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Trump Iran War: ‘समझौते की भीख मांग रहा है ईरान’ मिडिल ईस्ट जंग के बीच ट्रंप का बड़ा दावा, क्या खत्म होगी जंग?


International

oi-Puja Yadav

Trump Iran War Update: पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी भीषण संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसा बयान दिया है जिसने पूरी दुनिया में खलबली मचा दी है। ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई ने ईरान की कमर तोड़ दी है और अब तेहरान का नेतृत्व किसी भी कीमत पर समझौते के लिए भीख मांग रहा है।

राष्ट्रपति ट्रंप ने न केवल ईरान की सैन्य तबाही का ब्योरा दिया, बल्कि अपने सहयोगियों (NATO) पर भी तीखा हमला बोला। ट्रंप के इस रुख ने विशेषज्ञों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या अमेरिका ईरान को पूरी तरह घुटने पर लाकर अपनी शर्तों पर नया ‘ग्लोबल ऑर्डर’ थोपना चाहता है।

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नौसेना डूबी, वायुसेना खत्म: ट्रंप का तबाही वाला दावा

व्हाइट हाउस से जारी संबोधन में ट्रंप ने बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि ईरान अब लड़ने की स्थिति में नहीं बचा है। ट्रंप ने कहा, ईरान की नौसेना डूब चुकी है। यह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद किसी भी विदेशी नौसेना का सबसे बड़ा खात्मा है। उनकी वायुसेना खत्म हो गई है और उनकी एंटी-एयरक्राफ्ट व संचार क्षमताएं पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी हैं।

ट्रंप ने दावा किया कि ईरान का शीर्ष नेतृत्व (Leadership) अब अस्तित्व में नहीं है। उन्होंने कहा कि पहले स्तर के नेता मारे गए और जब वे नए नेता चुनने के लिए मिले, तो उन्हें भी खत्म कर दिया गया।

क्या ईरान को है B-2 बॉम्बर्स और ‘परमाणु हमले’ का डर

ट्रंप ने पहली बार स्वीकार किया कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अपने सबसे घातक B-2 स्टील्थ बॉम्बर्स का इस्तेमाल किया है। उन्होंने इस हमले को जायज ठहराते हुए कहा, अगर हमने उस समय उन पर हमला नहीं किया होता, तो उनके पास परमाणु हथियार होता और वे बिना किसी सवाल के उसका इस्तेमाल कर देते। वे बीमार लोग हैं, बहुत बीमार।

ट्रंप का यह बयान अमेरिका की एक सोची-समझी मनोवैज्ञानिक और कूटनीतिक चाल (Psychological Warfare) की ओर इशारा करता है। ट्रंप ने बार-बार कहा कि ईरान समझौते के लिए मिन्नतें कर रहा है। उन्होंने कहा, वे भीख मांग रहे हैं, मैं नहीं। जो वहां देख रहा है उसे पता है कि वे क्यों डर रहे हैं।

ईरानियों को घटिया लड़ाके लेकिन महान वार्ताकार बताकर ट्रंप ने संकेत दिया है कि वे अब ईरान को किसी भी बातचीत की मेज पर बेहद कमजोर स्थिति में देखना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि यह सौदा 4 हफ्ते या 2 साल पहले हो जाना चाहिए था, और अब अमेरिका इसे करेगा या नहीं, यह तय नहीं है।

मिडिल ईस्ट की इस जंग में अकेले लड़ रहे ट्रंप ने अपने सहयोगियों को भी नहीं बख्शा। उन्होंने नाटो पर अपनी पुरानी भड़ास निकालते हुए कहा-मैं 25 साल से कह रहा हूं कि नाटो एक कागजी शेर (Paper Tiger) है। उन्होंने कुछ नहीं किया। हम उनके बचाव में जाते हैं, लेकिन वे कभी हमारे काम नहीं आते।

क्या अब खत्म होगी जंग?

ट्रंप के इस दावे के बाद अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में दो संभावनाएं बन रही हैं। पहली यह कि ईरान अपनी बची-कुची साख बचाने के लिए कोई आत्मघाती कदम उठा सकता है, और दूसरी यह कि भारी तबाही के बाद वह वास्तव में पर्दे के पीछे से अमेरिका के साथ किसी गुप्त समझौते की कोशिश कर रहा हो।

विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का असली मकसद ईरान के तेल और परमाणु संसाधनों पर स्थायी नियंत्रण पाना है, ताकि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों ($200 प्रति बैरल का खतरा) को अमेरिका के हिसाब से नियंत्रित किया जा सके।



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