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oi-Sumit Jha
Pakistan oil prices: मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) में बढ़ते तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जारी संकट ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को हिला दिया है, जिसका सबसे घातक असर पाकिस्तान पर दिख रहा है। अमेरिकी नीतियों के समर्थन और आंतरिक आर्थिक कुप्रबंधन के बीच फंसा पाकिस्तान अब तेल की आसमान छूती कीमतों की मार झेल रहा है।
कच्चे तेल के आयात बिल में भारी बढ़ोतरी और मुद्रास्फीति ने आम जनता की कमर तोड़ दी है, जिससे शहबाज शरीफ सरकार के सामने एक गहरा वित्तीय संकट खड़ा हो गया है।

Pakistan economic crisis: आयात बिल में भारी उछाल और वित्तीय संकट
मध्य पूर्व की जंग के कारण पाकिस्तान का मासिक तेल आयात बिल 600 मिलियन डॉलर तक बढ़ने की आशंका है। वित्त मंत्री मोहम्मद औरंगजेब ने चेतावनी दी है कि यदि युद्ध लंबा खिंचता है, तो कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती हैं। विदेशी मुद्रा भंडार की कमी से जूझ रहे देश के लिए यह अतिरिक्त बोझ असहनीय होता जा रहा है। सरकार अब इस वित्तीय घाटे को पाटने के लिए वैकल्पिक योजनाओं पर विचार कर रही है, लेकिन फिलहाल कोई ठोस रास्ता नजर नहीं आ रहा।
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Middle East crisis: जनता पर महंगाई का ‘पेट्रोल बम’
पाकिस्तान सरकार ने हाल ही में पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल की कीमतों में 55 रुपये प्रति लीटर की भारी बढ़ोतरी की है, जो लगभग 20 प्रतिशत का इजाफा है। इस फैसले ने पाकिस्तान की आवाम को सड़कों पर ला दिया है। परिवहन लागत बढ़ने से रोजमर्रा की वस्तुओं और खाद्य पदार्थों के दाम भी बेकाबू हो गए हैं। आम नागरिक पहले से ही बिजली और गैस की बढ़ती कीमतों से परेशान थे, अब तेल की इस मार ने उनके घरेलू बजट को पूरी तरह तबाह कर दिया है।
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IMF और कूटनीतिक रास्तों की तलाश
संकट से निकलने के लिए पाकिस्तान ने हमेशा की तरह इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) का दरवाजा खटखटाया है। पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक पेट्रोलियम लेवी में राहत के लिए IMF से गुहार लगाने की तैयारी में हैं। इसके साथ ही, ओमान, सऊदी अरब और यूएई जैसे देशों के साथ कूटनीतिक बातचीत की जा रही है। सरकार का लक्ष्य स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बजाय दूसरे सप्लाई रूट्स को खोजना है ताकि तेल की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके, हालांकि यह प्रक्रिया बेहद जटिल और महंगी है।
फ्यूल की कमी और भविष्य की चुनौतियां
पेट्रोलियम मंत्री ने देश में फ्यूल बचाने के सख्त उपायों की मांग की है ताकि मौजूदा रिजर्व को लंबे समय तक चलाया जा सके। एलएनजी (LNG) की सप्लाई में रुकावट आने की संभावना ने ऊर्जा संकट को और गहरा कर दिया है। यदि मध्य पूर्व में स्थिति और बिगड़ती है, तो पाकिस्तान में बिजली कटौती और औद्योगिक चक्का जाम जैसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं। सरकार की ‘जी-हुजूरी’ वाली विदेशी नीति और आर्थिक आत्मनिर्भरता की कमी ने देश को एक ऐसे चौराहे पर खड़ा कर दिया है जहाँ से वापसी का रास्ता धुंधला है।



