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MSCB Scam: 25,000 करोड़ केस में अजित पवार-सुनेत्रा पवार समेत सभी को क्लीन चिट, कोर्ट ने क्लोजर रिपोर्ट मानी


Maharashtra

oi-Smita Mugdha

MSCB Scam: महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक (MSCB) से जुड़े कथित 25,000 करोड़ रुपये के घोटाले में बड़ा फैसला सामने आया है। मुंबई की विशेष एमपी-एमएलए अदालत ने आर्थिक अपराध शाखा (EOW) की क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया है। साथ ही, इस मामले को बंद कर दिया है। इस फैसले के साथ ही राज्य के उपमुख्यमंत्री रहे दिवंगत अजित पवार सहित सुनेत्रा पवार और रोहित पवार को बड़ी राहत मिल गई है।

विशेष न्यायाधीश महेश के. जाधव ने अपने विस्तृत आदेश जारी किया। उन्होंने कहा कि मामले में प्रस्तुत दस्तावेजों, गवाहों के बयानों और आधिकारिक रिपोर्टों से किसी भी तरह के आपराधिक षड्यंत्र या धोखाधड़ी के प्रमाण नहीं मिलते हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि बैंक के दिए ऋण और उनकी प्रक्रिया में कुछ अनियमितताएं हो सकती हैं, लेकिन इन्हें आपराधिक कृत्य नहीं माना जा सकता।

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MSCB Scam: 31 जिला सहकारी बैंकों से जुड़ा मामला

– यह मामला MSCB के तहत आने वाले 31 जिला सहकारी बैंकों से जुड़ा था, जिन्होंने कई चीनी मिलों को ऋण दिए थे।

– बाद में इन मिलों के डिफॉल्ट होने और उनकी नीलामी में कथित रूप से बैंक अधिकारियों के परिजनों को लाभ पहुंचाने के आरोप लगे थे।

– हालांकि, अदालत ने पाया कि इन प्रक्रियाओं में किसी भी प्रकार की आपराधिक मंशा साबित नहीं होती।

Ajit Pawar समेत परिवार के कई सदस्यों को मिली राहत

रोहित पवार की कंपनी बारामती एग्रो को भी राहत मिली है। कोर्ट ने कहा कि 2012 में कन्नड़ सहकारी चीनी मिल की नीलामी पूरी तरह से कानूनी प्रक्रिया के तहत हुई थी। साथ ही, यह भी माना गया कि खरीदार कंपनी की वित्तीय स्थिति स्वस्थ थी और उसने भुगतान की क्षमता दिखाई थी। सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे समेत करीब 50 लोगों द्वारा दायर विरोध याचिकाओं को भी अदालत ने खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्य किसी संज्ञेय अपराध को साबित नहीं करते, इसलिए ‘सी समरी’ (क्लोजर रिपोर्ट) को स्वीकार करना उचित है।

कोर्ट ने स्वीकार की क्लोजर रिपोर्ट

न्यायालय ने यह भी उल्लेख किया कि ‘मित्रा पैकेज’ जैसे सरकारी राहत उपायों का उस समय चीनी उद्योग पर बड़ा प्रभाव था, जिसके चलते कई वित्तीय निर्णय लिए गए थे। अदालत ने कहा कि नाबार्ड (NABARD) के कुछ दिशा-निर्देशों का पालन न होना अपने आप में आपराधिक अपराध नहीं बनता। फैसले में यह भी बताया गया कि बैंक की वसूली प्रक्रिया जारी है और अब तक करीब 850 करोड़ रुपये की रिकवरी हो चुकी है।

कोर्ट ने फैसले में कहा, ‘चूक को भ्रष्टाचार नहीं कह सकते’

कोर्ट ने जोर देकर कहा कि MSCB सहकारी संस्थाओं को वित्तीय सहायता देकर जनता के हितों की रक्षा करता रहा है। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि प्रशासनिक स्तर पर हुई चूक या अनियमितताओं को अपराध की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता, जब तक कि उसमें धोखाधड़ी या आपराधिक मंशा साबित न हो।



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