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Bengaluru वालों को क्‍या मिलेगी भीषण गर्मी से राहत, क्‍या होगी प्री-मानसून बरसात? IMD ने जारी किया अलर्ट


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oi-Bhavna Pandey

Bengaluru Weather: बेंगलुरु और कर्नाटक के कई हिस्सों में अब प्री-मॉनसून बारिश तथा गरज-चमक से बढ़ती गर्मी से अस्थायी राहत मिल सकती है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिमी घाट और तटीय कर्नाटक पर बदलते वायुमंडलीय हालात अगले कुछ दिनों में छिटपुट बारिश करा सकते हैं।

कर्नाटक के इन जिलों में 40 पार पहुंचा पारा

ताजा मौसम आंकड़े बताते हैं कि राज्य में तापमान बढ़ रहा है। बल्लारी में 40.3°C और कलबुर्गी में 39.4°C दर्ज हुआ, जबकि उत्तरी जिलों में सामान्य से 1-2.5°C अधिक पारा है। हालांकि, यह अभी तक आधिकारिक लू की सीमा तक नहीं पहुंचा है।

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कर्नाटक के किन क्षेत्रों में होगी बारिश?

नम्मा कर्नाटक वेदर नेटवर्क के ब्लॉगर विजय ने बताया कि करावली और मलनाड क्षेत्रों में वायुमंडलीय अभिसरण बन रहा है। यह पैटर्न छिटपुट गरज-चमक के लिए अनुकूल स्थिति पैदा कर सकता है, जिससे इन इलाकों में 5 मिमी से 25 मिमी तक बारिश संभव है।

कब होती है प्री-मॉनसून बरसात?

प्री-मॉनसून बारिश मार्च से मई में होती है, जब ज़मीन पर तीव्र गर्मी वातावरण को अस्थिर करती है। गर्म हवा ऊपर उठती है और ठंडी हवा के प्रवेश से गरज वाले बादल बनते हैं। कर्नाटक में, पश्चिमी घाट और अरब सागर की नमी इन तूफ़ानों को अक्सर बढ़ावा देती है।

ये तूफ़ान दोपहर या शाम को तेजी से विकसित होकर कम समय में तेज़ बारिश व बिजली, तेज़ हवाएँ और अचानक तापमान में गिरावट लाते हैं। अगले सप्ताह कर्नाटक, विशेषकर तटीय व मलनाड बेल्ट में गरज-चमक की गतिविधियाँ बढ़ने की उम्मीद है। बेंगलुरु में छिटपुट प्री-मॉनसून बारिश या बादल छाए रह सकते हैं।

दक्षिण भारत में गर्मी जारी, बारिश से कुछ राहत संभव

दक्षिण भारत में फिलहाल तेज़ गर्मी जारी है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, छिटपुट प्री-मॉनसून बारिश दिन के तापमान को कुछ समय के लिए कम कर सकती है, लेकिन यह पूरी गर्मी को कम नहीं कर पाएगी। कर्नाटक सहित कई हिस्सों में जल्द ही छोटे तूफान और बारिश के कुछ लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

विकसित होते “सुपर” अल नीनो पर नजर

यूरोपीय सेंटर फॉर मीडियम-रेंज वेदर फोरकास्ट्स (ECMWF) के मॉडल के अनुसार, जून तक महासागर और वायुमंडलीय संकेत संरेखित हो सकते हैं, जो इस साल के अंत तक मजबूत या “सुपर” अल नीनो के संकेत दे रहे हैं। अल नीनो तब होता है जब मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर में समुद्री सतह का तापमान असामान्य रूप से बढ़ जाता है।

अल नीनो का भारत पर क्‍या पड़ेगा प्रभाव?

सामान्यतः व्यापारिक पवनें गर्म पानी को दक्षिण-पूर्व एशिया की ओर धकेलती हैं, लेकिन अल नीनो में ये हवाएँ कमजोर पड़ती हैं। इसके कारण गर्म पानी पूर्व की ओर फैलता है और वैश्विक वायुमंडलीय परिसंचरण बदल जाता है। भारत के लिए इसका मतलब उच्च तापमान और कमजोर मॉनसून बारिश हो सकता है।

मॉनसून और लू पर संभावित असर

भारत का मॉनसून मुख्य रूप से भूमि और महासागर के तापमान अंतर पर निर्भर करता है। अल नीनो से परिसंचरण बदलने पर बारिश लाने वाली नमी-युक्त हवाएँ कमजोर हो सकती हैं। यदि मजबूत अल नीनो विकसित होता है, तो उत्तरी और मध्य भारत में लू और मॉनसून की वर्षा में कमी की संभावना बढ़ सकती है।

1997-98 और 2015-16 के मजबूत अल नीनो ने विश्व स्तर पर चरम मौसम और रिकॉर्ड वैश्विक तापमान में योगदान दिया था।

आगामी सप्ताह में कैसा रहेगा मौसम?

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले सप्ताह भारत में मौसम के पैटर्न के विकास के लिए निर्णायक होंगे, खासकर यदि प्रशांत महासागर में गर्माहट इस साल के अंत तक पूर्ण अल नीनो चरण की ओर बढ़ती है।



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