Bhopal
oi-Laxminarayan Malviya
MP News Deori sagar: देवरी में इस बार होली दहन सिर्फ एक पारंपरिक त्योहार नहीं रहा, बल्कि यह शहर की सबसे बड़ी चर्चा का विषय बन गया है। शिक्षा सदन चौराहे पर महाकाली गणेश उत्सव समिति द्वारा तैयार की गई होलिका की प्रतिमा ने लोगों का ध्यान पूरी तरह खींच लिया है।
हाथ में मोबाइल फोन और छाता थामे होलिका की यह “न्यू मॉडल” आकृति सोशल मीडिया से लेकर नगर के चौराहों तक तेजी से वायरल हो रही है। प्रतिमा के साथ भक्त प्रहलाद की आकृति भी स्थापित की गई है, जो प्रहलाद-होलिका की कथा को आधुनिक संदेश के साथ जोड़ रही है।

समिति के सदस्य राहुल नामदेव और गोलू मिश्रा ने बताया कि इस अनोखी कल्पना को जबलपुर की तर्ज पर विशेष रूप से डिजाइन किया गया है। उन्होंने कहा, “हमने होलिका को आज के दौर की महिला के रूप में दिखाया है-मोबाइल और छाता थामे, जो आज की व्यस्त और आधुनिक जीवनशैली का प्रतीक है। लेकिन संदेश वही पुराना है-बुराई का अंत और अच्छाई की जीत। प्रहलाद की आकृति से यह संदेश दिया गया है कि सच्चाई और विश्वास हमेशा जीतते हैं, चाहे समय कितना भी बदल जाए।”

17 वर्षों की परंपरा, हर साल नई पहचान
शिक्षा सदन चौराहे पर होलिका दहन का आयोजन पिछले 17 वर्षों से निरंतर हो रहा है। समिति के अनुसार इसकी शुरुआत वर्ष 2008 में हुई थी और तब से हर साल कुछ नया और रचनात्मक प्रस्तुत करने की परंपरा बनी हुई है। इस बार की होलिका प्रतिमा ने नगर में सबसे ज्यादा चर्चा बटोरी है। लोग इसे देखने और फोटो खिंचवाने के लिए चौराहे पर पहुंच रहे हैं। सोशल मीडिया पर इसकी तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं, जहां लोग इसे “आधुनिक होलिका” और “21वीं सदी की होलिका” कहकर शेयर कर रहे हैं।
सबसे बड़ा आयोजन, व्यापक तैयारियाँ
नगर में 20 से 30 स्थानों पर होलिका दहन की तैयारियां होती हैं, लेकिन शिक्षा सदन चौराहे का आयोजन सबसे भव्य और आकर्षक माना जाता है। समिति ने विधिवत पूजन-अर्चना की व्यवस्था की है। रात्रि में होलिका दहन के साथ भजन-कीर्तन और सामूहिक आरती होगी। बड़ी संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय निवासी शामिल होने वाले हैं। समिति ने सुरक्षा, सफाई और ट्रैफिक व्यवस्था के लिए भी पूरी तैयारी की है।
समिति के प्रमुख सदस्य
इस भव्य आयोजन के पीछे मेहनत करने वाले प्रमुख सदस्यों में शामिल हैं:
राहुल नामदेव, दीपक नामदेव, राम अवतार प्रजापति, गोलू मिश्रा, विक्की नामदेव, अमित रैकवार, बंटी खत्री
उमेश सेन, सोनू सावलानी, पवन लखेरा, अमर नामदेव,हर्ष नामदेव
ये सभी सदस्य कई महीनों से इस आयोजन की तैयारियों में जुटे हुए थे। उन्होंने बताया कि हर साल कुछ नया करने का प्रयास रहता है, ताकि लोग परंपरा के साथ-साथ आधुनिक संदेश भी ग्रहण करें।
राजनीतिक और सामाजिक मायने
यह होलिका दहन अब केवल धार्मिक आयोजन नहीं रह गया है। यह परंपरा और आधुनिकता के संगम का प्रतीक बन चुका है। लोग इसे सोशल मीडिया पर “क्रिएटिव होलिका” और “आज की होलिका” कहकर शेयर कर रहे हैं। कुछ लोग इसे सकारात्मक संदेश के रूप में देख रहे हैं कि होली बुराइयों को जलाने का प्रतीक है, और आज के दौर में मोबाइल और छाता थामे होलिका यह दिखाती है कि बुराई हर रूप में आ सकती है, लेकिन अच्छाई हमेशा जीतती है।
शिक्षा सदन चौराहे की यह होलिका अब देवरी की नई पहचान बन चुकी है। यह आयोजन न केवल धार्मिक है, बल्कि सामाजिक जागरूकता और रचनात्मकता का भी उदाहरण है। नगरवासियों का कहना है कि हर साल की तरह इस बार भी यह आयोजन यादगार रहेगा।



