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oi-Sohit Kumar
Iran Oil Offer to India: दुनिया भर में गहराते ऊर्जा संकट और ईरान-इजरायल युद्ध के बीच वैश्विक तेल बाजार (Global Oil Market) में बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। अमेरिका द्वारा ईरान पर लगे प्रतिबंधों (Restrictions) में अस्थायी ढील दिए जाने के बाद, अब ईरान ने भारत को कच्चा तेल (Crude Oil) और एलपीजी (LPG) बेचने की पेशकश की है।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रेडर्स और नेशनल ईरानी ऑयल कंपनी (NIOC) ने भारतीय रिफाइनरियों को तेल की आपूर्ति के लिए संपर्क किया है। भारत, जो दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है, उसने मई 2019 के बाद से अमेरिकी दबाव के चलते ईरान से एक भी खेप नहीं खरीदी थी, लेकिन अब बदलते समीकरणों ने नई उम्मीदें जगा दी हैं।

आइए जानतें हैं ईरान ने भारत के सामने कौन सी ऐसी शर्तें रख दी हैं, जिसने इस डील को पेंचीदा बना दिया है…
हॉर्मुज में तनाव और भारत की जरूरत
ईरान और इजरायल के बीच पिछले चार हफ्तों से जारी युद्ध ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के जरिए होने वाली शिपमेंट को बुरी तरह प्रभावित किया है। इस समुद्री रास्ते से होने वाली बाधा के कारण भारत की फ्यूल सप्लाई पर सीधा असर पड़ा है। भारत न केवल क्रूड ऑयल की कमी से जूझ रहा है, बल्कि देश में रसोई गैस (LPG) की भी भारी किल्लत देखी जा रही है। ऐसे में ईरान, जो भौगोलिक रूप से भारत के करीब है, एक बड़ा विकल्प बनकर उभरा है।
ट्रम्प प्रशासन की 30 दिनों की छूट
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के कार्यकारी निदेशक फातिह बिरोल ने वर्तमान ऊर्जा संकट को 1970 के दशक के तेल झटकों से भी भयानक बताया है। स्थिति को संभालने के लिए अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेन्ट ने जानकारी दी है कि ट्रम्प प्रशासन ने समुद्र में मौजूद ईरानी तेल की खरीद के लिए 30 दिनों की प्रतिबंध छूट (Sanctions Waiver) जारी की है। यह छूट उन जहाजों पर लागू होगी जो 20 मार्च तक लोड हो चुके हैं और 19 अप्रैल तक अनलोड हो जाएंगे।
भारत के सामने भुगतान की कड़ी शर्तें
भले ही ईरान ने तेल देने की पेशकश की है, लेकिन इसकी शर्तें भारतीय रिफाइनरियों को चौंका रही हैं। सूत्रों के मुताबिक, ईरानी तेल को ICE Brent की तुलना में 6 से 8 डॉलर प्रति बैरल के प्रीमियम पर ऑफर किया गया है। इसके अलावा, ईरान ने शर्त रखी है कि कार्गो पहुंचने के महज 7 दिनों के भीतर भुगतान करना होगा। हालांकि कुछ ट्रेडर्स भारतीय रुपये में भुगतान के लिए तैयार हैं, लेकिन NIOC मुख्य रूप से डॉलर में भुगतान की मांग कर रहा है।
SWIFT सिस्टम और भारत का रुख
भारतीय रिफाइनरियां इस सौदे को लेकर बेहद सतर्क हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि ईरान अभी भी वैश्विक भुगतान प्रणाली (SWIFT) से बाहर है, जिससे डॉलर में भुगतान करना तकनीकी रूप से जटिल है। इस मुद्दे पर भारत के केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने स्पष्ट किया कि ईरानी ईंधन खरीदने का कोई भी फैसला पूरी तरह से तेल कंपनियों का “टेक्नो-कमर्शियल निर्णय” होगा। यानी कंपनियां लाभ और जोखिम का आकलन करने के बाद ही इस दिशा में कदम बढ़ाएंगी।



