सर्दियों का मौसम घूमने-फिरने के लिए बेहद अच्छा माना जाता है. लेकिन हर बार लंबी छुट्टी लेकर किसी दूर की जगह जाना संभव नहीं होता. अगर आप दिल्ली-एनसीआर में रहते हैं और वीकेंड पर कहीं घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो राजधानी से कुछ ही घंटों की दूरी पर कई शानदार जगहें मौजूद हैं. कहीं आपको अरावली की पहाड़ियों के बीच बने ऐतिहासिक किले में ठहरने का मौका मिलेगा, तो कहीं गंगा किनारे सुबह की आरती और शांत वातावरण का अनुभव कर सकेंगे. प्रकृति और पक्षियों से प्यार करने वालों के लिए भी कुछ बेहतरीन विकल्प हैं. आइए जानते हैं दिल्ली से लगभग 2 से 3 घंटे की दूरी पर मौजूद ऐसी 6 जगहों के बारे में, जहां आप एक दिन या वीकेंड की छोटी ट्रिप प्लान कर सकते हैं.
1. नीमराना फोर्ट, राजस्थान
दिल्ली से दूरी और समय: लगभग 120-125 किलोमीटर, 2 से 2.5 घंटे
अगर आप सर्दियों में शाही अंदाज में छुट्टियां बिताना चाहते हैं, तो नीमराना फोर्ट अच्छा विकल्प है. अरावली की पहाड़ियों के बीच बना यह 15वीं सदी का किला साल 1464 में बनवाया गया था. आज इसे हेरिटेज रिसॉर्ट में बदल दिया गया है. यहां पुराने महल की वास्तुकला, खूबसूरत बालकनी और पहाड़ियों के नजारे देखने को मिलते हैं. आसपास के गांवों और ऐतिहासिक बावड़ियों को भी अपनी ट्रिप में शामिल कर सकते हैं. हालांकि, किले में केवल घूमने के लिए जाने से पहले डे-विजिट की एंट्री और बुकिंग की शर्तें जरूर पता कर लें.
2. मथुरा-वृंदावन, उत्तर प्रदेश
दिल्ली से दूरी और समय: लगभग 180 किलोमीटर, 2.5 से 3 घंटे
सर्दियों में ब्रज की संस्कृति और धार्मिक माहौल का अनुभव करना चाहते हैं, तो मथुरा-वृंदावन जा सकते हैं. सुबह यमुना किनारे विश्राम घाट पर होने वाली गतिविधियां और मंदिरों में आरती का अनुभव यात्रा को खास बना सकता है. वृंदावन में बांके बिहारी मंदिर, प्रेम मंदिर और इस्कॉन मंदिर घूम सकते हैं. वहीं मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि और द्वारकाधीश मंदिर प्रमुख आकर्षण हैं. यहां के पेड़े, कचौड़ी और स्थानीय मिठाइयों का स्वाद लेना न भूलें. सप्ताहांत और त्योहारों के समय मंदिरों में काफी भीड़ रहती है, इसलिए सुबह जल्दी पहुंचना बेहतर रहेगा.
3. हस्तिनापुर, उत्तर प्रदेश
दिल्ली से दूरी और समय: लगभग 110-120 किलोमीटर, 2.5 से 3 घंटे
महाभारत की कहानियों से जुड़ी जगहों को करीब से देखना चाहते हैं, तो हस्तिनापुर घूमने जा सकते हैं. यह स्थान अपने पौराणिक इतिहास और जैन धार्मिक स्थलों के लिए प्रसिद्ध है. यहां जंबूद्वीप जैन मंदिर, कमल मंदिर और सुमेरु पर्वत देखने लायक हैं. इसके अलावा हस्तिनापुर वन्यजीव अभयारण्य प्रकृति प्रेमियों के लिए खास आकर्षण है. गंगा के मैदानी इलाकों, घास के मैदानों और जलाशयों में सर्दियों के दौरान कई प्रवासी पक्षी दिखाई देते हैं. यहां जाने से पहले अभयारण्य के संबंधित हिस्से में प्रवेश और स्थानीय सुविधाओं की जानकारी जरूर लें.
4. गढ़मुक्तेश्वर-बृजघाट, उत्तर प्रदेश
दिल्ली से दूरी और समय: लगभग 100 किलोमीटर, 2 घंटे
अगर आप बिना ज्यादा लंबा सफर किए गंगा किनारे कुछ समय बिताना चाहते हैं, तो बृजघाट जा सकते हैं. यहां सुबह के समय गंगा स्नान करने वाले श्रद्धालुओं की दिनचर्या देखने को मिलती है. शाम को गंगा आरती का दृश्य भी आकर्षक होता है. घाटों के आसपास कई मंदिर हैं, जहां दर्शन किए जा सकते हैं. स्थानीय दुकानों पर चाय, नाश्ता और दूसरे देसी व्यंजनों का स्वाद भी ले सकते हैं. यहां एक दिन की ट्रिप बनाकर सुबह दिल्ली से निकलें और शाम की आरती के बाद वापस लौट सकते हैं. हालांकि, कार्तिक पूर्णिमा और अन्य विशेष अवसरों पर यहां काफी भीड़ रहती है.
5. भिंडावास बर्ड सेंचुरी, हरियाणा
दिल्ली से दूरी और समय: लगभग 80-100 किलोमीटर, 2 से 2.5 घंटे
अगर आपको पक्षियों और फोटोग्राफी का शौक है, तो हरियाणा की भिंडावास बर्ड सेंचुरी जरूर एक्सप्लोर करें. झज्जर जिले में स्थित यह हरियाणा का सबसे बड़ा वेटलैंड है. सर्दियों में यहां कई प्रजातियों के प्रवासी पक्षी आते हैं. जलाशय के आसपास बत्तख, हंस और दूसरे जलपक्षियों को देखने का मौका मिल सकता है. यह जगह खासतौर पर उन लोगों के लिए अच्छी है, जिन्हें शोर-शराबे से दूर प्रकृति के बीच समय बिताना पसंद है. सुबह जल्दी पहुंचें और साथ में दूरबीन या कैमरा रखें. पक्षियों को देखने के लिए शांत रहें और उन्हें परेशान न करें.
6. अलवर और सिलीसेढ़ झील, राजस्थान
दिल्ली से दूरी और समय: लगभग 160-180 किलोमीटर, 3 घंटे या उससे अधिक
अरावली की पहाड़ियों और झील के खूबसूरत नजारों के बीच सर्दियों की छुट्टी बिताना चाहते हैं, तो अलवर का रुख कर सकते हैं. यहां सिलीसेढ़ झील प्रमुख आकर्षण है. झील के किनारे बना ऐतिहासिक पैलेस और आसपास की पहाड़ियां इस जगह को खास बनाती हैं. यहां बोटिंग का विकल्प भी मिलता है. इसके अलावा अलवर में बाला किला और सिटी पैलेस घूम सकते हैं. स्थानीय राजस्थानी खानपान का स्वाद लेना भी इस यात्रा का हिस्सा बन सकता है. अगर आपके पास पूरा दिन है, तो अलवर और सिलीसेढ़ झील को मिलाकर एक अच्छी ट्रिप बनाई जा सकती है.