भारतीय इक्विटी मार्केट में यह सप्ताह बहुत अधिक उतार-चढ़ाव वाला रहा, लेकिन स्थिर रहा, जिसमें पिछले हफ़्ते के तेज करेक्शन के बाद सेंटिमेंट में शॉर्ट-टर्म राहत के संकेत दिखे। जबकि पश्विम एशिया में जियोपॉलिटिकल टेंशन बढ़ा हुआ था, कच्चे तेल की कीमतों में कुछ नरमी ने और गिरावट को रोकने में मदद की, जिससे इंडेक्स ज़रूरी सपोर्ट ज़ोन के पास मज़बूत हो सके। हालांकि, इस हफ्ते ज्यादातर दिन के दौरान तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिले, जो चल रहे जियोपॉलिटिकल घटनाक्रम और कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव की वजह से हुआ।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है बाजार नए सप्ताह में रक्षात्मक और थोड़ी सुस्त चाल के साथ शुरुआत करने की संभावना है। निवेशक सावधानी के साथ कारोबार करेंगे। क्योंकि मार्केट की दिशा ग्लोबल डेवलपमेंट विशेषकर कच्चे तेल के रुझानों और भू-राजनीतिक स्थितरता पर अधिक निर्भर करती है।
नया सप्ताह रक्षात्मक और थोड़ी सुस्त चाल के साथ शुरू होने की संभावना
लाइवलॉन्ग वेल्थ के संस्थापक और रिसर्च एनालिस्ट हरिप्रसाद कहते हैं, भारतीय इक्विटी आने वाले हफ्ते की शुरुआत सावधानी के साथ करने वाले हैं, गिफ्ट निफ्टी से शुरुआती संकेतों से गैप-डाउन ओपनिंग का संकेत मिल रहा है। निफ्टी स्पॉट पर 300 पॉइंट्स का बड़ा डिस्काउंट बताता है कि सेंटिमेंट अभी भी कमजोर बना हुआ है, और जब तक कोई अच्छा ट्रिगर सपोर्ट नहीं करता, आने वाले हफ़्ते की शुरुआत में गिरावट का रिस्क हावी हो सकता है।
बाजार नए सप्ताह में रक्षात्मक और थोड़ी सुस्त चाल के साथ शुरुआत करने की संभावना है। जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी जारी रहने की पूरी उम्मीद है, जो लगातार विदेशी संस्थाग निवेशकों की बिक्री को संतुलित करती दिखाई दे सकती है। एफआईआई की बिकवाली, कमजोर वैश्विक संकेत, कमोडिटी की बढ़ी हुई कीमतें और सतर्क डेरिवेटिव्स पोजिशनिंग सीमित अपसाइड पोटेंशियल का संकेत देते हैं। वे कहते हैं, बड़ी स्ट्रक्चर से पता चलता है कि रैलियों में बिकवाली जारी रह सकती है, मार्केट की दिशा वैश्विक घटनाक्रम विशेषकर कच्चे तेल के रुझानों और भू-राजनीतिक स्थितरता पर अधिक निर्भर करती है।
कच्चे तेल की कीमतें, करेंसी में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना
जियोजित इंवेस्टमेंट लिमिटेड के रिसर्च हेड विनोद नायर कहते हैं, आगामी हफ्ते में बाजार में भू-राजनीतिक डेवलपमेंट, कच्चे तेल की कीमतों और करेंसी में उतार-चढ़ाव जैसी सेंसिटिव बनी रहने की संभावना है। शॉर्ट-टर्म कैटलिस्ट में जापान और यूके से महंगाई के आंकड़े, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के चैयरमैन की जेरोम पॉवेल की कमेंट्री और भारत व अमेरिका के पीएमआई डेटा आने पर नजर रखी जाएगी। हालांकि भू-राजनीतिक जोखिम और मैक्रोइकोनॉमिक मुश्किलों से होने वाली शॉर्ट टर्म वोलैटिलिटी बनी रह सकती है, लेकिन चल रहे करेक्शन और वैल्यूएशन रीसेट से धीरे-धीरे निवेशक लॉग टर्म में निवेश करने के तरिकों को अपना सकते हैं।
बाजार की हालिया दिशा कच्चे तेल और भू-राजनीतिक घटनाक्रम से होगी तय
एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी कहते हैं, आगामी बाजार की दिशा अल्पावधि में काफी हद तक पश्चिम एशिया के घटनाक्रम, विशेषकर होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बदलते हालात पर निर्भर करेगी। कोई भी लंबे समय तक रुकावट कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ला सकती हैं, जिससे महंगाई और करंट अकाउंट का दबाव बढ़ सकता है, जबकि रिस्क-ऑफ सेंटिमेंट बना रहेगा। विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा भारतीय बाजार से लगातार निकासी और वैश्विक संकेत सहित डॉलर की मजबूती और अन्य बड़े बाजार की चाल भी शेयर बाजार को प्रभावित कर सकती है। कच्चे तेल की कीमतों में नरमी एक शॉर्ट कवरिंग रैली शुरू कर सकती है, जबकि कीमतों में तेज वृद्धि बाजार में दबाव बना सकती है।



