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रियल एस्टेट: ऊंची कीमतें और 5.50% रेपो रेट का दबाव, क्या इस त्योहारी सीजन के दौरान रफ्तार पकड़ पाएगा बाजार?


पिछले कुछ वर्षों की आक्रामक तेजी के बाद इस साल त्योहारी सीजन के दौरान भारतीय रियल एस्टेट बाजार में घर खरीदारी की मांग संतुलित और स्थिर रहने की संभावना है। बाजार में उतावलेपन के बजाय ज्यादा समझदारी और सतर्कता देखी जा रही है। इसका मुख्य कारण यह है कि महंगाई में वृद्धि के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने अक्तूबर में रेपो रेट को 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत कर दिया है और अपने नीतिगत रुख को ‘सोच-समझकर सख्ती बरतने’ की ओर मोड़ दिया है। हालांकि धनतेरस और दिवाली जैसे मौकों पर डेवलपर्स छूट और आकर्षक योजनाएं पेश कर रहे हैं, लेकिन ऊंची प्रॉपर्टी कीमतों और ब्याज दर चक्र में बदलाव के कारण खरीदार बेहद व्यावहारिक रुख अपना रहे हैं।

त्योहारों के मौसम में मांग की मौजूदा स्थिति कैसी है?

पारंपरिक रूप से त्योहारों का समय घरों की बिक्री के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है और डेवलपर्स को आने वाले महीनों में मांग में सुधार की उम्मीद है। हालांकि, इस बार त्योहारों के मौसम से ठीक पहले मांग काफी कम रही है। प्रॉपर्टी की लगातार बढ़ती कीमतें खरीदारों के लिए चिंता का मुख्य विषय बनी हुई हैं। इस स्थिति से निपटने के लिए डेवलपर्स ग्राहकों को त्वरित निर्णय लेने के लिए इंसेंटिव, विशेष ऑफर्स और अधिक एग्रेसिव प्राइसिंग पर निर्भर हैं। नाइट फ्रैंक इंडिया के रिसर्च डायरेक्टर विवेक राठी का मानना है कि यदि डेवलपर्स सही इंसेंटिव देते हैं तो बाजार में बिक्री की रफ्तार बढ़ेगी, हालांकि यह बढ़त संभवतः 2024 के त्योहारों के स्तर जितनी मजबूत नहीं होगी।

ब्याज दरों में बढ़ोतरी और क्रेडिट ग्रोथ का हाउसिंग फाइनेंस पर क्या असर?

गोदरेज हाउसिंग फाइनेंस के एमडी एवं सीईओ मेहरनोश टाटा के अनुसार, आरबीआई के आंकड़ों से पता चलता है कि जुलाई 2026 में एनबीएफसी और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों द्वारा दिए जाने वाले रिटेल लोन में सालाना आधार पर 21.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो पिछले साल की 13.7 प्रतिशत वृद्धि के मुकाबले मजबूत क्रेडिट गतिविधि को दर्शाती है। इसके अलावा, नेशनल हाउसिंग बैंक का रेजिडेंशियल प्राइस इंडेक्स भी कई बाजारों में प्रॉपर्टी की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी की पुष्टि करता है। 

कोटक महिंद्रा बैंक में मॉर्गेज (होम लोन) के बिजनेस हेड अकुल सक्सेना का कहना है कि नीतिगत फैसला यह याद दिलाता है कि ब्याज दरें एक चक्र में चलती हैं। घर खरीदने के शुरुआती कुछ साल कर्ज लेने वालों के लिए आर्थिक रूप से सबसे चुनौतीपूर्ण होते हैं क्योंकि उन्हें नई ईएमआई के साथ घर के अन्य खर्चों को संभालना होता है और अपनी बचत का पुनर्गठन करना होता है। ऐसे में मुख्य सवाल यह है कि किसी परिवार का बजट कितनी अनिश्चितता को आसानी से वहन कर सकता है।

घर खरीदने का फैसला लेते समय ग्राहक किन प्रमुख बातों पर विचार कर रहे हैं?

विशेषज्ञों के मुताबिक केवल त्योहारों का उत्साह ही घर की बिक्री तय नहीं करता। गोदरेज हाउसिंग फाइनेंस के मेहरनोश टाटा बताते हैं कि पहली बार घर खरीदने वालों के लिए मासिक खर्च में छोटा सा अंतर भी उनकी खरीदारी क्षमता को प्रभावित करता है। घर खरीदने का निर्णय लेते समय परिवार मुख्य रूप से इन पहलुओं का मूल्यांकन कर रहे हैं:


  • लोन राशि और ईएमआई: स्वीकृत लोन की रकम और मासिक किस्तों का कुल बजट पर प्रभाव।

  • वित्तीय जिम्मेदारियां: परिवार की मौजूदा आय, पहले से मौजूद वित्तीय देनदारियां और दीर्घकालिक पुनर्भुगतान क्षमता।

  • फाइनेंसिंग विकल्प: हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों की प्राथमिकता जिम्मेदारी से फाइनेंसिंग उपलब्ध कराना है ताकि ग्राहक पूरी अवधि में सुगमता से किस्तें चुका सकें।

किफायती हाउसिंग सेगमेंट के लिए क्या अनुमान हैं?

नाइट फ्रैंक इंडिया के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर शिशिर बैजल के अनुसार, पिछले साल के ऊंचे आधार के कारण नवरात्रि के दौरान रजिस्ट्रेशन में कुछ कमी आई है, लेकिन दैनिक आंकड़े संतुलित तस्वीर पेश करते हैं। वहीं, तत्वम बिल्डर्स एंड डेवलपर्स के संस्थापक व एमडी राहुल मारू का अनुमान है कि 2026 के त्योहारी सीजन में मुंबई का आवासीय बाजार स्थिर रहेगा और बिक्री में 4 प्रतिशत की गिरावट से लेकर 5 प्रतिशत तक की वृद्धि हो सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 2 करोड़ रुपये से कम कीमत वाले मकानों की मांग प्रमुख बनी रहेगी, क्योंकि अक्टूबर 2025 में मुंबई में हुए कुल रजिस्ट्रेशन में इनकी हिस्सेदारी लगभग 80 प्रतिशत थी।



2026 का यह त्योहारी सीजन भारतीय रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए एक संतुलित और यथार्थवादी चरण को दर्शाता है। जहां 5.50% रेपो दर और ऊंची कीमतें खरीदारों को सतर्क बना रही हैं, वहीं डेवलपर्स के इंसेंटिव और 2 करोड़ रुपये से कम वाले सेगमेंट की मजबूत मांग बाजार की गतिशीलता को बनाए रखेगी। आगामी तिमाहियों में बाजार का प्रदर्शन इस बात पर निर्भर करेगा कि डेवलपर्स खरीदारों की प्राथमिकताओं और मूल्य श्रेणियों के साथ कितना बेहतर तालमेल बिठा पाते हैं।



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