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मोहन भागवत बोले- हर समस्या की जड़ अपनापन न होना: जब तक मैं और मेरा नहीं जाएगा, दुनिया में शांति नहीं आएगी




राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने शनिवार को कहा कि दुनिया की सारी समस्याएं दूसरों के प्रति अपनापन की भावना की कमी से पैदा होती हैं। उन्होंने कहा कि ये भाव विकसित करने की जरूरत है कि सब हमारे अपने हैं।भागवत नागपुर में सामाजिक सेवा संगठन समर्पण फाउंडेशन के रजत जयंती समारोह में एक सभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अपनापन की भावना पूरी दुनिया को जोड़ती है, उसकी समस्याओं को पहचानने में मदद करती है और उनका समाधान भी देती है। दुनिया की सारी समस्याएं इसी आत्मीयता की कमी से पैदा होती हैं। RSS चीफ ने अमेरिका का किस्सा सुनाया मोहन भागवत ने अमेरिका में हाल में हुई अपनी एक कॉन्फ्रेंस यात्रा का जिक्र किया। उन्होंने नाइजीरिया के एक वक्ता की बात साझा की। उस वक्ता ने कहा था, “जब तक ‘मैं और मेरा’ खत्म नहीं होगा, तब तक दुनिया में शांति नहीं आएगी।” भागवत ने इसी बात को आगे बढ़ाते हुए अपनापन और भाईचारे की भावना को जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि सभी समस्याएं ‘मैं’ और ‘मेरा’ की सोच से जुड़ी होती हैं। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति हमारा अपना है। हमें दूसरों के अच्छे जीवन की भी उसी तरह कामना करनी चाहिए, जैसे हम अपने लिए करते हैं। यह एक खास सोच और स्वभाव है। सेवा दिखावे के लिए नहीं RSS प्रमुख ने कहा कि इंसान स्वभाव से दयालु होता है। इसी वजह से उसने सेवा की भावना को अपनाया है। सेवा दिखावे के लिए नहीं करनी चाहिए। यह चुपचाप और लगातार जारी रहनी चाहिए। कोविड-19 महामारी को याद करते हुए भागवत ने बताया कि उन्होंने नागपुर में RSS कार्यकर्ताओं से सेवा गतिविधियों की जानकारी मांगी थी। तब उन्हें पता चला कि दो महीने में ऐसी 40 गतिविधियां की गई थीं। इंसान और जानवर में संवेदनशीलता का अंतर भागवत ने कहा कि इंसान और जानवर के बीच एकमात्र अंतर संवेदनशीलता और करुणा का है। संवेदनशील होने के कारण इंसान दूसरों की चिंता करता है। इंसान केवल अपनी जिंदगी के बारे में नहीं सोचता, बल्कि दूसरों के जीवन का भी ध्यान रखता है।



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