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Kharmas 2026: शुरू हुआ खरमास, एक महीने बंद रहेंगे बैंड-बाजा-बारात, भूलकर भी ना करें ये काम वरना होगा नुकसान


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oi-Ankur Sharma

Kharmas 2026: आज से खरमास की शुरुआत हो रही है, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि को मांगलिक कार्यों के लिए शुभ नहीं माना जाता है, यह वह अवधि होती है जब सूर्य का मीन राशि में प्रवेश होता है। इस समय को शुभ मांगलिक कार्यों के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता लेकिन पूजा-पाठ, दान-पुण्य और भगवान की भक्ति के लिए यह बहुत फलदायी माना जाता है।

ज्योतिष के अनुसार जब सूर्य देव गुरु ग्रह की राशि मीन में प्रवेश करते हैं, तब लगभग एक महीने की अवधि को खरमास कहा जाता है । इस वर्ष खरमास की शुरुआत 15 मार्च 2026 से हुई है जो कि 13 अप्रैल 2026 तक रहेगा।

Kharmas 2026

आपको बता दें कि 14 मार्च 2026 की अर्द्धरात्रि में सूर्य देव मीन राशि में प्रवेश कर गए हैं, सूर्य के इस राशि परिवर्तन के साथ ही खरमास की शुरुआत हो जाती है, उदया तिथि मान्य होने के कारण आज से खरमास शुरू हो गया है।

Kharmas 2026 Significance:खरमास का धार्मिक महत्व

खरमास में भगवान की आराधना करने से विशेष पुण्य मिलता है, इस समय गरीबों और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और धन का दान करना बहुत शुभ माना गया है। माना जाता है कि इस अवधि में पूजा-पाठ और जप करने से मन की शुद्धि होती है और पापों का नाश होता है,खरमास में विशेष रूप से भगवान विष्णु की पूजा करने की परंपरा है।

Kharmas 2026 Do-donts: खरमास में क्या करें ?

सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें, घर के मंदिर में दीपक जलाकर भगवान विष्णु और सूर्य देव का स्मरण करें। सूर्य देव को तांबे के लोटे से जल अर्पित करें। ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जप करें। गरीबों को अन्न, फल, गुड़ या कपड़ों का दान करें, दिन में भगवान का भजन-कीर्तन और धार्मिक ग्रंथों का पाठ करें। एक महीने लगातार विष्णु चालीसा का पाठ करें।

Kharmas 2026

Kharmas 2026 Chalisa: रोज करें विष्षु चालीसा का पाठविष्णु चालीसा

दोहा

  • विष्णु सुनिए विनय सेवक की चितलाय ।
  • कीरत कुछ वर्णन करूं दीजै ज्ञान बताय ।।

विष्णु चालीसा

  • नमो विष्णु भगवान खरारी, कष्ट नशावन अखिल बिहारी ।
  • प्रबल जगत में शक्ति तुम्हारी, त्रिभुवन फैल रही उजियारी ।।
  • सुन्दर रूप मनोहर सूरत, सरल स्वभाव मोहनी मूरत ।
  • तन पर पीताम्बर अति सोहत, बैजन्ती माला मन मोहत ।।
  • शंख चक्र कर गदा विराजे, देखत दैत्य असुर दल भाजे ।
  • सत्य धर्म मद लोभ न गाजे, काम क्रोध मद लोभ न छाजे ।।
  • सन्तभक्त सज्जन मनरंजन, दनुज असुर दुष्टन दल गंजन ।
  • सुख उपजाय कष्ट सब भंजन, दोष मिटाय करत जन सज्जन ।।
  • पाप काट भव सिन्धु उतारण, कष्ट नाशकर भक्त उबारण ।
  • करत अनेक रूप प्रभु धारण, केवल आप भक्ति के कारण ।।
  • धरणि धेनु बन तुमहिं पुकारा, तब तुम रूप राम का धारा ।
  • भार उतार असुर दल मारा, रावण आदिक को संहारा ।।
  • आप वाराह रूप बनाया, हिरण्याक्ष को मार गिराया ।
  • धर मत्स्य तन सिन्धु बनाया, चौदह रतनन को निकलाया।।
  • अमिलख असुरन द्वन्द मचाया, रूप मोहनी आप दिखाया ।
  • देवन को अमृत पान कराया, असुरन को छवि से बहलाया।।
  • कूर्म रूप धर सिन्धु मझाया, मन्द्राचल गिरि तुरत उठाया ।
  • शंकर का तुम फन्द छुड़ाया, भस्मासुर को रूप दिखाया ।।
  • वेदन को जब असुर डुबाया, कर प्रबन्ध उन्हें ढुढवाया ।
  • मोहित बनकर खलहि नचाया, उसही कर से भस्म कराया ।।
  • असुर जलन्धर अति बलदाई, शंकर से उन कीन्ह लड़ाई ।
  • हार पार शिव सकल बनाई, कीन सती से छल खल जाई।।
  • सुमिरन कीन तुम्हें शिवरानी, बतलाई सब विपत कहानी ।
  • तब तुम बने मुनीश्वर ज्ञानी, वृन्दा की सब सुरति भुलानी।।
  • देखत तीन दनुज शैतानी, वृन्दा आय तुम्हें लपटानी ।
  • हो स्पर्श धर्म क्षति मानी, हना असुर उर शिव शैतानी।।
  • तुमने ध्रुव प्रहलाद उबारे, हिरणाकुश आदिक खल मारे ।
  • गणिका और अजामिल तारे, बहुत भक्त भव सिन्धु उतारे।।
  • हरहु सकल संताप हमारे, कृपा करहु हरि सिरजन हारे ।
  • देखहुं मैं निज दरश तुम्हारे, दीन बन्धु भक्तन हितकारे।।
  • चाहता आपका सेवक दर्शन, करहु दया अपनी मधुसूदन ।
  • जानूं नहीं योग्य जब पूजन, होय यज्ञ स्तुति अनुमोदन ।।
  • शीलदया सन्तोष सुलक्षण, विदित नहीं व्रतबोध विलक्षण ।
  • करहुं आपका किस विधि पूजन, कुमति विलोक होत दुख भीषण ।।
  • करहुं प्रणाम कौन विधिसुमिरण, कौन भांति मैं करहु समर्पण ।
  • सुर मुनि करत सदा सेवकाई, हर्षित रहत परम गति पाई ।।
  • दीन दुखिन पर सदा सहाई, निज जन जान लेव अपनाई ।
  • पाप दोष संताप नशाओ, भव बन्धन से मुक्त कराओ।।
  • सुत सम्पति दे सुख उपजाओ, निज चरनन का दास बनाओ ।
  • निगम सदा ये विनय सुनावै, पढ़ै सुनै सो जन सुख पावै।।



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