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Khamenei Death: एक महिला की मौत से इतना परेशान हो गए थे खामेनेई, भारत के इस गांव में बनवा दिया था हॉस्पिटल


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oi-Sumit Jha

Khamenei Death: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के बाद पूरी दुनिया की निगाहें एक बार फिर तेहरान की ओर मुड़ गई हैं। दशकों तक सत्ता के केंद्र में रहे खामेनेई का व्यक्तित्व केवल कूटनीति और सख्त फैसलों तक ही सीमित नहीं था, बल्कि उनके जीवन के कई ऐसे मानवीय और अनछुए पहलू भी थे, जो अब चर्चा का विषय बन रहे हैं।

उनकी मृत्यु की खबर ने न केवल मध्य-पूर्व, बल्कि भारत के भी कुछ सुदूर गांवों में सन्नाटा पसरा दिया है। एक सख्त राजनेता की छवि से इतर, खामेनेई का एक रूप वह भी था जो भारतीय सभ्यता, साहित्य और यहां की मिट्टी से गहरे संवेदनात्मक जुड़ाव रखता था। आइए विस्तार से जानते हैं खामेनेई के जीवन से जुड़ी उन अनसुनी कहानियों के बारे में, जो उनके और भारत के बीच के एक अनोखे और जज्बाती रिश्ते को बयां करती हैं।

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Khamenei India connection: गर्भवती महिला की मौत ने झकझोर दिया दिल

बात 1980 के दशक की शुरुआत की है, जब खामेनेई कर्नाटक के दौरे पर थे। उन्हें पता चला कि अलीपुर गांव की एक गर्भवती महिला को इलाज के लिए बेंगलुरु ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में सही समय पर अस्पताल न मिलने के कारण उसने और उसके बच्चे ने दम तोड़ दिया। इस खबर ने खामेनेई को अंदर तक झकझोर दिया। वे एक अजनबी देश के अनजान गांव की इस त्रासदी पर इतने भावुक हुए कि उन्होंने तुरंत वहां अस्पताल बनवाने का निर्णय लिया।

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khamenei karnataka hospital story hindi: गांव के लिए ‘मसीहा’ बना एक अस्पताल

खामेनेई ने सिर्फ घोषणा नहीं की, बल्कि अस्पताल के निर्माण के लिए फंड भी दिया। उनके इसी प्रयास से गांव में इमाम खुमैनी अस्पताल की नींव रखी गई। यह अस्पताल आज उस इलाके के हजारों गरीब परिवारों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। स्थानीय लोगों के अनुसार, खामेनेई ने उस वक्त यह सपना देखा था कि भविष्य में किसी भी मां को इलाज के अभाव में अपनी जान न गंवानी पड़े, और वह सपना आज भी लोगों की सेवा कर रहा है।

Imam Khomeini Hospital Alipur: मजहब से ऊपर उठकर इंसानियत की सेवा

अयातुल्ला खामेनेई की मदद से बना यह अस्पताल केवल एक इमारत नहीं है। यह इमाम खुमैनी मेडिकल ट्रस्ट द्वारा चलाया जाता है और यहां बिना किसी भेदभाव के हर जाति और धर्म के लोगों का इलाज किया जाता है। गांव वालों का कहना है कि यह अस्पताल अलीपुर और उसके आसपास के इलाकों के लिए एक ‘लाइफलाइन’ है, जो अत्याधुनिक तकनीक के साथ आज भी लोगों को किफायती स्वास्थ्य सेवाएं दे रहा है।

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Khamenei life stories: एक दौरा जो बन गया ऐतिहासिक वादा

अलीपुर के बुजुर्ग आज भी उस दिन को याद करते हैं जब खामेनेई ने इस अस्पताल का शिलान्यास किया था। उनके लिए वह दौरा केवल प्रतीकात्मक नहीं था, बल्कि एक ऐसा वादा था जो हकीकत में बदल गया। स्थानीय इतिहासकार बताते हैं कि खामेनेई का अलीपुर से नाता सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि भावनात्मक था। उन्होंने एक मां की मौत के दर्द को समझा और उसे एक ऐसी संस्था में बदल दिया जो आज हजारों जिंदगियां बचा रही है।

गांव में शोक और सन्नाटे का माहौल

खामेनेई की मृत्यु की खबर मिलते ही पूरे अलीपुर गांव में सन्नाटा पसर गया। दुकानें बंद रहीं और लोगों ने उस शख्सियत के लिए विशेष प्रार्थनाएं कीं, जिसने वर्षों पहले उनके गांव की सुध ली थी। ग्रामीणों के लिए यह एक वैश्विक नेता का जाना नहीं, बल्कि उस संरक्षक को खोना है जिसने मानवता की खातिर एक अस्पताल का तोहफा दिया था। आज भी इस अस्पताल की हर दीवार उस पुराने जज्बाती रिश्ते की गवाही देती है।



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