केरल में एक डॉक्टर से जुड़े यौन उत्पीड़न और मारपीट के मामले में जांच के दौरान चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है. रेप केस में आरोपी डॉक्टर जॉनसन वर्गीज के दो मोबाइल फोन की जांच में पुलिस को कई महिलाओं के अंतरंग पलों के वीडियो और तस्वीरें मिली हैं. पुलिस को आशंका है कि डॉक्टर ने एक से ज्यादा महिलाओं का यौन शोषण किया हो सकता है. फिलहाल वह रेप का मामला दर्ज होने के बाद से फरार है.
पुलिस के मुताबिक, डॉक्टर के मोबाइल से मिले डिजिटल सबूतों के आधार पर आगे की जांच की जा रही है. अधिकारियों ने कहा है कि तस्वीरों और वीडियो में दिखने वाली महिलाएं अगर शिकायत लेकर सामने आती हैं, तो उनके आधार पर अलग-अलग मामले दर्ज किए जा सकते हैं.
पुलिस ने बताया कि इंफोपार्क थाने में दर्ज मौजूदा रेप केस एक महिला की शिकायत पर आधारित है. शिकायतकर्ता मलयालम अभिनेत्री अतुल्या चंद्रन की रिश्तेदार बताई जा रही है. महिला ने आरोप लगाया है कि डॉक्टर ने उसका यौन उत्पीड़न किया और इस घटना को अपने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड भी किया.
पुलिस के अनुसार, महिला ने यह भी आरोप लगाया कि अभिनेत्री अतुल्या चंद्रन और बिबिन पेरुमपल्ली ने डॉक्टर को एक अपार्टमेंट में बुलाया था, ताकि उसके मोबाइल फोन से वह वीडियो डिलीट कराए जा सकें.
इससे पहले डॉक्टर जॉनसन वर्गीज की शिकायत पर पुलिस ने गुरुवार को अभिनेत्री अतुल्या चंद्रन, बिबिन पेरुमपल्ली और उनके दोस्त विष्णु को गिरफ्तार किया था.
डॉक्टर ने अपनी शिकायत में बताया था कि 2 नवंबर को उसे कोच्चि के वायटिला स्थित एसेन स्प्रिंगडेल अपार्टमेंट्स के एक फ्लैट में बुलाया गया था. उसे बताया गया था कि आरोपियों में से एक की मौसी की तबीयत खराब है और उन्हें डॉक्टर की जरूरत है.
डॉक्टर के मुताबिक, फ्लैट पर पहुंचने के बाद उसने वहां दोनों अभिनेत्रियों समेत करीब 12 लोगों को मौजूद पाया. आरोप है कि वहां उसके साथ मारपीट की गई और दो मोबाइल फोन, स्मार्टवॉच तथा ईयरफोन छीन लिए गए. इन सामानों की कुल कीमत करीब 3.25 लाख रुपये बताई गई है.
41 वर्षीय डॉक्टर ने आरोप लगाया था कि वहां मौजूद लोगों ने उस पर एक महिला को नशीला पदार्थ देकर रेप करने का आरोप लगाया और कई बार उसकी पिटाई की. पुलिस ने इसी शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी.
इस मामले में शनिवार को एर्नाकुलम की ज्यूडिशियल फर्स्ट क्लास मजिस्ट्रेट कोर्ट ने गिरफ्तार तीनों आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी. सरकारी वकील ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि जांच शुरुआती दौर में है और आरोपियों से हिरासत में पूछताछ की जरूरत है.
अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि इस मामले में आठ अन्य लोगों को भी हिरासत में लिया गया है और कुछ अहम सबूत जुटाए जाने बाकी हैं. सरकारी वकील ने दलील दी कि आरोपियों को जमानत मिलने से जांच प्रभावित हो सकती है.
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