गोरखपुर के प्रशांत और रेनू ने ठीक पिछले साल दिवाली पर 50 लाख रुपये का लोन 8 फीसदी ब्याज दर पर लेकर नए घर में कदम रखे थे। छोटा परिवार था, खर्चे कम थे, इसलिए होम लोन की ईएमआई आसानी से चुक रही थी। इस दिवाली पर प्रशांत और रेनू घर में नए मेहमान के स्वागत की तैयारी में जुटे थे। तभी भारतीय रिजर्व बैंक ने चार साल बाद रेपो रेट बढ़ा दिया। रेपो रेट बढ़ते ही प्रशांत के बैंक ने भी मैसेज भेज दिया- मैसेज देखकर प्रशांत की सांसें अटक गईं- होम लोन की ब्याज दर और ईएमआई का बोझ बढ़ चुका था।
अब सवाल यह था कि बढ़ती महंगाई के दौर में वे बजट को कैसे संभालें?
ये परेशानी अकेले प्रशांत की नहीं है, बल्कि लाखों लोगों की है….
आरबीआई के आंकड़ें बताते हैं कि 68.2% फ्लोटिंग-रेट लोन बाहरी बेंचमार्क यानी रेपो रेट से जुड़े हैं। इसलिए रेपो रेट में 0.25 फीसदी बढ़ोतरी का सीधा असर होम लोन ग्राहकों की जेब पर पड़ रहा है।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल है कि ईएमआई बढ़ाएं या लोन की अवधि?
- जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो बैंक आम तौर पर आपके सामने दो विकल्प रखते हैं, या तो आप अपनी हर महीने की ईएमआई की रकम बढ़ा दें या फिर लोन चुकाने की कुल अवधि लंबी कर दें।
- अगर आप ईएमआई को पुराना ही रहने देते हैं और लोन चुकाने की अवधि बढ़ा लेते हैं, तो भले ही आज आपको राहत लगे, लेकिन लंबी अवधि में आप बैंक को लाखों रुपये अतिरिक्त ब्याज के रूप में चुका रहे होंगे।
- यदि आपकी जेब अनुमति देती है, तो अवधि बढ़ाने के बजाय ईएमआई की रकम बढ़ाना हमेशा समझदारी भरा कदम होता है, जिससे आप भारी-भरकम ब्याज के जाल से बच जाते हैं।
बढ़ी ईएमआई और ब्याज के बोझ को कम करने के और भी तरीके हैं:
आंशिक अग्रिम भुगतान : जब भी आपके पास कोई सरप्लस कैश या विंडफॉल इनकम (जैसे टैक्स रिफंड या मैच्योरिटी राशि) आए, तो उसका एक हिस्सा लोन प्रीपेमेंट में लगाएं। प्रीपेमेंट के बाद लोन अवधि घटाने का विकल्प चुनें, न कि ईएमआई कम करने का।
यहां हम प्रशांत का उदाहरण लेते हैं। अगर प्रशांत 1 लाख रुपये का एकमुश्त प्रीपेमेंट करता है, तो ऐसा करके, वह पुनर्भुगतान अवधि के दौरान अपनी ब्याज लागत को लगभग 3.51 लाख रुपये तक कम कर सकता है।
आय बढ़ने के साथ ईएमआई बढ़ाएं: यदि एकमुश्त प्रीपेमेंट्स करना मुश्किल है, तो आप स्वेच्छा से ईएमआई बढ़ाने पर विचार कर सकते हैं। 2,000 या 5,000 रुपये की मामूली बढ़ोतरी भी आपके ब्याज के बोझ को काफी हद तक कम कर सकती है।
मान लीजिए रेपो रेट बढ़ने के बाद, आप 20 साल वाले 50 लाख रुपये के होम लोन पर अपनी ईएमआई स्वेच्छा से 5,000 रुपये बढ़ाने का निर्णय लेते हैं। आप न केवल अपने देय ब्याज को लगभग 12 लाख रुपये कम कर देंगे, बल्कि आपके लोन की अवधि भी घटकर लगभग 16 साल रह जाएगी।
हर साल एक अतिरिक्त ईएमआई का भुगतान करें: यदि आप साल में मिलने वाले बोनस या इन्सेंटिव से हर साल एक अतिरिक्त ईएमआई चुका देते हैं, तो शुरुआती वर्षों में यह मूलधन को तेजी से घटाता है और भविष्य के कई वर्षों के ब्याज की बचत करता है।
अपने बैंक से बातचीत करें : आपके होम लोन की दर में रेपो रेट, ऑपरेटिंग लागत और क्रेडिट रिस्क प्रीमियम शामिल होता है। ऑपरेटिंग लागत की समीक्षा हर तीन साल में कर इसे रीसेट किया जा सकता है। अगर आपका क्रेडिट स्कोर सुधरता है, तो आप बैंक से ब्याज दर घटाने के लिए कह सकते हैं।
यदि 2025 में होम लोन लेने के बाद आपका क्रेडिट स्कोर 750 से सुधरकर 800 से अधिक हो गया है, तो आप ब्याज दर घटवा सकते हैं। अगर बैंक आपकी नहीं सुनता, तो आप अन्य बैंक के पास जा सकते हैं।
आइए जानते हैं, इस चढ़ती महंगाई और बढ़ती ब्याज दरों के दौर में आप लोन का बोझ कैसे हल्का कर सकते हैं। ऐसे समझें नुकसान और फायदे का खेल…
प्रशांत के होम लोन पर ब्याज दर बढ़ने का असर
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विवरण
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मूल स्थिति
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विकल्प 1: ईएमआई बढ़ाई
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विकल्प 2: अवधि बढ़ाई
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लोन की राशि
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₹50 लाख
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₹50 लाख
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₹50 लाख
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ब्याज दर
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8.0%
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8.5%
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8.5%
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मासिक ईएमआई
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₹41,822
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₹43,391
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₹41,822
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ईएमआई में बढ़ोतरी
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—
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₹1,569
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कोई बढ़ोतरी नहीं
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लोन की कुल अवधि
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240 माह (20 साल)
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240 माह (20 साल)
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276 माह (23 साल)
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कुल ब्याज
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₹50.37 लाख
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₹54.14 लाख
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₹57.97 लाख
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अवधि बढ़ाने का असर
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—
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अवधि अपरिवर्तित
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36 माह (3 साल) अधिक
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अतिरिक्त ब्याज का अंतर
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—
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अवधि बढ़ाने के विकल्प से ₹3.83 लाख कम
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₹3.83 लाख अतिरिक्त
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वित्तीय झटकों से उत्साह कम न हो
महंगाई और ब्याज दरों के इस दौर में घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि एक अनुशासित वित्तीय रणनीति अपनाने की आवश्यकता है। अपने खर्चों पर नजर रखें, समय पर प्रीपेमेंट करें और अपने सिबिल स्कोर को मजबूत रखकर हमेशा बेहतर डील्स की तलाश में रहें। थोड़ी सी सूझबूझ, अनुशासित बजट और सही समय पर उठाए गए कदम आपके घर के सपने को सुरक्षित भी रखेंगे और कर्ज के बोझ को भी हल्का करेंगे। –विजय माहेश्वरी, फाउंडर, स्टॉकटिक कैपिटल