बेंगलुरु43 मिनट पहले
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कर्नाटक हाई कोर्ट ने शनिवार को कहा कि ईडी कोई ‘सुपर कॉप’ नहीं है, जो उसके संज्ञान में आने वाली हर चीज की जांच शुरू कर दे। एजेंसी को कानून के दायरे में रहकर ही काम करना होगा।
कोर्ट ने यह टिप्पणी कांग्रेस नेता केवाई नंजे गौड़ा से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की और ईडी की कार्रवाई रद्द कर दी। ईडी भूमि आवंटन घोटाले में गौड़ा की जांच कर रही थी।
उसने संबंधित लोगों को समन जारी किए और मूल भूमि घोटाले का केस खारिज होने के बाद भी कार्रवाई जारी रखी। ऐसे में उसकी कार्रवाई को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई थी।
जस्टिस एमआई अरुण ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना राज्य की जिम्मेदारी है, केंद्र की नहीं।
पूरा मामला 4 पॉइंट में समझिए…
1. शुरुआत 150 करोड़ रुपए के कथित जमीन घोटाले से हुई
केवाई नंजे गौड़ा मालूर की लैंड ग्रांट कमेटी के अध्यक्ष थे। आरोप था कि उनके और कमेटी के अन्य सदस्यों ने पद का दुरुपयोग कर 38 लोगों को करीब 80 एकड़ सरकारी जमीन अवैध तरीके से आवंटित की। ईडी ने इसी मामले में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की थी।
ईडी ने जनवरी 2024 में 14 ठिकानों पर छापे मारे थे। एजेंसी के मुताबिक, इस दौरान 25 लाख रुपए से ज्यादा नकद और 50 करोड़ रुपए से अधिक की चल-अचल संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज जब्त किए गए थे।
2. फिर KOMUL भर्ती घोटाले की जांच सामने आई
जमीन मामले की जांच के दौरान ईडी को कोलार-चिक्कबल्लापुर मिल्क यूनियन (KOMUL) में 2023 की भर्ती में कथित गड़बड़ी से जुड़ी जानकारी मिली। ईडी का आरोप था कि भर्ती प्रक्रिया में लिखित परीक्षा और इंटरव्यू को पैसे या राजनीतिक सिफारिश के आधार पर प्रभावित किया गया।
ईडी ने इस मामले में भी कार्रवाई की और जुलाई 2025 में नंजे गौड़ा व अन्य लोगों की करीब 1.32 करोड़ रुपए की संपत्तियां अस्थायी रूप से अटैच कीं।
3. जमीन घोटाले का मूल मामला बंद हो गया
जमीन आवंटन से जुड़े मामले में संबंधित पुलिस ने क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की। ट्रायल कोर्ट ने भी आवश्यक सरकारी मंजूरी नहीं होने के कारण सरकारी पद पर रहे आरोपी के खिलाफ मुकदमा आगे बढ़ाने की प्रक्रिया को खारिज कर दिया।
इसके बाद सवाल उठा कि जब मूल जमीन घोटाले का मामला ही आगे नहीं बढ़ रहा, तो उसी के आधार पर ईडी मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कैसे जारी रख सकती है?
4. ईडी ने अपनी शिकायत दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई
ईडी ने भर्ती से जुड़े आरोपों की जांच के लिए विशेष अदालत में निजी शिकायत भी दाखिल की। एजेंसी का तर्क था कि मूल मामला तकनीकी कारणों से बंद हुआ है, इसलिए इससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जांच जारी रह सकती है।
दूसरी ओर, आरोपियों ने हाई कोर्ट में दलील दी कि ईडी को खुद नया मूल अपराध बनाकर जांच शुरू करने का अधिकार नहीं है।
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