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Khamenei Family Tree: ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की इजरायली-अमेरिकी हमले में 28 फरवरी 2026 को मौत हो चुकी है। इस हमले में खामेनेई के बेटी-दामाद,बहू-पोती समेत कुछ सदस्य भी मारे गए हैं। हालांकि किन-किन की मौत हुई, इसे लेकर आधिकारिक तस्वीर अभी पूरी तरह साफ नहीं है। अब 2 मार्च सोमवार को ईरान की सरकारी मीडिया ने खबर दी है कि खामेनेई की पत्नी मंसूरेह खोजस्ते बाघेरजादेह की भी मौत हो गई है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि अब खामेनेई के परिवार में कौन-कौन बचा है और उनकी विरासत किसके हाथ में है।
खामेनेई की मौत बाद परिवार की स्थिति (Khamenei Family After Death)
रिपोर्ट्स के मुताबिक हमले में खामेनेई की एक बेटी, दामाद, बहू और पोती के मारे जाने की खबर है, लेकिन नामों की पुष्टि नहीं हुई है। उनकी मौत के बाद उनके दूसरे सबसे बड़े बेटे मोजतबा हुसैनी खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर बनाए जाने की बात सामने आई है। हालांकि यह भी बताया गया कि हमले में मोजतबा की पत्नी जहरा हद्दा अदील की भी जान चली गई। इससे परिवार को व्यक्तिगत और राजनीतिक दोनों स्तर पर बड़ा झटका लगा है।

अयातुल्लाह अली खामेनेई के कितने बच्चे और कौन हैं ये? (Ayatollah Ali Khamenei Children)
- अयातुल्लाह अली खामेनेई और उनकी पत्नी मंसूरा खोजस्तेह बाघेरजादेह के छह बच्चे बताए जाते हैं। चार बेटे-मोस्तफा, मोजतबा, मसूद और मेयसाम। दो बेटियां-बोशरा और होदा।
- खामेनेई का सबसे बड़े बेटे मोस्तफा एक धर्मगुरु हैं। उन्होंने ईरानी दार्शनिक अजीजुल्लाह खोशवक्त की बेटी से शादी की और ईरान-इराक युद्ध में भी हिस्सा लिया। मसूद ने ईरानी नेता मोहसिन खराजी की बेटी से विवाह किया, लेकिन वे किसी सरकारी पद पर नहीं हैं।
- मोजतबा का नाम समय-समय पर राजनीतिक चर्चाओं में आता रहा है। वहीं मेयसाम के बारे में सार्वजनिक जानकारी सीमित है। बेटियों में बोशरा और होदा की शादी प्रभावशाली धार्मिक परिवारों में हुई है।
- खामेनेई की बेटी बोशरा की शादी मिस्बाह अल-होदा बाघेरी कानी से हुई है। वहीं दूसरी बेटी होदा की शादी मोहम्मद मोहम्मदी गोलपायगानी से हुई है। इजरायली-अमेरिकी हमले में खामेनेई के किस दामाद की मौत हुई है, फिलहाल इसकी जानकारी सामने नहीं आई है।
खामेनेई की पत्नी मंसूरा खोजस्तेह बाघेरजादेह कौन थीं? (Who is Ayatollah Ali Khamenei wife Mansoureh Khojasteh Bagherzadeh)
खामेनेई की पत्नी मंसूरा खोजस्तेह बाघेरजादेह ( Mansoureh Khojasteh Bagherzadeh) लंबे समय से सार्वजनिक जीवन से दूर रहीं। उन्होंने 1964 में खामेनेई से शादी की थी। मशहद के एक धार्मिक और कारोबारी परिवार में जन्मीं मंसूरा बेहद लो प्रोफाइल रहीं। उनके पिता मोहम्मद इस्माइल खोजस्तेह बाघेरजादेह मशहद के जाने-माने व्यापारी थे।
मंसूरा के भाई हसन, ईरान के सरकारी प्रसारण नेटवर्क इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग से जुड़े रहे। बावजूद इसके, मंसूरा ने कभी राजनीतिक मंच साझा नहीं किया और उन्हें अक्सर ईरानी नेतृत्व की “इनविजिबल वुमन” कहा गया।
खामेनेई के पोते-पोतियां और विदेश कनेक्शन (Grandchildren & Extended Family)
खामेनेई के परिवार में कई नाती-पोते हैं, लेकिन सार्वजनिक रूप से सिर्फ एक नाम सामने आया है-मोहम्मद बाघेर खामेनेई। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक परिवार के कुछ सदस्य विदेशों, खासकर पेरिस में भी रहते हैं।
ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई फैमिली ट्री टेबल
| संबंध | नाम | विवरण |
|---|---|---|
| पिता | सैयद जावद खामेनेई | इराक में जन्मे इस्लामी विद्वान (आलिम) और मुजतहिद, अज़रबैजानी तुर्क मूल |
| माता | खदीजे मिर्दामादी | हाशेम मिर्दामादी की बेटी, फारसी मूल, यज्द से संबंध |
दूसरी पीढ़ी (Ali Khamenei & Siblings)
| संबंध | नाम | विवरण |
|---|---|---|
| स्वयं | अयातुल्लाह अली खामेनेई | जन्म 19 अप्रैल 1939, मशहद |
| भाई | Hadi Khamenei | मौलवी और अखबार संपादक |
| भाई | मोहम्मद खामेनेई | धर्मगुरु |
| बहन | फातेमेह होसैनी खामेनेई | निधन 2015 |
| अन्य | कुल 8 भाई-बहन | अली खामेनेई दूसरे नंबर पर थे |
तीसरी पीढ़ी (Wife & Children)
| संबंध | नाम | विवरण |
|---|---|---|
| पत्नी | मंसूरा खोजस्तेह बाघेरजादेह | विवाह 1964, लो-प्रोफाइल सार्वजनिक जीवन |
| बेटा | मोस्तफा खामेनेई | धर्मगुरु, ईरान-इराक युद्ध में हिस्सा लिया |
| बेटा | मोजतबा हुसैनी खामेनेई | रिपोर्ट्स अनुसार नया सुप्रीम लीडर घोषित |
| बहू | जहरा हद्दा अदील | हमले में मौत की खबर |
| बेटा | मसूद खामेनेई | किसी सरकारी पद पर नहीं |
| बेटा | मेयसाम खामेनेई | सीमित सार्वजनिक जानकारी |
| बेटी | बोशरा खामेनेई | विवाह: मिस्बाह अल-होदा बाघेरी कानी |
| बेटी | होदा खामेनेई | विवाह: मोहम्मद मोहम्मदी गोलपायगानी |
चौथी पीढ़ी (Grandchildren)
| संबंध | नाम | विवरण |
|---|---|---|
| पोता | मोहम्मद बाघेर खामेनेई | सार्वजनिक रूप से सामने आया एकमात्र नाम |
| अन्य | कई नाती-पोते | कुछ विदेश (संभवत: पेरिस) में रहते बताए जाते हैं |
वंश परंपरा (Ancestral Line)
| पूर्वज | विवरण |
|---|---|
| सैय्यद हुसैन तफरेशी | अफ्तासी सैय्यद वंश |
| वंश संबंध | चौथे शिया इमाम अली अल-सज्जाद के वंशज सुल्तान-उल-उलमा अहमद तक परंपरा जोड़ी जाती है |

खामेनेई के माता-पिता कौन थे और कितने भाई-बहन थे (Khamenei Brothers & Sisters)
- खामेनेई का जन्म 19 अप्रैल 1939 को मशहद में हुआ था। उनके पिता का नाम सैयद जावद खामेनेई (Javad Khamenei) थाजो एक इराक में जन्मे इस्लामी विद्वान (alim) और मुजतहिद थे। उनकी माता खदीजे मिर्दामादी (Khadijeh Mirdamadi) थीं, जो हाशेम मिर्दामादी की बेटी थीं।
- खामेनेई आठ भाई-बहनों में दूसरे नंबर पर थे। उनके दो भाई भी धर्मगुरु बने। उनके छोटे भाई Hadi Khamenei एक अखबार संपादक और मौलवी हैं। उनकी बड़ी बहन फातेमेह होसैनी खामेनेई का निधन 2015 में 89 वर्ष की उम्र में हुआ।
- उनके पिता नस्लीय रूप से अजरबैजानी तुर्क थे और खामानेह क्षेत्र से ताल्लुक रखते थे, जबकि उनकी मां यज्द की मूल निवासी फारसी पृष्ठभूमि से थीं। उनके कुछ पूर्वज वर्तमान मरकजी प्रांत के तफरेश इलाके से खामानेह (तबरीज के पास) आकर बसे थे।
- उनके पूर्वज सैय्यद हुसैन तफरेशी बताए जाते हैं, जिन्हें अफ्तासी सैय्यद वंश का माना जाता है। वंश परंपरा को चौथे शिया इमाम अली अल-सज्जाद के वंशज सुल्तान-उल-उलमा अहमद तक जोड़ा जाता है।
- खामेनेई की शिक्षा चार साल की उम्र में मकतब में कुरान पढ़ने से शुरू हुई। बाद में उन्होंने मशहद की हौजा (इस्लामी धार्मिक शिक्षण संस्थान) में बुनियादी और उच्च स्तर की पढ़ाई की। उनके प्रमुख शिक्षकों में शेख हाशेम क़ज़विनी और आयतुल्लाह मिलानी शामिल थे।
- मशहद में पढ़ाई के दौरान वे कुछ धर्मनिरपेक्ष बुद्धिजीवियों और “गॉड-वर्शिपिंग सोशलिस्ट मूवमेंट” नामक संगठन के संपर्क में भी रहे। यह संगठन इस्लामी समाजवाद की वकालत करता था और कार्ल मार्क्स, चे ग्वेरा, टीटो और अली शरियती जैसे विचारकों से प्रभावित था। इन बैठकों और भाषणों ने उनके राजनीतिक नजरिए को प्रभावित किया।
- 1957 में वे नजफ गए, लेकिन पिता की इच्छा के कारण जल्द ही वापस मशहद लौट आए। 1958 में वे कोम में बस गए, जहां उन्होंने सैय्यद हुसैन बोरुजेर्दी और Ruhollah Khomeini की कक्षाओं में शिक्षा ली। उस दौर के कई अन्य सक्रिय मौलवियों की तरह खामेनेई भी धार्मिक अध्ययन की तुलना में राजनीति में ज्यादा सक्रिय रहे।
- खामेनेई का परिवार हमेशा लो प्रोफाइल रहा। दुनिया के कई बड़े राजनीतिक परिवारों के उलट, उनके बच्चों और पत्नी ने कभी खुलकर सार्वजनिक भूमिका नहीं निभाई। अब उनकी मौत के बाद सत्ता और परिवार दोनों की कमान किस तरह संभाली जाएगी, यह आने वाला समय बताएगा। लेकिन इतना तय है कि खामेनेई का परिवार ईरान की राजनीति में एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ चुका है।

अब जानिए अयातुल्ला अली खामेनेई के बारे में ( Ayatollah Ali Khamenei Profile In Hindi)
- 19 अप्रैल 1939 को ईरान के धार्मिक शहर मशहद में एक मौलवी परिवार में जन्में अयातुल्ला अली खामेनेई एक धार्मिक नेता और राजनेता थे। 1989 में वे ईरान के दूसरे सुप्रीम लीडर बने थे। अली खामेनेई 1981 से 1989 तक ईरान के राष्ट्रपति रहे, उन्होंने कुल 36 साल तक देश का नेतृत्व किया। वे फरवरी 2026 में मौत के पहले तक मिडिल ईस्ट के सबसे लंबे समय तक पद पर रहने वाले राष्ट्र प्रमुख थे। वे शाह मोहम्मद रजा पहलवी (Mohammad Reza Pahlavi) के बाद ईरान के सबसे लंबे समय तक शासन करने वाले नेता भी थे।
- अयातुल्ला अली खामेनेई ने अपनी आत्मकथा ‘सेल नम्बर 14’ में लिखा है कि स्कूल के दिनों में वे पढ़ाई में तेज थे, खासकर गणित और अंग्रेजी में। एक कार्यक्रम में कुरान की आयतें सुनाने पर उनकी खूब सराहना हुई और तभी उन्होंने पिता की राह पर चलकर मौलवी बनने का फैसला किया। आगे की धार्मिक शिक्षा के लिए वे कोम गए, जहां उन्होंने Ruhollah Khomeini से तालीम हासिल की। कम उम्र में ही वे धर्मगुरु के रूप में पहचान बनाने लगे।
- उनका युवाकाल उस दौर में बीता जब ईरान में मोहम्मद रजा पहलवीका शासन था। शाह पश्चिमी संस्कृति और पंथनिरपेक्ष नीतियों को बढ़ावा देते थे, जिससे धार्मिक तबके में असंतोष था।
- 1963 में शाह विरोधी भाषण देने पर उन्हें गिरफ्तार किया गया। इसके बाद वे धीरे-धीरे सरकार विरोधी आंदोलन का अहम चेहरा बन गए और खोमैनी के करीबी सहयोगी माने जाने लगे।
- 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद शाह की सत्ता समाप्त हुई और खोमैनी के नेतृत्व में नई व्यवस्था बनी। खामेनेई को क्रांतिकारी परिषद में शामिल किया गया और बाद में उप रक्षा मंत्री की जिम्मेदारी मिली।
- 1981 में तेहरान की एक मस्जिद में भाषण के दौरान उन पर बम हमला हुआ, जिसमें वे गंभीर रूप से घायल हुए। उसी साल हुए चुनाव में वे ईरान के तीसरे राष्ट्रपति बने और 1989 तक इस पद पर रहे।
- 1989 में खोमैनी के निधन के बाद उन्हें देश का सर्वोच्च नेता यानी ‘रहबर’ चुना गया। इसके लिए संविधान में संशोधन भी किया गया। उन्होंने करीब 36 वर्षों तक देश की कमान संभाली। अपने समर्थकों के लिए वे इस्लामी व्यवस्था के संरक्षक रहे, जबकि आलोचक उन्हें सख्त और कट्टर शासन का प्रतीक मानते रहे।
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