Homeउत्तराखंडIsrael Iran War में अब तक कितना पैसा बहा चुका America? Trump...

Israel Iran War में अब तक कितना पैसा बहा चुका America? Trump को आगे क्या भाव पड़ेगी जंग? देखें हिसाब


International

oi-Siddharth Purohit

Israel Iran War: ईरान और पूरे मिडिल ईस्ट में अमेरिका और इज़रायल के हमले जैसे-जैसे तेज हो रहे हैं, वैसे-वैसे ध्यान सिर्फ जंग के मैदान पर नहीं, बल्कि अमेरिका के खर्च पर भी जा रहा है। अमेरिकी सेना ने एयरक्राफ्ट करियर, एडवांस फाइटर जेट और मिसाइल डिफेंस सिस्टम तैनात किए हैं। इसके साथ ही हर घंटे खर्च बढ़ता जा रहा है। जिसका दबाव वॉशिंगटन की सालाना वित्तीय बैलेंस शीट पर साफ दिख रहा है।

पहले फेज में ही फूंके सैकड़ों मिलियन डॉलर

ईरान और मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैन्य अभियानों पर भारी पैसा खर्च हो रहा है। शुरुआती आकलन बताते हैं कि सिर्फ ऑपरेशन के शुरुआती चरण में ही सैकड़ों मिलियन डॉलर खर्च हो चुके हैं। नेवल शिप, फाइटर जेट और मिसाइल डिफेंस सिस्टम की लगातार तैनाती से यह खर्च लगातार बढ़ रहा है।

israel-iran-war

पिछली झड़पों, खासकर अफगानिस्तान युद्ध, से यह साफ है कि लंबे समय में खर्च और भी ज्यादा बढ़ सकता है। इसमें पूर्व सैनिकों की देखभाल जैसी दीर्घकालिक जिम्मेदारियां भी शामिल होती हैं। आखिरकार, ऑपरेशन कितने समय तक चलता है, यही तय करेगा कि कुल आर्थिक बोझ कितना होगा।

“चार से पांच सप्ताह” या उससे ज्यादा?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि यह अभियान “चार से पांच सप्ताह” तक चल सकता है। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका जरूरत पड़ने पर इससे कहीं अधिक समय तक जाने के लिए तैयार है। ऑपरेशन की अनिश्चितता के कारण इसकी अंतिम लागत का सटीक अनुमान लगाना मुश्किल है। फिर भी शुरुआती आकलन बताते हैं कि सिर्फ शुरुआती चरण में ही करोड़ों डॉलर खर्च हो चुके हैं।

पहले 24 घंटे में 779 मिलियन डॉलर स्वाहा

तुर्की की अनादोलु समाचार एजेंसी के अनुसार, ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के पहले 24 घंटों के भीतर अमेरिका ने लगभग 779 मिलियन डॉलर (करीब 7100 करोड़ भारतीय रुपए) खर्च किए हो सकते हैं। इसमें हवाई हमलों और मिसाइल हमलों की पहली लहर के साथ-साथ सहायक सैन्य कार्रवाइयां भी शामिल थीं।

हमलों से पहले ही 630 मिलियन डॉलर का जमावड़ा

अल जज़ीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, हमले शुरू होने से पहले सैन्य तैयारियों में ही करीब 630 मिलियन डॉलर (करीब 5800 करोड़ भारतीय रुपए) खर्च हो गए थे। इसमें विमानों की नई तैनाती, एक दर्जन से ज्यादा नौसैनिक जहाजों की तैनाती और अमेरिकी सेंट्रल कमांड के तहत क्षेत्रीय सैन्य संसाधनों को सक्रिय करना शामिल था।

Israel Iran War

फाइटर जेट उड़ानें ही 271.34 मिलियन डॉलर

शुरुआती हमलों में F-18, F-16, F-22 और F-35 जैसे एडवांस फाइटर जेट शामिल थे। अमेरिकी रक्षा विभाग के 2025 और 2026 के बजट अनुरोधों के आधार पर उड़ान घंटे, रखरखाव और हथियारों की लागत मिलाकर इन उड़ानों पर लगभग 271.34 मिलियन डॉलर (करीब ढाई हजार करोड़ भारतीय रुपए) खर्च होने का अनुमान है।

इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और ड्रोन भी मैदान में

सिर्फ फाइटर जेट ही नहीं, बल्कि EA-18G ग्रोवर इलेक्ट्रॉनिक फाइटर जेट, A-10C थंडरबोल्ट अटैक एयरक्राफ्ट और MQ-9 रीपर ड्रोन भी तैनात किए गए हैं। इसके अलावा कम लागत वाली अनमैन्ड कॉम्बैट अटैक सिस्टम (Low-cost Unmanned Combat Attack System) भी शामिल है। हर नई क्षमता जुड़ने के साथ ऑपरेशन का खर्च और बढ़ता जा रहा है।

एक एयरक्राफ्ट करियर कितने रुपए करता है खर्च?

भले ही जमीनी आक्रमण बड़े पैमाने पर न हो, लेकिन समुद्र में मजबूत उपस्थिति बनाए रखना बेहद महंगा है। सेंटर फॉर न्यू अमेरिकन सिक्योरिटी के मुताबिक, USS गेराल्ड आर फोर्ड जैसे एक कैरियर स्ट्राइक ग्रुप को चलाने में रोज लगभग 6.5 मिलियन डॉलर (करीब 60 करोड़ भारतीय रुपए) खर्च होते हैं। अगर कई कैरियर समूह हफ्तों तक खाड़ी में तैनात रहते हैं, तो यह रकम तेजी से सैकड़ों मिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है।

मिसाइल डिफेंस और निगरानी की लगातार लागत

इन खर्चों में मिसाइल डिफेंस सिस्टम, सर्विलांस मिशन, ड्रोन अभियान और खुफिया गतिविधियां भी शामिल हैं। ये खर्च तब भी जारी रहते हैं जब कोई बड़ा नया हमला न हो। इससे साफ है कि आधुनिक युद्ध कितनी तेजी से टैक्सपेयर्स के पैसे को खत्म कर सकता है।

7 अक्टूबर 2023 के बाद 31 से 33 बिलियन डॉलर खर्च

ब्राउन यूनिवर्सिटी के ‘कॉस्ट्स ऑफ वॉर’ प्रोजेक्ट के अनुसार, 7 अक्टूबर 2023 को हमास द्वारा इज़रायल पर हमले के बाद अमेरिका ने इज़रायल को 21.7 बिलियन डॉलर (करीब 20 लाख करोड़ भारतीय रुपए) की सैन्य सहायता दी है।इसके अलावा, यमन और व्यापक क्षेत्र में इज़रायली कार्रवाइयों से जुड़े या उनका समर्थन करने वाले अभियानों पर 9.65 बिलियन डॉलर (करीब 8.8 लाख करोड़ भारतीय रुपए) से 12.07 बिलियन डॉलर के बीच खर्च किए गए।

कुल मिलाकर, 7 अक्टूबर के बाद से इन संघर्षों से जुड़े खर्च 31.35 बिलियन डॉलर से 33.77 बिलियन डॉलर (करीब 3.1 लाख करोड़ भारतीय रुपए) तक पहुंच चुके हैं और लगातार बढ़ रहे हैं।

कितनी मौतें कैसा मंजर?

ईरान के रेड क्रिसेंट के मुताबिक, 130 से ज्यादा शहरों में कम से कम 555 से ज्यादा मौतें हुई हैं। इज़रायली अधिकारियों ने 11 मौतों की पुष्टि की है, जबकि लेबनान में अब तक 31 मौतें दर्ज की गई हैं। साथ ही 6 अमेरिकी जवान भी मारे गए हैं। मंजर कुछ ऐसा है कि जो भी उस इलाके में है, वह वहां से भागने की तैयारी कर रहा है। अब, चाहे यह राष्ट्रपति ट्रंप की प्लानिंग के मुताबिकचार से पांच सप्ताह में खत्म हो या उससे आगे बढ़ जाए, पर पैसे और लाशों का मीटर हर पल चल रहा है।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।



Source link

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -spot_img

Most Popular

Recent Comments