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Iran Heritage: ईरान से इस्लाम का नामो-निशान मिटाना चाहते US-Israel? 63000 साल पुराने इतिहास पर हमले- Video


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oi-Siddharth Purohit

Iran Heritage: ईरान में अमेरिका और इज़राइल के साथ चल रहे युद्ध का असर अब सिर्फ सैन्य मोर्चे तक सीमित नहीं रहा, बल्कि देश की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान भी खतरे में आ गई है। तेहरान ने इस मामले पर गंभीर चिंता जताई है और कहा है कि इस युद्ध ने उसके समृद्ध इतिहास की कई अहम निशानियों को नुकसान पहुंचाया है। इजरायल और अमेरिका दोनों उसकी ऐतिहासिक धरोहरों को जानबूझकर निशाना बना रहे हैं।

56 ऐतिहासिक इमारतों को पहुंचा नुकसान

ईरानी सांस्कृतिक विरासत, पर्यटन और हस्तशिल्प मंत्रालय ने बताया कि 28 फरवरी से शुरू हुए इस युद्ध में कम से कम 56 संग्रहालय, ऐतिहासिक स्मारक और सांस्कृतिक स्थल क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। यह जानकारी सरकारी मीडिया के जरिए सामने आई है। गोलिस्तान पैलेस भी इन क्षतिग्रस्त स्थलों में शामिल है।

Iran Heritage

कई बड़े स्थल नुकसान में

इस्लामिक रिपब्लिक न्यूज़ एजेंसी के अनुसार सबसे ज्यादा नुकसान तेहरान में हुआ है, जहां 19 जगहों पर हमले हुए और उनमें बर्बादी हुई। इनमें गोलिस्तान पैलेस, ग्रैंड बाज़ार तेहरान और पूर्व सीनेट भवन जैसे अहम स्थल शामिल हैं। इससे साफ है कि राजधानी को युद्ध का बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ा है।

The missile attack on the historic Arg Square precinct in #Tehran, which caused damage to the Golestan Palace—one of the most enduring symbols of Irans capital and a @UNESCO World Heritage Site—represents a heinous crime aimed at erasing the cultural heritage of Iran, the cradle… pic.twitter.com/7tRrG2WlZv

— Esmaeil Baqaei (@IRIMFA_SPOX) March 4, 2026 “>

UNESCO साइट भी बर्बाद

सरकार ने बताया कि इस्फ़हान, कुर्दिस्तान, लोरस्तान, कर्मनशाह, बुशहर और इलाम में भी कई ऐतिहासिक स्थल प्रभावित हुए हैं। इस्फ़हान का नक़्श-ए-जहां स्क्वायर, जो एक UNESCO विश्व धरोहर स्थल है, उसके कुछ हिस्से भी नुकसान की चपेट में आए हैं।

म्यूजियम और पुरानी बिल्डिंग्स टूटे

सानंदज, खुर्रमबाद और शिराज़ में स्थित संग्रहालय और ऐतिहासिक परिसर भी प्रभावित हुए हैं। इससे ईरान की सांस्कृतिक पहचान पर खतरा और बढ़ गया है।

1789 में बने गोलिस्तान पैलेस को भी नुकसान

गोलिस्तान पैलेस क़ाजार काल (1789-1925) का है, जब एक तुर्की राजवंश ने ईरान को एकजुट किया और तेहरान को राजधानी बनाया। यह महल फारसी और यूरोपीय वास्तुकला का उदाहरण है, जिसमें बगीचे, पूल और शानदार सजावट शामिल हैं। “गोलिस्तान” का मतलब होता है “फूलों का बगीचा”, जो इसकी खूबसूरती को दर्शाता है।

वीडियो में दिखा भारी नुकसान, टूटी छत और दीवारें

3 मार्च को एसोसिएटेड प्रेस द्वारा जारी वीडियो में महल की दर्पण वाली छत के टूटे हुए शीशे, फर्श पर बिखरे टुकड़े, टूटी खिड़कियां और क्षतिग्रस्त दीवारें साफ दिखाई दीं। इससे पता चलता है कि नुकसान कितना गंभीर है।

अन्य ऐतिहासिक स्थलों को भी नुकसान

तेहरान का ग्रैंड बाज़ार, जो क़ाजार काल से जुड़ा है, भी प्रभावित हुआ है। वहीं नक़्श-ए-जहां स्क्वायर में स्थित मस्जिदें और महल (1598-1629) भी इस हमले से अछूते नहीं रहे। ये सभी स्थल ईरान की सांस्कृतिक पहचान के महत्वपूर्ण प्रतीक हैं। ये वो जगहें जिन्हें पहलवी शासन के दौरान पर्यटकों ने सबसे ज्यादा देखा था। इसके अलावा फलक-ओल-अफ़लाक किला, जो लोरस्तान के खुर्रमबाद में है, वह भी क्षतिग्रस्त हुआ है। हालांकि, अधिकारियों के अनुसार इसकी मुख्य संरचना अभी सुरक्षित है, जो थोड़ी राहत की बात है।

अंतरराष्ट्रीय कानून की उड़ी धज्जियां

ईरान ने 1954 के हेग कन्वेंशन 1954 और यूएनएससी प्रस्ताव 2347 का हवाला दिया है, जो युद्ध के दौरान सांस्कृतिक संपत्तियों की सुरक्षा की बात करते हैं। इन नियमों के अनुसार ऐसे हमले अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन माने जाते हैं। दूसरी तरफ, अमेरिका और इज़राइल का कहना है कि वे केवल सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहे हैं, लेकिन उन पर नागरिक ढांचे और सांस्कृतिक स्थलों को नुकसान पहुंचाने के आरोप लग रहे हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना बढ़ रही है। वहीं

यूनेस्कों ने भी सभी इमारतों में नुकसान की पुष्टि की है।

सदियों पुरानी गुफाएं और 63,000 साल पुराना इतिहास भी खतरे में
खुर्रमबाद घाटी के पास की इमारतों और उस इतिहास की गुफाओं को भी नुकसान हुआ है जो इतिहास के लिखे जाने के पहले से वहां हैं। इन गुफाओं में जहां 63,000 ईसा पूर्व के मानव निवास के प्रमाण मिलते हैं। यह जगह पुरातत्व के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है।ॉ

यूनेस्को की तैयारी के बावजूद नहीं रुका नुकसान

यूनेस्को ने पहले ही सभी पक्षों को इन स्थलों के लोकेशन कोऑर्डिनेट्स दे दिए थे ताकि नुकसान से बचा जा सके। इसके बावजूद लगभग 30 विश्व धरोहर स्थल खतरे में हैं। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरगची ने यूनेस्को की प्रतिक्रिया को “अस्वीकार्य” बताया और कहा कि इसकी चुप्पी सवाल खड़े करती है।

पहले भी हुए ऐसे नुकसान

2003 में इराक पर हमले के दौरान इराक नेशनल म्यूजियम को लूटा गया था। 2015 में आईएसआईएल ने पाल्माइरा के बालशामिन मंदिर को नष्ट कर दिया था। आईएसआईएल ने मोसुल म्युजियम को भी नष्ट किया था। वहीं 2023 के गाजा युद्ध में लगभग 200 ऐतिहासिक स्थल क्षतिग्रस्त हुए। दिसंबर 2024 में ग्रेट ओमारी मस्जिद पर हमला हुआ, जो 7वीं सदी की ऐतिहासिक मस्जिद है।इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।





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