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oi-Sumit Jha
Donald Trump Iran war: पिछले कुछ हफ्तों से दुनिया भर में बस एक ही चर्चा है-क्या डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ जमीनी जंग का आगाज करेंगे? ट्रंप के बयानों में भले ही सस्पेंस हो, लेकिन समंदर की हलचल कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि अमेरिका का शक्तिशाली युद्धपोत ‘यूएसएस त्रिपोली’ 2,200 घातक मरीन सैनिकों के साथ मिडिल ईस्ट की ओर बढ़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि तेल की कीमतों पर लगाम लगाने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने के लिए ट्रंप अगले हफ्ते कोई बड़ा और कड़ा फैसला ले सकते हैं।

USS Tripoli Middle East: समंदर में बढ़ती हलचल और यूएसएस त्रिपोली
यूएसएस त्रिपोली महज एक जहाज नहीं, बल्कि पानी पर तैरता हुआ एक अभेद्य किला है। इस वक्त यह हिंद महासागर में भारत के काफी करीब देखा गया है। इस पर 31वीं मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट के जांबाज सैनिक सवार हैं, जो जमीन और आसमान दोनों जगह से हमला करने में माहिर हैं। साथ ही, इस पर अत्याधुनिक एफ-35 स्टील्थ फाइटर जेट्स और खतरनाक हेलीकॉप्टर भी तैनात हैं। अगर ये सैनिक ईरान की धरती पर कदम रखते हैं, तो यह पिछले 20 सालों में अमेरिकी सेना का सबसे बड़ा जमीनी अभियान होगा।
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US Marines Iran deployment: तेल के रास्ते पर ईरान का कब्जा
ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। दुनिया का करीब 20% तेल और गैस इसी रास्ते से गुजरता है, जिसे ईरान ने लगभग ठप कर दिया है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। इतना ही नहीं, ईरान अब यहाँ से गुजरने वाले जहाजों से भारी भरकम टैक्स भी वसूल रहा है। ट्रंप के लिए इस रास्ते को फिर से खोलना और वैश्विक अर्थव्यवस्था को बचाना इस वक्त सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।
परमाणु खजाने को सुरक्षित करने की होड़
ईरान के पास करीब 950 पाउंड से ज्यादा उच्च संवर्धित यूरेनियम होने की खबर है, जिससे परमाणु बम बनाया जा सकता है। अमेरिका और इजरायल की बमबारी के बाद यह यूरेनियम अब मलबे के नीचे दबा हुआ है। ट्रंप का साफ मानना है कि ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु शक्ति नहीं बनने दिया जा सकता। इस खजाने को अपने कब्जे में लेने या इसे नष्ट करने के लिए केवल हवाई हमले काफी नहीं हैं, इसके लिए ट्रंप को अपने जांबाज मरीन सैनिकों को जमीन पर उतारना ही पड़ेगा।
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ट्रंप की रणनीति और सस्पेंस
जब मीडिया ने ट्रंप से सेना भेजने पर सवाल किया, तो उन्होंने हमेशा की तरह घुमावदार जवाब दिया। उन्होंने कहा कि वह किसी को बताकर हमला नहीं करेंगे। ट्रंप अपने अप्रत्याशित फैसलों के लिए जाने जाते हैं, जो दुश्मनों को हमेशा अंधेरे में रखते हैं। अमेरिकी सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि ट्रंप ईरान के छोटे द्वीपों पर कब्जा करके वहां से कमर्शियल जहाजों को सुरक्षा देने का मन बना चुके हैं। उनकी यह ‘चुप्पी’ असल में एक बड़े तूफान के आने का संकेत हो सकती है।
क्या दुनिया एक नए युद्ध की ओर है?
अगर अगले हफ्ते अमेरिकी सैनिक ईरान के तटों पर उतरते हैं, तो मिडिल ईस्ट की तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी। ट्रंप चाहते हैं कि उनके सहयोगी देश भी इस मिशन में साथ आएं, लेकिन फिलहाल अमेरिका अकेले ही मोर्चा संभालता दिख रहा है। ईरान की नौसेना कमजोर पड़ चुकी है, जिससे अमेरिका के लिए जोखिम तो कम है, लेकिन ईरान का पलटवार पूरी दुनिया के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। आने वाले कुछ दिन यह तय करेंगे कि यह तनाव शांति की ओर जाएगा या महायुद्ध की ओर।



