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WTO बैठक में भारत का दमदार रुख: किसानों-मछुआरों के हितों पर फोकस, डिजिटल व्यापार में भी आजादी की मांग


विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) की कैमरून बैठक में भारत का जोर छोटे किसानों और मत्स्यपालकों की आजीविका और आर्थिक हितों की आवाज बुलंद करने पर होगा। यह बैठक 26 मार्च से चार दिनों के लिए कैमरून के याउंदे में होगी। विकासशील देशों के लिए डिजिटल व्यापार जैसे नए क्षेत्रों में नीति बनाने की स्वतंत्रता इस मंत्री स्तरीय बैठक में भारत की मुख्य प्राथमिकता होगी। 

इस बैठक में 166 सदस्य देशों के वाणिज्य मंत्री शामिल होंगे। इनमें भारत, चीन और अमेरिका प्रमुख हैं। बैठक में कृषि, ई-कॉमर्स और मत्स्य उद्योग से जुड़े वैश्विक व्यापार मुद्दों पर चर्चा होगी। भारत का नेतृत्व वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल करेंगे। उनकी टीम में वाणिज्य विभाग और जेनेवा में भारत के स्थायी मिशन के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। भारत का मुख्य फोकस खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना, छोटे किसानों और मत्स्यपालकों के रोजगार की रक्षा के साथ डिजिटल व्यापार और नई तकनीकों में विकासशील देशों के लिए स्वतंत्रता बनाए रखना होगा। 

विकास के लिए निवेश सुविधा

भारत ऐसे प्रयासों का समर्थन करता है जो विकासशील देशों में निवेश बढ़ाएं। पिछली बैठक में भारत ने चीन के नेतृत्व वाले आईडीएफ प्रस्ताव का विरोध किया था। यह प्रस्ताव सदस्य देशों के लिए बाध्यकारी होगा।

क्या होंगे बैठक के मुख्य प्रस्ताव

बैठक के मुख्य प्रस्ताव होंगे- कृषि, ई-कॉमर्स, मत्स्य उद्योग, निवेश, डब्ल्यूटीओ सुधार और डिजिटल ट्रेड। भारत अन्य मुद्दों को भी उठाएगा, जिनमें ई-कॉमर्स ट्रांसमिशन पर 28 साल की रोक को जारी रखना, मत्स्य पालन सब्सिडी और विकास के लिए निवेश सुविधा समझौते का प्रस्ताव शामिल है।

डब्ल्यूटीओ के सदस्य देश ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए टैरिफ से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा कर सकते हैं।भारत बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली को मजबूत करने वाली सुधारों का समर्थन करेगा, लेकिन विकासशील देशों के हितों को केंद्र में रखेगा। डिजिटल अर्थव्यवस्था तेजी से बदल रही है, खासकर कृत्रिम मेधा और नई तकनीकों के युग में। भारत का कहना है कि देशों को नई तकनीकों का लाभ लेने के लिए नीतियों में स्वतंत्रता चाहिए।

25 वर्षों तक सब्सिडी पर रोक की मांग कर सकता है भारत

भारत सार्वजनिक भंडारण के स्थाई समाधान की मांग करेगा। देश के 99.4 फीसदी किसान कम आय वाले हैं और नयूनतम समर्थन मूल्य पर निर्भर हैं। इस व्यवस्था का  समाधान किसानों के जीवन और खाद्य सुरक्षा के लिए आवश्यक है। इसके अलावा भारत ने मत्स्य उद्योग सब्सिडी पर बातचीत और संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। इसके तहत मत्स्य उत्पादन में अग्रणी देशों को मछली पकड़ने की क्षमता को धीरे-धीरे घटाने की बात कही गई है। साथ ही, इस क्षेत्र में कम से कम 25 वर्षों के लिए सब्सिडी पर रोक हो।



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