इस तरह एक ही दिन में सोने की कीमत में उल्लेखनीय तेजी देखने को मिली। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, घरेलू बाजार में सोने की कीमतें केवल अंतरराष्ट्रीय दरों पर निर्भर नहीं करतीं, बल्कि रुपये और डॉलर की विनिमय दर, आयात लागत, वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और निवेशकों की मांग का भी इन पर असर पड़ता है। जब भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर होता है, तो विदेशों से सोना खरीदना महंगा हो जाता है। इसका असर घरेलू बाजार में सोने की कीमतों पर पड़ सकता है। बुधवार को भी यही स्थिति देखने को मिली। दूसरी ओर, चांदी की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ। चांदी का भाव 1.98 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर स्थिर रहा। इस बीच, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 21 पैसे कमजोर होकर 95.28 प्रति डॉलर पर बंद हुआ।
डॉलर की मजबूती और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से रुपये पर दबाव बढ़ा। भारत अपनी सोने की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए रुपये की कमजोरी से आयात बिल बढ़ने की आशंका रहती है। कारोबारियों के मुताबिक, रुपये में गिरावट ने अंतरराष्ट्रीय बाजार की कमजोरी के बावजूद घरेलू सोने की कीमतों को सहारा दिया। अब बाजार की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के नीतिगत फैसले और वैश्विक आर्थिक संकेतों पर रहेगी। इन कारकों के साथ रुपये की चाल भी आने वाले दिनों में सोने और चांदी की कीमतों को प्रभावित कर सकती है। हालांकि, कीमतों में आगे तेजी आएगी या गिरावट होगी, यह निश्चित रूप से कहना संभव नहीं है। निवेशकों और खरीदारों को खरीदारी से पहले बाजार के ताजा भाव और स्थानीय सर्राफा बाजार की स्थिति पर ध्यान देना चाहिए।