होली की छुट्टियों के बाद सर्राफा बाजार खुलते ही बड़ा उतार-चढ़ाव दिखा है। गुरुवार को राष्ट्रीय राजधानी में सोने और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई। सुरक्षित निवेश माने जाने वाले इन कीमती धातुओं में अचानक आई इस नरमी ने बाजार का ध्यान खींचा है। आइए आसान सवाल-जवाब के जरिए समझते हैं कि इस भारी गिरावट के पीछे क्या कारण हैं और भविष्य का आउटलुक कैसा रहने वाला है।
गुरुवार को सोने और चांदी की कीमतों में कितनी बड़ी गिरावट आई है?
नई दिल्ली के सर्राफा बाजार में गुरुवार को सोने की कीमत में 7,600 रुपये प्रति 10 ग्राम की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। इस गिरावट के बाद 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने का भाव 1,65,200 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया है, जो पिछले कारोबारी सत्र में 1,72,800 रुपये पर था। वहीं, चांदी की कीमतों में और भी बड़ा झटका लगा है; यह 27,700 रुपये या 9.23 प्रतिशत टूटकर 2,72,300 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी करों सहित) पर आ गई है। गौरतलब है कि मंगलवार और बुधवार को होली के कारण सर्राफा बाजार बंद थे।
घरेलू बाजार में कीमतों के इतनी तेजी से टूटने की मुख्य वजह क्या है?
ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन और बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इस भारी गिरावट का सबसे बड़ा कारण हालिया तेजी के बाद निवेशकों द्वारा की गई तीव्र मुनाफावसूली है। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ विश्लेषक (कमोडिटीज) सौमिल गांधी के मुताबिक, कमजोर वैश्विक संकेतों और भारतीय रुपये की मजबूती के कारण भी घरेलू सर्राफा बाजार पर दबाव पड़ा है और सोने की कीमतों में गिरावट आई है।
भू-राजनीतिक तनावों का मौजूदा बाजार पर क्या असर दिख रहा है?
भू-राजनीतिक स्थितियां बाजार में भारी उतार-चढ़ाव पैदा कर रही हैं। लेमन मार्केट्स डेस्क के रिसर्च एनालिस्ट गौरव गर्ग के अनुसार, अमेरिका-इजरायल-ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण चांदी में सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ी थी, लेकिन ऊंचे स्तरों पर हुई भारी मुनाफावसूली ने इस मांग के असर को काट दिया। मिराए एसेट शेयरखान के कमोडिटीज और करेंसी प्रमुख प्रवीण सिंह का भी कहना है कि सोना इस समय मजबूत अमेरिकी डेटा और भू-राजनीतिक तनावों के विपरीत प्रभावों के बीच फंसा हुआ है।
क्या वैश्विक बाजार में भी सोने-चांदी के भाव गिरे हैं?
नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थिति थोड़ी अलग है। वैश्विक बाजार में हाजिर चांदी मामूली बढ़त के साथ 84.11 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी। इसी तरह, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना भी 12.60 डॉलर या 0.25 प्रतिशत की बढ़त के साथ 5,153.91 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया।
आगे का बाजार आउटलुक कैसा है और किन आंकड़ों पर नजर रहेगी?
एलकेपी सिक्योरिटीज के वाइस प्रेसिडेंट (रिसर्च एनालिस्ट) जतिन त्रिवेदी के अनुसार, अब निवेशकों का पूरा ध्यान अमेरिका के प्रमुख मैक्रोइकॉनॉमिक डेटा पर केंद्रित होगा। बाजार गुरुवार को आने वाले ‘इनिशियल जॉबलेस क्लेम्स’ (प्रारंभिक बेरोजगारी दावों) और शुक्रवार को जारी होने वाले बेरोजगारी दर व नॉन-फार्म पेरोल के महत्वपूर्ण आंकड़ों का इंतजार कर रहा है। ये आंकड़े अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों पर रुख को आकार देने में अहम भूमिका निभाएंगे और इन्हीं से सोने की कीमतों की अगली दिशा तय होगी।
होली के बाद बाजार खुलते ही सोने और चांदी में दिखी यह बड़ी गिरावट मुख्य रूप से ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली और मजबूत रुपये के कारण है। हालांकि, वैश्विक स्तर पर तनाव बरकरार रहने और महत्वपूर्ण अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों के इंतजार के कारण, आने वाले दिनों में सर्राफा बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की पूरी संभावना है।



