवा: जो अपने पोर्टफोलियो में कुछ हाई-ग्रोथ (जोखिम भरे) शेयरों के साथ स्थिरता के लिए डिविडेंड स्टॉक रखते हैं।

सावधानी भी जरूरी

निवेशकों के लिए बड़ी चेतावनी भी है। हर वो शेयर सोना नहीं होता, जो बहुत ज्यादा डिविडेंड दे रहा हो। कभी-कभी कंपनियां अपने बिजनेस में गिरावट को छिपाने के लिए या प्रमोटर को कैश की जरूरत होने पर भारी डिविडेंड बांट देती हैं।

हर परिस्थिति में जीत आपकी

उन निवेशकों के लिए जो भारी उतार-चढ़ाव के बजाय एक सहज यात्रा चाहते हैं, उनके लिए डिविडेंड यील्ड स्ट्रेटजी व्यावहारिक रूप से सही है। यह बाजार की बढ़त में भाग लेने की अनुमति देती है और यह सुनिश्चित करती है कि रिटर्न पूरी तरह से केवल कीमतों की हलचल पर निर्भर न रहे। सिर्फ ऊंचे परसेंटेज को देखकर निवेश न करें। उन बिजनेस को चुनें जो कल भी रहेंगे और नकदी पैदा करने की क्षमता पर शंका न हो। डिविडेंड निवेश ‘धैर्य और अनुशासन’ का दूसरा नाम है। – डॉ. रवि सिंह

चीफ रिसर्च ऑफिसर, मास्टरट्रस्ट

ये फिल्टर याद रखें


  •  कंसिस्टेंसी : कंपनी कम से कम पिछले 5-10 साल से लगातार डिविडेंड दे रही हो।

  •  कर्ज : क्या कंपनी कर्ज लेकर डिविडेंड दे रही है? अगर हां, तो निवेश से बचें।

  •  पे-आउट रेश्यो : कंपनी अपने मुनाफे का कितना हिस्सा बांट रही है? अगर यह 80-90% है, तो भविष्य में ग्रोथ रुक सकती है। 40% से 60% का रेश्यो आदर्श माना जाता है।



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