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Delhi Riots: जिसने पूरी जिंदगी ईर्ष्या की, उसी के निकाह में 6 साल जेल काटकर पहुंचे Sharjeel Imam, दूल्हा कौन?


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Delhi Riots Sharjeel Imam Interim Bail: 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े ‘बड़ी साजिश’ मामले के प्रमुख आरोपी शरजील इमाम करीब छह साल बाद तिहाड़ जेल से अस्थायी रूप से बाहर आए हैं। दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने उन्हें मानवीय आधार पर 10 दिन की अंतरिम जमानत दी है, ताकि वे अपने छोटे भाई मुजम्मिल इमाम की शादी (निकाह) में शामिल हो सकें और बीमार मां की देखभाल कर सकें।

शरजील 20 मार्च 2026 को जेल से रिहा हुए और यह राहत 30 मार्च 2026 तक वैध है। निकाह 25 मार्च को बिहार के जहानाबाद जिले के काको गांव में उनके पैतृक घर पर होने वाला है। परिवार के सदस्यों ने इस फैसले पर राहत और खुशी जताई है। मुजम्मिल ने कहा कि छह साल बाद भाई घर लौटे हैं, अदालत ने परिवार की स्थिति समझी और समय बिताने की इजाजत दी। वे सभी शर्तों का सख्ती से पालन करेंगे। आइए विस्तार से जानें आखिर कौन है दूल्हा? क्या शर्तें हैं बेल की?

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Sharjeel Imam Interim Bail Conditions: जमानत की मुख्य शर्तें क्या?

  • अवधि: 20 मार्च से 30 मार्च 2026 तक (कुल 10 दिन)।
  • बॉन्ड: ₹50,000 का पर्सनल बॉन्ड और इतनी ही राशि के दो जमानतदार।

क्या क्या प्रतिबंध?

  • मामले से जुड़े किसी गवाह या व्यक्ति से कोई संपर्क नहीं।
  • अपना मोबाइल नंबर जांच अधिकारी को देना और हमेशा एक्टिव रखना।
  • मीडिया से कोई बातचीत या सोशल मीडिया का इस्तेमाल नहीं।
  • केवल परिवार से मिलना और शादी/निवास स्थान पर ही रहना।
  • सरेंडर: 30 मार्च शाम को तिहाड़ जेल अधीक्षक के सामने वापस आत्मसमर्पण करना अनिवार्य।

शरजील ने शुरुआत में 6 हफ्ते की जमानत मांगी थी, लेकिन कोर्ट ने केवल 10 दिन की मंजूरी दी, मुख्यतः भाई की शादी और मां की तबीयत को ध्यान में रखते हुए।

Who Is Groom Muzzammil Imam: दूल्हा कौन? परिवार का बैकग्राउंड

दूल्हा मुजम्मिल इमाम शरजील का छोटा भाई है। पूरा परिवार बिहार के जहानाबाद जिले के काको गांव का मूल निवासी है। मुजम्मिल परिवार के मुख्य देखभालकर्ता हैं और मां की देखभाल की जिम्मेदारी संभालते हैं। निकाह की कुछ रस्में लखनऊ में भी हो सकती हैं, लेकिन मुख्य समारोह बिहार में ही होगा। परिवार के अनुसार, शरजील बड़े भाई के रूप में शादी की जिम्मेदारियां निभाना चाहते थे, क्योंकि परिवार में कोई अन्य पुरुष सदस्य नहीं है जो यह भूमिका संभाल सके।

Muzzammil Imam-Sharjeel Imam Relations: ‘मैंने पूरी जिंदगी उनसे ईर्ष्या की है’ – मुजम्मिल का भावुक लेख

मुजम्मिल इमाम ने 2020 के एक पुराने व्यक्तिगत लेख में बड़े भाई शरजील के साथ बचपन की यादें साझा की थीं। पत्रकारिता और जनसंचार में स्नातकोत्तर मुजम्मिल शरजील ने भाई को ‘अव्यावहारिक, पागल और सनकी’ कहते हुए भी सराहना की थी। यह लेख राजनीतिक छवि से अलग, सिर्फ एक भाई के नजरिए से लिखा गया था। मुजम्मिल ने लिखा कि ‘मैंने पूरी जिंदगी उनसे ईर्ष्या की है।’ मुजम्मिल औसत छात्र रहे, जबकि शरजील स्कूल-कॉलेज में टॉपर थे। आईआईटी-बॉम्बे और जेएनयू की पढ़ाई के मुकाबले मुजम्मिल ने प्राइवेट यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया, जिससे माता-पिता उन्हें ‘बिगड़ा हुआ बच्चा’ कहते थे।

बचपन की कुछ यादें:-

  • समोसा वाला किस्सा: छठी कक्षा में शरजील ने मां से मिले एक रुपये से समोसा खाने की बजाय एक बूढ़े भिखारी को दे दिया। घर लौटकर भूख से तड़पते हुए उन्होंने मां से जल्दी खाना मांगा। मुजम्मिल को लगा कि दूसरों के बारे में पहले सोचना ‘बेवकूफी’ है।
  • बाजार में ज्यादा पैसे देना: सब्जी या सामान खरीदते समय शरजील दुकानदार को बाजार भाव से ज्यादा देते थे। कारण बताते हुए कहते, ‘धूप में खड़ा था, छोड़ो ना।’ रिक्शा वालों से भी मोलभाव नहीं करते, कहते ‘मानव श्रम की कोई कीमत नहीं लगाई जा सकती।’
  • कपड़े और जरूरतें: शरजील ने जीवन में कभी खुद कपड़े नहीं खरीदे। पिता के समय से पिता, बाद में मुजम्मिल ही उनके लिए खरीदते हैं। वे किताबें हजारों में खरीदते हैं, लेकिन खाने-पीने, कपड़ों में दूसरों पर निर्भर रहते हैं।

मुजम्मिल लिखते हैं, ‘मेरा भाई अव्यावहारिक है। कौन भिखारी को खाना देता है? कौन 40 लाख का पैकेज ठुकराता है? कौन किताबें खरीदता है और कपड़े दूसरों पर छोड़ देता है?’ लेकिन यही उनकी खासियत है।

Who Is Muzzammil Imam: मुजम्मिल इमाम कौन हैं?

मुजम्मिल खुद को राजनीतिक कार्यकर्ता, स्वतंत्र पत्रकार और जनता दल (यू) के पूर्व महासचिव/प्रवक्ता बताते हैं। हालांकि, उनके फेसबुक प्रोफाइल पर वे दूरदर्शन केंद्र श्रीनगर के प्रशिक्षु निर्माण सहायक के रूप में बताए गए हैं।

Delhi Riots 2020: 2020 दिल्ली दंगा केस क्या है?

शरजील इमाम (पूर्व जेएनयू छात्र और एक्टिविस्ट) जनवरी 2020 में गिरफ्तार हुए। आरोप है कि UAPA के तहत दिल्ली दंगों की ‘बड़ी साजिश’ में शामिल होना। फरवरी 2020 के CAA-NRC विरोध के दौरान हुए दंगों में 50 से ज्यादा मौतें और 700 से ज्यादा घायल हुए।

यह शरजील की पहली अंतरिम जमानत हैपहले कभी रिहा नहीं हुए। अन्य आरोपी जैसे उमर खालिद अभी भी जेल में हैं। कुछ को हाल में जमानत मिली, लेकिन शरजील और उमर की याचिकाएं खारिज हुईं। शरजील खुद को ‘राजनीतिक कैदी’ बताते हैं और कहते हैं कि उनकी लड़ाई नीतियों के खिलाफ है, फैसला अदालतों पर छोड़ते हैं। परिवार का कहना है कि न्याय मिलेगा।



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