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Israel Iran War के बीच आखिर भारत कैसे पहुंचा ईरान का युद्धपोत? तेहरान के ‘इमरजेंसी कॉल’ पर भारत ने दी मदद


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oi-Pallavi Kumari

IRAN WARSHIP In India: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। ईरान का युद्धपोत IRIS लावन इस समय भारत के कोच्चि बंदरगाह पर खड़ा है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, जहाज में तकनीकी खराबी आने के बाद तेहरान ने भारत से मदद मांगी थी। भारत ने मानवीय और समुद्री नियमों के तहत जहाज को बंदरगाह में प्रवेश की अनुमति दे दी। फिलहाल जहाज के 183 नौसैनिक कोच्चि में भारतीय नौसेना की सुविधाओं में ठहराए गए हैं।

कैसे कोच्चि पहुंचा ईरानी युद्धपोत (IRIS Lavan Docking)

सूत्रों के अनुसार ईरान ने 28 फरवरी को भारत से संपर्क कर बताया कि उसका युद्धपोत IRIS लावन तकनीकी समस्या का सामना कर रहा है और उसे तत्काल डॉकिंग की जरूरत है। इसके बाद भारत ने 1 मार्च को जहाज को कोच्चि बंदरगाह पर रुकने की मंजूरी दे दी। जहाज आखिरकार 4 मार्च को कोच्चि पहुंचा और वहीं खड़ा है।

IRAN WARSHIP In India

अधिकारियों का कहना है कि यह जहाज क्षेत्र में आयोजित इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू (International Fleet Review – IFR 2026) में हिस्सा लेने आया था। इस नौसैनिक कार्यक्रम का आयोजन भारत ने फरवरी में किया था, जिसमें कई देशों की नौसेनाओं ने भाग लिया।

नौसेना अभ्यास से लौटते वक्त आई समस्या (Naval Exercise MILAN 2026)

IRIS लावन ने भारत में आयोजित दो प्रमुख नौसैनिक आयोजनों IFR 2026 और MILAN 2026 में हिस्सा लिया था। ये दोनों कार्यक्रम 15 से 25 फरवरी के बीच आयोजित किए गए थे। इसी क्षेत्र से वापस लौटते समय जहाज में तकनीकी समस्या सामने आई, जिसके बाद ईरान ने भारत से मदद मांगी।

भारतीय अधिकारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री परंपराओं के तहत संकट में फंसे जहाजों को मानवीय आधार पर सहायता दी जाती है। इसी नियम के तहत भारत ने जहाज को बंदरगाह में आने की अनुमति दी।

श्रीलंका के पास डूबा ईरानी युद्धपोत (IRIS Dena Attack)

इस घटनाक्रम से पहले एक और बड़ा हादसा हुआ था। अमेरिका की एक पनडुब्बी ने श्रीलंका के तट के पास ईरानी युद्धपोत IRIS देना पर टॉरपीडो हमला कर उसे डुबो दिया था। इस हमले में 87 ईरानी नौसैनिकों की मौत हो गई थी।

इस घटना ने पहले ही अमेरिका और ईरान के बीच तनाव को और बढ़ा दिया है। हिंद महासागर क्षेत्र के कई देशों में भी इसको लेकर चिंता बढ़ी है, क्योंकि इससे समुद्री व्यापार और सुरक्षा पर असर पड़ सकता है।

श्रीलंका ने भी दी ईरान को शरण (IRIS Booshehr)

इसी बीच श्रीलंका ने भी एक अन्य ईरानी युद्धपोत IRIS Booshehr को अपने बंदरगाह में शरण दी है। जहाज के इंजन में खराबी आने के बाद उसे श्रीलंका के नौसैनिक कैंप में ठहराया गया है, जहां उसके 208 क्रू मेंबर मौजूद हैं।

श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने कहा कि यह एक असामान्य स्थिति है और अंतरराष्ट्रीय समुद्री संधियों के तहत मानवीय जिम्मेदारी निभाना जरूरी है।

भारत के लिए संतुलन की चुनौती (India Foreign Policy Balance)

इस पूरे घटनाक्रम में भारत को बेहद संतुलित कूटनीति अपनानी पड़ रही है। एक तरफ ईरान के साथ भारत के ऐतिहासिक और सभ्यतागत संबंध हैं, वहीं दूसरी ओर अमेरिका भारत का अहम रणनीतिक साझेदार है।

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत इस मामले में व्यावहारिक और संतुलित रुख अपना रहा है। सरकार के लिए यह भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत के करीब 50% तेल आयात होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होकर आते हैं। अगर इस क्षेत्र में संघर्ष बढ़ता है तो इसका असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ सकता है। इस वजह से नई दिल्ली इस पूरे संकट को बेहद सावधानी से संभाल रही है और समुद्री सुरक्षा के साथ-साथ कूटनीतिक संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रही है।



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