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Ayatollah Ali Khamenei Funeral: कब और कहां होगा खामेनेई का सुपुर्द-ए-खाक? कौन से राष्ट्राध्यक्ष होंगे शामिल


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oi-Puja Yadav

Ayatollah Ali Khamenei Funeral: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के बाद पूरी दुनिया की नजरें अब उनके अंतिम संस्कार पर टिकी हैं। 28 फरवरी 2026 को हुए हमले के बाद ईरान में शोक की लहर है।

ईरान के सबसे शक्तिशाली और लंबे समय तक शासन करने वाले सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई अब इस दुनिया में नहीं रहे। उनके निधन के बाद ईरान की सरकार ने देश में 40 दिन के राष्ट्रीय शोक और 7 दिन की सरकारी छुट्टी का ऐलान किया है।

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अब सबकी निगाहें इस ऐतिहासिक अंतिम संस्कार (Funeral) पर हैं, जो न केवल ईरान बल्कि पूरे मध्य पूर्व की राजनीति और धार्मिक भावनाओं के लिहाज से एक बड़ा मोड़ साबित होगा।

Iran Supreme Leader Funeral: मशहद में ही दी जाएगी अंतिम विदाई

ताज़ा रिपोर्ट्स के मुताबिक, खामेनेई को ईरान के दूसरे सबसे बड़े शहर मशहद में दफनाया जाएगा। मशहद का चुनाव बेहद सोच-समझकर और धार्मिक महत्व को देखते हुए किया गया है। अयातुल्ला खामेनेई का जन्म 1939 में मशहद में ही हुआ था। उनके पिता की कब्र भी मशहद की पवित्र इमाम रज़ा दरगाह (Imam Reza Shrine) में स्थित है। इमाम रज़ा की दरगाह शिया समुदाय के लिए दुनिया के सबसे पवित्र स्थलों में से एक है। यहीं पर खामेनेई को सुपुर्द-ए-खाक करने की तैयारी चल रही है।

कैसे होंगे सुपुर्द-ए-खाक?भव्यता नहीं, परंपरा पर ज़ोर

हालांकि खामेनेई का कद एक राष्ट्रप्रमुख से कहीं ऊंचा था, लेकिन उनके अंतिम संस्कार को लेकर विशेष निर्देश दिए गए हैं। शिया समुदाय और सभी मुसलमानों को संदेश दिया गया है कि अंतिम विदाई के सभी कार्य सादगी के साथ संपन्न किए जाएं।

ईरान में सुप्रीम लीडर के अंतिम संस्कार के लिए कोई पहले से तय लिखित प्रोटोकॉल या गाइडलाइन नहीं है। उम्मीद है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह से पारंपरिक इस्लामी तौर-तरीकों और सादगी पर आधारित होगी, जैसा कि अक्सर बड़े धार्मिक नेताओं के मामलों में देखा जाता है।

कौन से राष्ट्राध्यक्ष हो सकते हैं शामिल?

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव को देखते हुए खामेनेई के अंतिम संस्कार में दुनिया भर के कई बड़े नेताओं के शामिल होने की संभावना कम दिखाती है। हालांकि आधिकारिक सूची अभी जारी नहीं हुई है। हो सकता है कि रूस, चीन जैसे देशों के उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल के शामिल हों सकें।

हिजबुल्लाह, हमास और हूतियों जैसे समूहों के प्रमुख नेता भी इस विदाई का हिस्सा बन सकते हैं, क्योंकि खामेनेई को इन समूहों का मुख्य संरक्षक माना जाता था। अंतिम संस्कार की तारीख का खुलासा सुरक्षा कारणों से अभी गुप्त रखा गया है। तेहरान से लेकर मशहद तक सुरक्षा एजेंसियां ‘हाई अलर्ट’ पर हैं। लाखों की संख्या में लोगों के जुटने की संभावना को देखते हुए भीड़ नियंत्रण और हवाई सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए जा रहे हैं।



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