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LPG Gas Crisis: देश में बढ़ते गैस संकट के बीच जानें आपके रसोई घरों तक कैसे पहुंचता है LPG सिलेंडर?


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oi-Puja Yadav

LPG Gas Crisis: पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब भारत की रसोई तक पहुंचने लगा है। 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले के बाद शुरू हुए टकराव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है।

इस तनाव का सबसे बड़ा असर एलपीजी (LPG) यानी रसोई गैस की सप्लाई चेन पर देखने को मिल रहा है, जिसका इस्तेमाल भारत में 33 करोड़ से ज्यादा परिवार रोजाना खाना बनाने के लिए करते हैं। हालात इसलिए भी चिंताजनक हैं क्योंकि दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण एनर्जी रूट में से एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में कार्गो शिप की आवाजाही प्रभावित हो रही है।

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सुरक्षा जोखिम और शिपिंग बाधाओं के कारण गैस और तेल की आपूर्ति पर दबाव बढ़ गया है, जिससे भारत समेत कई देशों में चिंता बढ़ गई है।

Strait of Hormuz Closure impact: क्यों अहम है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फारस की खाड़ी को वैश्विक बाजार से जोड़ने वाला एक संकरा समुद्री मार्ग है। रिपोर्ट्स के अनुसार दुनिया के कुल तेल और गैस व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। भारत के लिए यह मार्ग बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि देश के करीब आधे कच्चे तेल का आयात इसी रास्ते से होता है। एलपीजी और एलएनजी (LNG) के कई जहाज भी इसी मार्ग से भारत पहुंचते हैं।

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने 242.4 मिलियन टन कच्चा तेल आयात किया, जो पिछले साल की तुलना में 4.2 प्रतिशत अधिक था। वहीं मार्च 2025 तक देश की तेल आयात निर्भरता 89.1 प्रतिशत तक पहुंच गई थी। गैस के मामले में भी भारत लगभग 50 प्रतिशत आयात पर निर्भर है। विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया के संघर्ष के कारण भारत के कुल LNG आयात का लगभग एक-तिहाई हिस्सा प्रभावित हो सकता है।

कैसे भारत तक पहुंचता है LPG सिलेंडर

एलपीजी सिलेंडर सीधे गैस के कुओं से नहीं आता, बल्कि इसकी पूरी एक लंबी सप्लाई चेन होती है। सबसे पहले प्राकृतिक गैस प्रोसेसिंग या कच्चे तेल की रिफाइनिंग के दौरान प्रोपेन और ब्यूटेन जैसी गैसें निकलती हैं, जिन्हें LPG के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। इसके बाद इस गैस को विशेष टैंकों में स्टोर किया जाता है और एलपीजी कैरियर जहाजों में भरकर विभिन्न देशों में भेजा जाता है।

इनमें से कई जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर भारत की ओर आते हैं। भारत पहुंचने के बाद गैस के कार्गो मुंबई, कोच्चि, कांडला और विशाखापत्तनम जैसे प्रमुख बंदरगाहों पर उतारे जाते हैं। वहां से इसे एलपीजी प्लांट्स में भेजा जाता है, जहां गैस को सिलेंडरों में भरा जाता है। इसके बाद ट्रकों के माध्यम से ये सिलेंडर गैस एजेंसियों तक पहुंचते हैं और फिर डीलरों के जरिए आपके घरों और व्यवसायों तक डिलीवर किए जाते हैं।

पिछले 10 सालों में भारत में तेजी से बढ़ी है LPG की मांग

पिछले एक दशक में भारत में एलपीजी की मांग तेजी से बढ़ी है। सरकार की योजनाओं और स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने के कारण ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में रसोई गैस का उपयोग बढ़ा है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार:

  • 2016-17 में LPG खपत: 21.61 मिलियन टन
  • 2024-25 में: 31.32 मिलियन टन
  • 2025-26 में: 30.86 मिलियन टन

इस तरह दस वर्षों में एलपीजी की खपत में लगभग 43 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

LPG Price Hike India March 2026: गैस की कीमतों पर भी दिखने लगा असर

सप्लाई चेन पर बढ़ते दबाव का असर अब घरेलू कीमतों पर भी दिखाई देने लगा है। 7 मार्च को एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये की बढ़ोतरी की गई। इसके बाद दिल्ली में 14.2 किलो वाला घरेलू सिलेंडर 913 रुपये का हो गया है। वहीं 19 किलो का कमर्शियल सिलेंडर लगभग 1883 रुपये का मिल रहा है।

कई शहरों में होटल और रेस्तरां को कमर्शियल गैस की कमी का सामना करना पड़ रहा है। इसके चलते कुछ रेस्टोरेंट्स ने कोयले के तंदूर, इंडक्शन कुकटॉप और इलेक्ट्रिक ओवन जैसे विकल्पों का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। कुछ जगहों पर तो गैस सिलेंडर ब्लैक मार्केट में 2800 से 3000 रुपये तक बिकने की खबरें भी सामने आई हैं।

क्या है सरकार का एक्शन प्लान- घबराने की जरूरत नहीं

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने स्थिति को संभालने के लिए कई एहतियाती कदम उठाए हैं-

बुकिंग में 25 दिन का अंतर: जमाखोरी रोकने के लिए अब दो सिलेंडर की बुकिंग के बीच 25 दिन का अनिवार्य अंतर रखा गया है (पहले यह 21 दिन था)।

उत्पादन में वृद्धि: घरेलू रिफाइनरियों को LPG उत्पादन में 10% की वृद्धि करने का निर्देश दिया गया है।

वैकल्पिक स्रोत: भारत अब हॉर्मुज जलमार्ग पर निर्भरता कम करने के लिए अल्जीरिया, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और नॉर्वे जैसे देशों से गैस आयात करने की संभावनाएं तलाश रहा है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, भारत अब अपने कच्चे तेल का 70% हिस्सा उन स्रोतों से ले रहा है जो हॉर्मुज मार्ग का उपयोग नहीं करते।

उच्च स्तरीय समिति: कमर्शियल गैस की कमी को दूर करने के लिए IOC, HPCL और BPCL के कार्यकारी निदेशकों की एक 3-सदस्यीय समिति बनाई गई है जो रेस्तरां संघों की समस्याओं को सुनेगी।

LPG संकट के बीच सरकार का दावा: फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं

सरकारी सूत्रों का कहना है कि फिलहाल देश में पेट्रोलियम उत्पादों का कोई बड़ा संकट नहीं है और भारतीय रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं। अधिकारियों के अनुसार भारत अपनी करीब 70 प्रतिशत कच्चे तेल की सप्लाई होर्मुज जलडमरूमध्य के अलावा अन्य स्रोतों से प्राप्त कर रहा है, जिससे स्थिति पूरी तरह बिगड़ने की संभावना कम है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक जारी रहा तो इसका असर ऊर्जा कीमतों, गैस सप्लाई और आम लोगों की रसोई पर और ज्यादा दिखाई दे सकता है।



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