Homeट्रैवल'गुलाब जामुन स्ट्रीट' के नाम से यूपी का कौन-सा गांव फेमस है?

‘गुलाब जामुन स्ट्रीट’ के नाम से यूपी का कौन-सा गांव फेमस है?


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Gulab Jamun Street: देशभर में गुलाब जामुन मिलता है, लेकिन क्या आप जानते है एक गांव ऐसा है जिसकी पहचान ही गुलाब जामुन है. यदि आप फूड लवर हैं, ऐसी जगहों के बारे में जानना और घुमना पसंद करते हैं तो ये लेख आपके लिए है. यहां जानिए यूपी के एक ऐसे गांव के बारे में जिसे गुलाब जामुन स्ट्रीट कहा जाता है.

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भारत में कई तरह की मिठाइयां बनती है. इसमें गुलाब जामुन भी शामिल है, ब्रथ डे पार्टी हो या फिर शादी, ये मिठाई जरूर परोसी जाती है. अमीर से लेकर गरीब तक हर कोई इस रसीली मीठाई का दीवाना है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि उत्तर प्रदेश में एक ऐसी जगह भी है, जहां गुलाब जामुन सिर्फ मिठाई नहीं, बल्कि पूरे इलाके की पहचान बन चुका है?

लखीमपुर खीरी जिले के मैगलगंज नाम के कस्बे को ‘गुलाब जामुन का गांव’ और ‘गुलाब जामुन स्ट्रीट’ के नाम से जाना जाता है. यहां इस मिठाई को इतना ज्यादा पसंद किया जाता है कि सभी दुकानों पर एक ही मिठाई मिलती है. इतना ही नहीं यहां मिट्टी के घड़े में गुलाब जामुन परोसा जाता है.

मैगलगंज को क्यों कहते हैं गुलाब जामुन का गांव?
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में स्थित मैगलगंज अपनी खास मिठाई के लिए जाना जाता है. द बेटर इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, यहां 100 से ज्यादा दुकानें गुलाब जामुन बेचती हैं. इनमें से कई दुकानों पर पारंपरिक तरीके से मटके वाला गुलाब जामुन तैयार किया जाता है. इस जगह की खासियत है कि यहां गुलाब जामुन केवल त्योहारों पर खाने वाली मिठाई नहीं है, बल्कि लोकल खानपान और पहचान का अहम हिस्सा है.

मटके वाले गुलाब जामुन की 
आमतौर पर गुलाब जामुन बनाने के लिए मावा और दूध को मिलाकर आटा तैयार किया जाता है. फिर इसके छोटे-छोटे गोले बनाकर तेल या घी में सुनहरा होने तक तला जाता है. इसके बाद इन्हें चीनी की चाशनी में डुबोया जाता है. मैगलगंज में गुलाब जामुन को पारंपरिक मिट्टी के मटके में परोसने की परंपरा इसकी खास पहचान बन गई. साल 1941 में शुरू हुई इस कहानी के साथ धीरे-धीरे कई दुकानें जुड़ती चली गईं और पूरा इलाका इस मिठाई के लिए मशहूर हो गया.

क्या गुलाब जामुन की शुरुआत भारत में हुई थी?
गुलाब जामुन को आज भारतीय मिठाइयों का अहम हिस्सा माना जाता है, लेकिन इसके इतिहास की जड़ें मध्य पूर्व और मध्य एशिया की मिठाई परंपराओं से भी जुड़ी मानी जाती हैं. समय के साथ भारतीय रसोइयों ने स्थानीय सामग्री और तरीकों से इसे नया स्वाद और पहचान दी. यही वजह है कि आज गुलाब जामुन देश के अलग-अलग हिस्सों में कई रूपों में मिलता है.

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शारदा सिंहSenior Sub Editor

शारदा सिंह एक अनुभवी लाइफस्टाइल पत्रकार हैं, जिनके पास डिजिटल मीडिया और कंटेंट लेखन के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का अनुभव है. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से…

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