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RGRL शेयर में हेरफेरी: 18 संस्थाओं पर 2.8 करोड़ रुपये का जुर्माना, पांच साल के लिए प्रतिबंध; सेबी की कार्रवाई


पूंजी बाजार नियामक सेबी ने रेट्रो ग्रीन रिवोल्यूशन लि. (आरजीआरएल) के शेयर मूल्य में हेरफेर करने के मामले में 18 संस्थाओं पर कुल 2.8 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। साथ ही, उन्हें प्रतिभूति बाजार में कारोबार करने से पांच साल तक के लिए प्रतिबंधित कर दिया है।

नियामक ने अपने आदेश में 18 में से 15 संस्थाओं को अवैध तरीके से कमाए गए कुल 2.94 करोड़ रुपये के लाभ को 31 दिसंबर, 2021 से भुगतान की तिथि तक 12 फीसदी सालाना ब्याज के साथ वापस जमा कराने का निर्देश दिया है। यह राशि 45 दिनों में सेबी के निवेशक संरक्षण एवं शिक्षा कोष में जमा करानी होगी।

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने मंगलवार को अपने 61 पृष्ठ के आदेश में कहा, ये संस्थाएं आरजीआरएल के कम नकदी वाले शेयर के मूल्य को कृत्रिम रूप से बढ़ाने और निवेशकों को आकर्षित करने की पूर्व नियोजित साजिश का हिस्सा थीं। इस साजिश में आपस में जुड़े हुए संगठनों के बीच कारोबार (ट्रेडिंग) करना शामिल था। इसका मकसद कम शेयर में कृत्रिम मात्रा उत्पन्न करने के बाद मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम के जरिये टिप/स्टॉक अनुशंसाओं का प्रसार करना था।

संजय चोकसी और समूह की हेराफेरी करने में अहम भूमिका

आदेश के मुताबिक, संजय अरुणकुमार चोकसी सहित नोटिस पाने वाले संख्या एक से छह तक के लोग शेयर में ट्रेडिंग का भ्रामक माहौल बनाने के लिए कीमत में हेरफेर कर रहे थे। संजय चोकसी के नेतृत्व वाले चोकसी समूह ने हेराफेरी में अहम भूमिका निभाई। हालांकि, चोकसी अब आरजीआरएल के प्रवर्तक नहीं हैं। फिर भी कंपनी पर उनका नियंत्रण बना रहा, क्योंकि सभी वैधानिक भुगतान उनके खाते से प्राप्त हो रहे थे।

व्यक्तिगत लाभ के लिए प्रभाव का गलत इस्तेमाल

आदेश में सेबी के अर्ध-न्यायिक प्राधिकरण संतोष शुक्ला ने कहा, मुझे लगता है कि नोटिसी संख्या एक (चोकसी) ने सद्भावना से कार्य नहीं किया और व्यक्तिगत लाभ के लिए कंपनी में अपने प्रभाव का बखूबी दुरुपयोग किया। अन्यथा, कम नकदी वाले आरजीआरएल के शेयर में कारोबार की मात्रा में बढ़ोतरी और टेलीग्राम पर प्रसारित सिफारिशें निवेश निर्णय को प्रभावित करने वाले संकेत हैं, जो निवेशकों को इस शेयर में कारोबार करने के लिए प्रेरित करते हैं। अर्ध-न्यायिक प्राधिकरण शुक्ला ने कहा, यह पूरा मामला 18 संस्थाओं को प्रतिभूति बाजार से प्रतिबंधित करने और उन पर मौद्रिक दंड लगाने के लिए उपयुक्त है।

संस्थाओं पर पांच से 50 लाख रुपये तक का दंड

सेबी ने आदेश में कहा इन संस्थाओं ने कुछ नोटिस प्राप्तकर्ताओं को आरजीआरएल के कम तरलता वाले शेयर आम निवेशकों को बेचने में सक्षम बनाया और इस प्रकार कुल 2.94 करोड़ रुपये से थोड़ा अधिक का अवैध लाभ अर्जित किया। जांच के बाद इन संस्थाओं पर पांच लाख से 50 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया गया।

पीएफयूटीपी नियमों का उल्लंघन

मामला सामने आने के बाद इसकी जांच एक सितंबर, 2020 से 31 दिसंबर, 2021 की अवधि के लिए की गई थी, ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या सेबी के पीएफयूटीपी (धोखाधड़ी एवं अनुचित व्यापार प्रथाओं के निषेध) नियमों का उल्लंघन हुआ है। जांच के बाद नियामक ने 8 नवंबर, 2024 को कथित उल्लंघनों के लिए इन संस्थाओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया था।

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