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DMK Alliance Break: चुनाव से पहले ही टूट गया गठबंधन, TVK के अलग होने से कितनी बढ़ेगी स्टालिन की मुश्किलें?


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oi-Smita Mugdha

DMK Alliance Break: तमिलनाडु की राजनीति में चुनाव से पहले एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। सत्तारूढ़ डीएमके (DMK) को उस समय झटका लगा जब उसकी सहयोगी पार्टी टीवीके (TVK) ने गठबंधन से अलग होने का फैसला कर लिया। पार्टी के नेता टी. वेलमुरुगन (T. Velmurugan) ने सीट बंटवारे को लेकर असहमति जताते हुए यह कदम उठाया। त्रिकोणीय मुकाबले में टीवीके के अलग होने का असर गठबंधन के समीकरणों पर पड़ सकता है। बता दें कि विजय की पार्टी का नाम भी टीवीके (Tamilaga Vettri Kazhagam) है।

जानकारी के मुताबिक, वेलमुरुगन ने आगामी विधानसभा चुनाव के लिए दो सीटों की मांग की थी, लेकिन डीएमके ने उन्हें केवल एक सीट देने का प्रस्ताव रखा। इसी मुद्दे पर सहमति नहीं बनने के कारण उन्होंने गठबंधन से अलग होने का ऐलान कर दिया। खास बात यह है कि वेलमुरुगन वर्तमान में विधायक हैं और उत्तर तमिलनाडु में उनका मजबूत जनाधार माना जाता है।

DMK Alliance Break

DMK Alliance Break: वन्नियार वोट बैंक पर असर

वेलमुरुगन का संबंध वन्नियार (OBC) समुदाय से है, जो उत्तर तमिलनाडु में प्रभावशाली माना जाता है। ऐसे में उनके गठबंधन से बाहर होने से DMK को इस क्षेत्र में वोटों का नुकसान उठाना पड़ सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला सीधे तौर पर डीएमकी की चुनावी रणनीति को प्रभावित कर सकता है।

Tamil Nadu Election: गठबंधन की मजबूती पर सवाल

टीवीके को अब तक इंडिया अलायंस की उन छोटी लेकिन प्रभावशाली पार्टियों में से थी, जो स्थानीय स्तर पर मजबूत पकड़ रखती हैं। ऐसे में इस पार्टी के बाहर होने से गठबंधन की एकजुटता पर सवाल खड़े हो गए हैं। यह भी महत्वपूर्ण है कि टीवीके के गठबंधन से बाहर होने पर दूसरे सहयोगियों के बीच भी असंतोष की आशंका बढ़ सकती है।

तमिलनाडु के चुनावी गणित पर क्या होगा असर?

तमिलनाडु की राजनीति में सीट बंटवारा और सामाजिक समीकरण बेहद अहम भूमिका निभाते हैं। वन्नियार समुदाय के वोट कई सीटों पर निर्णायक साबित होते हैं। यदि वेलमुरुगन अलग होकर चुनाव लड़ते हैं, तो यह वोट बैंक बंट सकता है, जिससे DMK को सीधा नुकसान हो सकता है और विपक्ष को फायदा मिल सकता है। अब चुनाव नतीजों के बात ही इसका पता चल सकेगा डीएमके और स्टालिन इस नुकसान की भरपाई कैसे करते हैं। फिलहाल यरह देखना है कि चुनाव से पहले क्या पार्टी नए सहयोगियों को साथ जोड़ेगी या अपनी रणनीति में बदलाव करेगी।



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