Homeटेक्नोलॉजीमेडिकल डिवाइस से गंभीर नुकसान के मामले 3 गुना बढ़े: 2020...

मेडिकल डिवाइस से गंभीर नुकसान के मामले 3 गुना बढ़े: 2020 में 808 थे, 2025 में 2 हजार से ज्यादा; RTI से पहली बार जानकारी मिली


नई दिल्ली2 घंटे पहले

  • कॉपी लिंक

देश में मेडिकल डिवाइस के इस्तेमाल से मरीजों को होने वाले गंभीर नुकसान के मामलों में पिछले छह साल में करीब तीन गुना बढ़ोतरी हुई है।

इंडियन फार्माकोपिया कमीशन के आंकड़ों के मुताबिक, 2020 में ऐसे 808 मामले दर्ज हुए थे, जो 2025 में बढ़कर 2,176 हो गए। 2020 से अब तक कुल 9,373 गंभीर मामले सामने आए हैं।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, ये आंकड़े पहली बार सूचना के अधिकार यानी RTI के जरिए सामने आए हैं। सेंट्रल इन्फॉर्मेशन कमीशन के आदेश के बाद IPC ने यह जानकारी उपलब्ध कराई।

गंभीर मामलों में मरीज की जान को खतरा, लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहने या दूसरी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं होने जैसी स्थितियां शामिल हैं।

f4cd2cae 9382 4bf1 90b8 6cd8c64e415f 1793938464055

पहले गंभीर मामलों के आंकड़े अलग से सार्वजनिक नहीं किए जाते थे

IPC देशभर के 775 निगरानी केंद्रों से मेडिकल डिवाइस के इस्तेमाल के बाद होने वाली परेशानियों की जानकारी जुटाता है। इन्हें मेडिकल डिवाइस एडवर्स इवेंट यानी MDAE कहा जाता है।

IPC अपनी सालाना रिपोर्ट में ऐसी सभी घटनाओं की कुल संख्या बताता था, लेकिन सीरियस एडवर्स इवेंट यानी SAE के आंकड़े अलग से जारी नहीं करता था।

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, केंद्रीय सूचना आयोग के 10 सितंबर के आदेश के बाद उसे 27 अक्टूबर को ये आंकड़े मिले। सूचना आयुक्त जया वर्मा सिन्हा ने 11 पन्नों का आदेश जारी कर IPC को गंभीर घटनाओं की जानकारी देने को कहा था।

हालांकि, मेडिकल डिवाइस की श्रेणी और उसे बनाने वाली कंपनी का नाम सार्वजनिक करने की अनुमति नहीं दी गई। IPC ने दलील दी थी कि कंपनी का नाम और डिवाइस की जानकारी सार्वजनिक करने से कारोबारी गोपनीयता प्रभावित हो सकती है। यह भी साफ नहीं है कि मरीज को हुई परेशानी डिवाइस की खराबी से हुई या इलाज के दौरान किसी गलती के कारण।

हर साल हजारों शिकायतें, लेकिन बहुत कम मामले CDSCO भेजे गए

IPC की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक, मेडिकल डिवाइस से जुड़ी घटनाओं की जानकारी मिलने के बाद बहुत कम मामलों को आगे की कार्रवाई के लिए सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (CDSCO) के पास भेजा गया। तीन वित्त वर्षों के आंकड़ों में शिकायतों और जांच के लिए भेजे गए मामलों के बीच बड़ा अंतर दिखाई देता है।

3d23f5d0 1b52 4d6e 91b3 90d0a9791127 1793938081712

संदिग्ध डिवाइसों में रोजमर्रा के मेडिकल सामान भी शामिल

IPC की रिपोर्ट में दर्ज घटनाओं में से जिन मामलों को आगे की जांच के लिए भेजा गया, उनमें कई तरह के मेडिकल उपकरण शामिल थे। इनमें सर्जिकल दस्ताने, सिरिंज, यूरिन बैग, प्रेग्नेंसी टेस्ट किट, कैथेटर और ब्लड प्रेशर मॉनिटर जैसे सामान थे।

इसके अलावा दवा छोड़ने वाले स्टेंट, मैकेनिकल वेंटिलेटर और ब्लड ट्रांसफ्यूजन सेट भी सूची में शामिल थे। खास बात यह है कि 2022-23 की सूची में एक पुरुष कंडोम को भी संदिग्ध मेडिकल डिवाइस के तौर पर दर्ज किया गया था।

2018 में हार्ट स्टेंट से जुड़ी शिकायतें भी सामने आई थीं

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, उसने 2018 में मेडिकल डिवाइस इंडस्ट्री और डॉक्टरों-अस्पतालों के साथ उसके संबंधों पर जांच की थी। इस दौरान मेडिकल डिवाइस से जुड़ी घटनाओं के कुल 566 मामले सामने आए थे।

इनमें से 290 मामले अमेरिकी कंपनी एबॉट के बनाए हार्ट स्टेंट से जुड़े थे। उस समय कंपनी ने कहा था कि उसके स्टेंट दुनिया में सबसे ज्यादा इस्तेमाल और जांचे जाने वाले स्टेंट में शामिल हैं। कंपनी के मुताबिक, इनका सेफ्टी रिकॉर्ड भी बेहतर है।

इसके बाद इंडियन एक्सप्रेस ने 2018 के आंकड़ों की नई जानकारी पाने के लिए कई RTI आवेदन किए, लेकिन जानकारी देने से इनकार कर दिया गया। 2025 में CIC में अंतिम अपील के बाद छह साल के आंकड़े जारी किए गए।

15 दिन के भीतर गंभीर घटनाओं की रिपोर्ट देना जरूरी

मेडिकल डिवाइस के इस्तेमाल से होने वाली परेशानियों पर नजर रखने के लिए 2015 में मैटेरियोविजिलेंस प्रोग्राम ऑफ इंडिया (MvPI) शुरू किया गया था। IPC इसके तहत ADRMS नाम के ऑनलाइन पोर्टल के जरिए ऐसी घटनाओं की जानकारी जुटाता है।

नियमों के मुताबिक, मेडिकल डिवाइस से जुड़ी गंभीर घटना की जानकारी 15 दिन के भीतर IPC को देना जरूरी है। अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार, किसी घटना को गंभीर तब माना जाता है, जब उससे मरीज की मौत हो जाए, उसकी जान को खतरा हो, उसे लंबे समय तक अस्पताल में रहना पड़े या शरीर को स्थायी नुकसान पहुंचे।

अमेरिका में मेडिकल डिवाइस से जुड़ी घटनाओं की जानकारी के लिए MAUDE नाम का सार्वजनिक डेटाबेस है। इसमें डिवाइस से जुड़ी मौतों, चोटों और दूसरी परेशानियों की रिपोर्ट मिलती है। इसमें डिवाइस का ब्रांड, उसे बनाने वाली कंपनी, मॉडल और उससे हुई घटना की जानकारी भी देखी जा सकती है।

——————————

यह खबर भी पढ़ें…

कैंसर का ₹80 हजार का इंजेक्शन ₹7 हजार में मिलेगा:543 दवाओं के दाम घटे; नई कीमतें 9 नवंबर से लागू होंगी

1 1793219544377

देश में कैंसर की 543 दवा ब्रांडों और पैक की कीमतों में बदलाव किया गया है। राष्ट्रीय नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) के फैसले के बाद 397 यानी 73% दवाओं के दाम घटाए गए हैं। इनमें 217 दवाओं की कीमत आधे से भी कम हो गई है। पूरी खबर पढ़ें…

खबरें और भी हैं…



Source link

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -spot_img

Most Popular

Recent Comments