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oi-Pallavi Kumari
Iran Nuclear Radiation Alert: मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर नई चिंता सामने आई है। ईरान ने दावा किया है कि हालिया अमेरिकी-इजरायली सैन्य कार्रवाई के दौरान उसके नतांज न्यूक्लियर साइट (परमाणु केंद्र) को निशाना बनाया गया।
इसके बाद अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने संभावित रेडियोलॉजिकल खतरे को लेकर गंभीर टिप्पणी की है। ईरान में न्यूक्लियर रेडिएशन अलर्ट की बातें चल रही हैं। सवाल यह है कि क्या स्थिति परमाणु बम जैसी हो सकती है या मामला सीमित दायरे का है।

नतांज न्यूक्लियर साइट पर हमले के दावे के बाद IAEA की बड़ी चेतावनी?
संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी की बोर्ड बैठक में ईरान के प्रतिनिधि रजा नजाफी ने कहा कि देश की “शांतिपूर्ण और निगरानी में चल रही” परमाणु सुविधाओं को फिर निशाना बनाया गया है। जब उनसे पूछा गया कि कौन-सी साइट प्रभावित हुई, तो उन्होंने नतांज का नाम लिया। हालांकि एजेंसी की ओर से अभी तक किसी बड़े नुकसान या रेडिएशन रिसाव की पुष्टि नहीं की गई है।
IAEA की चेतावनी क्या कहती है (IAEA Warning Explained)
IAEA के महानिदेशक राफेल ग्रोसी (Rafael Mariano Grossi) ने बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की विशेष बैठक में कहा कि क्षेत्र में जारी सैन्य हमलों से न्यूक्लियर सुरक्षा पर खतरा बढ़ गया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि रेडियोलॉजिकल रिलीज की संभावना को पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता।
ग्रॉसी के मुताबिक, अगर किसी परमाणु साइट को गंभीर नुकसान हुआ तो बड़े शहरों जितने इलाके खाली कराने की नौबत आ सकती है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अभी तक ईरान या उसके पड़ोसी देशों में सामान्य स्तर से अधिक रेडिएशन दर्ज नहीं हुआ है। IAEA का इंसिडेंट एंड इमरजेंसी सेंटर सक्रिय है और क्षेत्रीय सुरक्षा निगरानी नेटवर्क अलर्ट पर है।
न्यूक्लियर रेडिएशन का खतरा ईरान में कहां-कहां है? (Nuclear Risk Locations)
🔹ईरान में कई अहम परमाणु प्रतिष्ठान हैं, जहां खतरा सैद्धांतिक रूप से हो सकता है।
🔹नतांज यूरेनियम संवर्धन का प्रमुख केंद्र है। यहां सेंट्रीफ्यूज मशीनें लगी हैं। अगर हमला होता है तो यूरेनियम हेक्साफ्लोराइड गैस लीक हो सकती है, जो जहरीली और हल्की रेडियोएक्टिव होती है।
🔹फोर्डो पहाड़ के अंदर बना बंकर है, जहां उच्च संवर्धित यूरेनियम रखा जाता है।
🔹इस्फहान में यूरेनियम कन्वर्जन और फ्यूल फैब्रिकेशन की सुविधाएं हैं।
🔹अराक हेवी वॉटर रिएक्टर साइट है।
🔹परचिन सैन्य अनुसंधान से जुड़ा परिसर माना जाता है।
🔹बुशहर ईरान का एकमात्र ऑपरेशनल परमाणु बिजलीघर है।
🔹IAEA के मुताबिक अभी तक इनमें से किसी पर भी रेडिएशन लीक या बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है।
क्या यह परमाणु बम जैसा असर होगा (Bomb-Like Impact?)
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर किसी न्यूक्लियर साइट केंद्र पर हमला होता है तो रेडिएशन का असर स्थानीय स्तर तक सीमित रहने की संभावना ज्यादा है। यह चेर्नोबिल जैसी व्यापक तबाही नहीं होगी, क्योंकि ईरान में इस समय कोई बड़ा पावर रिएक्टर विस्फोट जैसी स्थिति में नहीं है। खतरा मुख्य रूप से जहरीली गैस या (Radioactive Materials) के सीमित रिसाव का है।
रेडिएशन लीक होने पर शरीर पर क्या असर होता है? क्या चेरनोबिल जैसा हादसा दोहराया जा सकता है, और क्या हैं ‘रेडिएशन सिकनेस’ के लक्षण?
परमाणु संयंत्रों या न्यूक्लियर साइट्स से रेडिएशन लीक की खबरें आते ही लोगों के मन में सबसे पहला सवाल उठता है कि इसका असर इंसानी शरीर पर कितना गंभीर हो सकता है। क्या यह स्थिति 1986 में हुए Chernobyl disaster जैसी तबाही में बदल सकती है? और आखिर ‘रेडिएशन सिकनेस’ होती क्या है?
यहां इन सभी सवालों के सीधे, वैज्ञानिक और विश्वसनीय जवाब।
रेडिएशन शरीर में क्या करता है?
रेडिएशन अदृश्य ऊर्जा है, जो शरीर की कोशिकाओं के डीएनए को नुकसान पहुंचा सकती है। नुकसान की तीव्रता इस बात पर निर्भर करती है कि व्यक्ति कितनी मात्रा में और कितनी देर तक रेडिएशन के संपर्क में रहा।
World Health Organization (WHO) के मुताबिक उच्च मात्रा में आयनाइजिंग रेडिएशन के संपर्क में आने से कोशिकाएं तेजी से नष्ट हो सकती हैं, खासकर वे जो जल्दी-जल्दी विभाजित होती हैं, जैसे बोन मैरो, आंतों की परत और त्वचा की कोशिकाएं। यही कारण है कि गंभीर मामलों में खून बनने की प्रक्रिया, इम्यून सिस्टम और पाचन तंत्र सबसे पहले प्रभावित होते हैं।
क्या यह चेरनोबिल जैसा हादसा बन सकता है?
चेरनोबिल हादसा एक बड़े रिएक्टर विस्फोट और लंबे समय तक खुले रेडिएशन उत्सर्जन का परिणाम था। आधुनिक न्यूक्लियर प्लांट्स में सुरक्षा मानक पहले से कहीं ज्यादा सख्त हैं। हर रेडिएशन लीक चेरनोबिल जैसी आपदा में बदले, यह जरूरी नहीं।
IAEA बार-बार यह स्पष्ट करता रहा है कि किसी भी न्यूक्लियर घटना की गंभीरता का आकलन रेडिएशन के स्तर, फैलाव के दायरे और कंटेनमेंट सिस्टम की स्थिति पर निर्भर करता है। छोटे या सीमित लीक को समय रहते कंट्रोल कर लिया जाए तो व्यापक तबाही रोकी जा सकती है।
‘रेडिएशन सिकनेस’ क्या है?
उच्च मात्रा में रेडिएशन के अचानक संपर्क में आने से जो स्थिति बनती है, उसे मेडिकल भाषा में Acute Radiation Syndrome कहा जाता है, जिसे आम बोलचाल में ‘रेडिएशन सिकनेस’ कहते हैं।
WHO के मुताबिक, इसके लक्षण रेडिएशन की डोज पर निर्भर करते हैं।
शुरुआती लक्षण
- मतली और उल्टी
- तेज कमजोरी
- सिरदर्द
- बुखार
- मध्यम से गंभीर स्थिति
- बाल झड़ना
- त्वचा पर जलन या छाले
- खून की कमी
- बार-बार संक्रमण
अत्यधिक डोज के मामलों में
- आंतरिक अंगों को स्थायी नुकसान
- बोन मैरो फेल होना
- जान का खतरा
- WHO यह भी बताता है कि कम स्तर के रेडिएशन के लंबे समय तक संपर्क से कैंसर का खतरा बढ़ सकता है, खासकर थायरॉयड कैंसर।
क्या हर रेडिएशन एक्सपोजर घातक होता है?
नहीं। यह एक बड़ा भ्रम है। हम सभी रोजमर्रा की जिंदगी में प्राकृतिक बैकग्राउंड रेडिएशन के संपर्क में रहते हैं, जो आमतौर पर सुरक्षित स्तर पर होता है। खतरा तब पैदा होता है जब एक्सपोजर तय सीमा से कहीं अधिक हो।
IAEA के मानकों के मुताबिक रेडिएशन की मात्रा को मापकर ही वास्तविक जोखिम का अंदाजा लगाया जा सकता है। इसलिए किसी भी न्यूक्लियर घटना के बाद आधिकारिक आंकड़ों और वैज्ञानिक आकलन का इंतजार करना जरूरी होता है।
अमेरिका की चेतावनी और ईरान की प्रतिक्रिया (US Warning & Iran Response)
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि अगर ईरान ने जून में निशाना बनाए गए परमाणु स्थलों को दोबारा सक्रिय करने की कोशिश की तो नए हमले हो सकते हैं।
वहीं ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा है कि इमारतें नष्ट होने से देश का कार्यक्रम नहीं रुकेगा। उनके अनुसार परमाणु गतिविधियां स्वास्थ्य और नागरिक जरूरतों के लिए हैं, न कि हथियारों के लिए।
कूटनीति ही रास्ता (Return to Diplomacy)
IAEA प्रमुख ने साफ कहा कि परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमला कभी नहीं होना चाहिए, क्योंकि इससे गंभीर रेडियोधर्मी परिणाम हो सकते हैं। उन्होंने सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने और बातचीत की मेज पर लौटने की अपील की।
ग्रॉसी ने दोहराया कि परमाणु मसलों का स्थायी समाधान केवल कूटनीति से ही संभव है। एजेंसी लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए है और जरूरत पड़ने पर सदस्य देशों की मदद के लिए तैयार है। फिलहाल हालात चिंताजनक जरूर हैं, लेकिन पैनिक की स्थिति नहीं है।
ईरान का भविष्य कैसा होगा? जंग, संकट या कोई नया मोड़
ईरान आने वाले वर्षों में किस दिशा में जाएगा, यह सवाल जितना अहम है उतना ही जटिल भी। अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार कमर आगा ने वनइंडिया हिंदी से बातचीत में कहा, ”फिलहाल इसका साफ-साफ जवाब देना मुश्किल है। हालात तेजी से बदल रहे हैं और क्षेत्रीय राजनीति में अनिश्चितता बनी हुई है। ईरान इस समय गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है। महंगाई, बेरोजगारी और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का दबाव पहले से ही देश की अर्थव्यवस्था को कमजोर कर चुका है। लेकिन इसके बावजूद यह उम्मीद कम है कि ईरान पर लगे प्रतिबंध जल्द हटेंगे या मौजूदा सैन्य तनाव अचानक थम जाएगा।”
उनका कहना है कि ईरान के भीतर एक स्पष्ट सोच काम कर रही है कि अमेरिका के सामने झुकना विकल्प नहीं है। यही कारण है कि दबाव के बावजूद तेहरान अपनी रणनीति बदलने के मूड में नजर नहीं आता। सैन्य मोर्चे पर भी ईरान पूरी तरह खाली हाथ नहीं है। कमर आगा के अनुसार, मौजूदा हालात में ईरान के पास इतने संसाधन और हथियार हैं कि वह कम से कम एक महीने तक बड़े स्तर की लड़ाई लड़ सकता है।
हालांकि वे यह भी जोड़ते हैं कि युद्ध किसी के लिए स्थायी समाधान नहीं होता। आने वाले समय में टकराव बढ़ने की आशंका है, लेकिन स्थिरता फिलहाल दोनों पक्षों में से किसी की प्राथमिकता या संभावना के रूप में दिखाई नहीं देती। कुल मिलाकर, ईरान का भविष्य फिलहाल अनिश्चितता, आर्थिक दबाव और संभावित सैन्य तनाव के बीच झूलता नजर आ रहा है।



