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Iran Controversial Case: जबरन संबंध बनाने पर 16 साल की लड़की को फांसी, खामेनेई का सबसे विवादित केस, खुला राज?


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oi-Siddharth Purohit

Iran Controversial Case: इजरायल अमेरिका और ईरान के बीच जंग चल रही है। अली खामेनेई को 1 मार्च के दिन एक एयर स्ट्राइक में मार दिया गया। वहीं ईरानी एयर स्ट्राइक से कई मुस्लिम देश न चाहते हुए भी इस जंग आ गए हैं। अली खामेनेई पर सुप्रीम लीडर रहते हुए महिलाओं के दमन के आरोप लगते रहे हैं। ऐसे में हम आपको बताने जा रहे हैं 2004 का वो विवादित केस जिसे छुपाने की पूरी कोशिश हुई लेकिन उसने सबसे ज्यादा विवाद पैदा किया।

सबके सामने दी गई 16 साल की बच्ची को फांसी

15 अगस्त 2004 की सुबह, ईरान के नेका शहर में एक 16 साल की किशोरी अतेफेह सहलेह को भीड़ के बीच से खींचते हुए एक अस्थायी फांसी घर तक ले जाया गया। उस पर पवित्रता के विरुद्ध अपराधों (Chastity) का आरोप लगाया गया था। उसी सुबह, सबके सामने उसे फांसी दे दी गई। यह घटना सिर्फ एक कानूनी सज़ा नहीं थी, बल्कि ऐसा मामला था जिसने बाद में दुनिया भर में बहस को जन्म दिया।

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क्या था गुनाह?

ईरान की नैतिक पुलिस के मुताबिक अतेफेह का गुनाह यह था कि वह बिना शादी के यौन संबंध में लिप्त थी। अदालत में उसे दोषी ठहराया गया। मामला तेहरान की अपील अदालत तक पहुंचा, और वहां उसकी मौत की सज़ा को मंजूरी दे दी गई। यानी उच्च अदालत ने भी इस फैसले को सही माना और सज़ा को बरकरार रखा।

टूटा हुआ परिवार और अकेलापन

अतेफेह एक ज़रूरतमंद किशोरी थी। उसकी मां की मृत्यु उसके बचपन में ही हो गई थी। उसके पिता ड्रग्स के आदी हो गए थे और परिवार की जिम्मेदारी निभाने की स्थिति में नहीं थे। वह अपने दादा-दादी के साथ रहती थी, लेकिन कहा जाता है कि वे उसे अनदेखा करते थे। उसकी साइकोलॉजिकल रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि वह भावनात्मक रूप से बेहद अकेली थी और प्यार और अपनापन खोज रही थी।

पहले भी मिली थी सज़ा: 100 कोड़े

यह पहला मौका नहीं था जब अतेफेह को सज़ा मिली हो। इससे पहले भी उसे पवित्रता के खिलाफ (Chastity) काम करने के आरोप में 100 कोड़े मारे गए थे। उसका कथित अपराध सिर्फ इतना था कि वह एक लड़के के साथ कार में अकेली बैठी थी। यानी निजी व्यवहार को भी अपराध की तरह देखा गया।

13 साल की उम्र में शुरू हुआ रिश्ता

रिपोर्ट्स के मुताबिक जब वह 13 साल की थी, तब उसका एक उम्रदराज़ टैक्सी ड्राइवर के साथ संबंध शुरू हुआ। तुलना के लिए देखें तो ऑस्ट्रेलिया में अगर 50 साल का व्यक्ति किसी किशोरी के साथ यौन संबंध बनाता है, तो इसे वैधानिक बलात्कार माना जाता है। लेकिन ईरान के शरिया कानून में लड़कियों के लिए सहमति की उम्र 9 साल मानी जाती है। ऐसे मामलों में अक्सर लड़की को ही पुरुष को बहकाने वाली कहा जाता है।

उम्र में हेरफेर का आरोप

अतेफेह के मामले में यह भी आरोप लगा कि न्यायाधीश उससे व्यक्तिगत रूप से नफरत करते थे। अधिकारियों पर यह आरोप भी लगा कि उन्होंने रिकॉर्ड में हेरफेर कर उसकी असली उम्र 16 साल से बढ़ाकर 22 साल दर्ज कर दी थी। ईरानी कानूनी व्यवस्था में 22 साल की उम्र फांसी देने के लिए पर्याप्त मानी जाती थी। अगर उसकी उम्र 16 साल ही दर्ज रहती, तो सज़ा की प्रकृति पर सवाल उठ सकते थे।

बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री में खुलासा

इस कहानी को बीबीसी की “वाइल्ड पिक्चर्स” डॉक्यूमेंट्री में दिखाया गया। यह डॉक्यूमेंट्री गुप्त रूप से किए गए जांच-इंटरव्यू पर आधारित थी। ईरानी अधिकारी इस तरह की बाहरी जांच का स्वागत नहीं करते, इसलिए कई दृश्यों को दोबारा फिल्माया गया। इसके बावजूद इस डॉक्यूमेंट्री ने इस केस को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया।

क्या यह अकेला मामला था?

अतेफेह का मामला अकेला नहीं माना जाता। ईरान नागरिकों को फांसी देने के मामलों में चीन के बाद दूसरे स्थान पर रहा है। वहां मृत्युदंड सिर्फ गंभीर हिंसक अपराधों के लिए ही नहीं, बल्कि राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों और “पवित्रता के विरुद्ध” अपराधों के लिए भी दिया जाता है। इस मामले के बाहर आते ही अली खामेनेई की साख पर बट्टा लग गया। लेकिन उन्हें इस से कोई फर्क नहीं पड़ा, क्योंकि इस मामले के बाद भी वहां ऐसी कार्यवाहियां होती रहीं।

इस खबर पर आपकी क्या राय क्या है, हमें कमेंट में बताएं।



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