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Assam Election 2026: असम विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। 2026 के विधानसभा चुनावों के लिए गठबंधन के समीकरणों ने एक बेहद दिलचस्प मोड़ ले लिया है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma) ने एनडीए (NDA) के भीतर सीट शेयरिंग का फॉर्मूला तय कर लिया है, लेकिन इस बार ‘बोडोलैंड’ की जंग ने बीजेपी के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने आधिकारिक तौर पर कहा है की बीजेपी ने असम गण परिषद (AGP), बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (BPF) और राभा हसोंग जूथा संग्राम कमेटी के साथ चुनावी तालमेल की बातचीत पूरी कर ली है।

हालांकि, बीजेपी के इस नए समीकरण ने पुराने साथी यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल (UPPL) को नाराज कर दिया है, जिससे अब 21 सीटों पर कड़ा मुकाबला होना तय है। आइए समझते हैं UPPL बोरलैंड का पूरा समिकरण, बीजेपी के लिए इस चुनाव में क्या है चुनौती
Assam Election को लेकर सीएम हिमंत बिस्वा सरमा का बड़ा ऐलान
मुख्यमंत्री सरमा ने गुवाहाटी में पत्रकारों को बताया कि सीटों के बंटवारे की प्रक्रिया अब अपने अंतिम चरण में है और केवल औपचारिक मोहर लगना बाकी है। CM सरमा ने कहा कि हमने असम गण परिषद, बोडोलैंड पीपुल्स फोरम और राभा हसोंग जूथा संग्राम कमेटी के साथ अपनी बातचीत पूरी कर ली है। जहां तक एनडीए की बात है, सीट शेयरिंग पर हमारी बातचीत अब पूरी हो गई है। हमें सेंट्रल पार्लियामेंट्री बोर्ड से मंज़ूरी लेनी होगी। इसलिए, फॉर्मल अनाउंसमेंट में 2-4 दिन लगेंगे।
UPPL Bodoland का गणित- दिसपुर की चाबी है यहां
असम की राजनीति में कहा जाता है कि दिसपुर का रास्ता बोडोलैंड से होकर गुजरता है। पिछले दो दशकों का चुनावी इतिहास गवाह है कि बोडोलैंड टेरिटोरियल काउंसिल (BTC) के इलाके में जो गठबंधन बाजी मारता है, वही राज्य की सत्ता पर काबिज होता है। 2005-2015 तक BPF और कांग्रेस का साथ रहा, राज्य में कांग्रेस की सरकार रही। 2016 को BPF ने बीजेपी से हाथ मिलाया, पहली बार असम में एनडीए सरकार बनी।
2021में बीजेपी ने रणनीति बदलते हुए UPPL के साथ गठबंधन किया और सत्ता बरकरार रखी। लेकिन हाल ही में हुए बोडोलैंड काउंसिल चुनाव में बीजेपी और UPPL गठबंधन को झटका लगा। BPF ने 40 में से 28 सीटें जीतकर जोरदार वापसी की और बीजेपी को बैकफुट पर धकेल दिया।
इसी के बाद बीजेपी ने अपनी रणनीति बदलते हुए BPF के साथ नया गठबंधन कर लिया। बोडोलैंड के महत्व को देखते हुए बीजेपी कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जल्द ही कोकराझार में एक बड़ा कार्यक्रम तय है। माना जा रहा है कि पीएम मोदी बीटीसी मुख्यालय का दौरा कर सकते हैं, जिससे क्षेत्र के विकास और शांति के एजेंडे को धार दी जा सके और नाराज वोटर्स को साधा जा सके।
बीजेपी की नई रणनीति क्यों चुना BPF को?
हाल ही में हुए बोडोलैंड काउंसिल चुनावों के नतीजों ने बीजेपी को अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर कर दिया। बीजेपी और UPPL का गठबंधन इस चुनाव में हार गया, जबकि हांग्रमा मोहिलारी के नेतृत्व वाले BPF ने 40 में से 28 सीटें जीतकर अपनी ताकत दिखाई। इस हार के बाद बीजेपी ने तुरंत पाला बदला और BPF से दोस्ती कर ली। सीएम सरमा ने BPF नेता चरण बोरो को अपनी कैबिनेट में शामिल कर गठबंधन की नींव मजबूत की।
UPPL की बगावत से 21 सीटों पर मचेगा घमासान
बीजेपी के इस फैसले से नाराज UPPL चीफ प्रमोद बोरो ने एनडीए से अलग होकर चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। UPPL ने बोडोलैंड की 15 सीटों के अलावा आसपास की 6 अन्य सीटों (कुल 21) पर एनडीए को चुनौती देने की घोषणा की है। कोकराझार की रैली में प्रमोद बोरो ने BPF को ‘भ्रष्ट और विभाजनकारी’ बताते हुए तीखा हमला बोला।
बीजेपी और BPF की बढ़ती नजदीकियां राज्य सरकार में भी दिखाई दीं। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने BPF नेता चरण बोरो को अपनी कैबिनेट में शामिल किया। हालांकि सरकार में पहले से ही UPPL नेता उरखाओ ग्वारा ब्रह्मा मंत्री के रूप में मौजूद हैं। इस बदलाव को आगामी चुनाव की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
UPPL ने चुनाव में खोला अलग मोर्चा
NDA से अलग होने के बाद UPPL ने भी आक्रामक रुख अपना लिया है। पार्टी प्रमुख प्रमोद बोरो ने हाल ही में कोकराझार में आयोजित एक रैली में BPF पर तीखा हमला बोला। उन्होंने BPF को भ्रष्ट और विभाजनकारी बताते हुए कहा कि उनकी पार्टी बोडोलैंड की राजनीति में साफ-सुथरा विकल्प देने के लिए चुनाव मैदान में उतरेगी। UPPL के मुताबिक, पार्टी बोडोलैंड क्षेत्र की 15 सीटों के अलावा आसपास की 6 अन्य सीटों पर भी उम्मीदवार उतारेगी और बीजेपी-BPF गठबंधन को कड़ी टक्कर देगी।
त्रिकोणीय हुआ असम का मुकाबला
UPPL के अलग होने से बोडोलैंड के पांच जिलों में मुकाबला अब त्रिकोणीय (BJP+BPF बनाम UPPL बनाम कांग्रेस) हो गया है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के लिए सबसे बड़ी चुनौती अपने नए साथी (BPF) के साथ मिलकर पुराने साथी (UPPL) के वोट बैंक में सेंध लगाने की होगी। आने वाले विधानसभा चुनाव में बोडोलैंड का जनादेश ही तय करेगा कि दिसपुर की गद्दी पर कौन बैठेगा।
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