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AAP vs Raghav Chadha: केजरीवाल के सिपाही या मोदी के मुरीद? राघव चड्ढा की चुप्पी पर आम आदमी पार्टी का तीखा हमला


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oi-Kumari Sunidhi Raj

AAP vs Raghav Chadha: आम आदमी पार्टी (AAP) और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा के बीच की दूरियां अब सार्वजनिक और तीखे हमले में बदल गई हैं। पार्टी ने चड्ढा को राज्यसभा के उपनेता पद से हटाने को एक ‘सामान्य प्रक्रिया’ करार देते हुए उन पर गंभीर राजनीतिक आरोप मढ़े हैं। AAP के शीर्ष नेतृत्व ने सीधे तौर पर राघव चड्ढा की निष्ठा और साहस पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि वह आखिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा सरकार के खिलाफ आवाज उठाने से क्यों कतरा रहे हैं?

पार्टी का दावा है कि राघव चड्ढा लगातार ‘पार्टी लाइन’ का उल्लंघन कर रहे हैं और महत्वपूर्ण संसदीय मौकों पर विपक्ष की एकजुटता से खुद को दूर रख रहे हैं। मुख्यमंत्री भगवंत मान से लेकर संजय सिंह, आतिशी और सौरभ भारद्वाज तक, सभी ने एक सुर में चड्ढा पर ‘डर की राजनीति’ करने का आरोप लगाया है।

AAP vs Raghav Chadha

पार्टी व्हिप का उल्लंघन और ‘मौन’ पर सवाल

आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने राघव चड्ढा के हालिया संसदीय आचरण पर गहरी नाराजगी जताई है। पार्टी के अनुसार, चड्ढा ने न केवल मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने से इनकार किया, बल्कि एलपीजी संकट जैसे संवेदनशील मुद्दे पर भी सदन में बोलने से मना कर दिया।

संजय सिंह ने तीखा प्रहार करते हुए कहा, “हम अरविंद केजरीवाल के सिपाही हैं जिन्होंने हमें निडरता सिखाई है। लेकिन जब पश्चिम बंगाल में लोगों के वोट छीने जा रहे थे या पंजाब के अधिकारों का हनन हो रहा था, तब राघव चड्ढा खामोश रहे। वह प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ बोलने से बच रहे हैं।”

भगवंत मान बोले “पार्टी का निर्णय सर्वोपरि”

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस बदलाव को संगठन का आंतरिक निर्णय बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सदन में नेता या उपनेता बदलना एक निरंतर प्रक्रिया है। मान ने कहा कि जब सामूहिक रूप से विपक्ष वॉकआउट का फैसला करता है या सरकार की नीतियों का विरोध करता है, तो हर सदस्य को पार्टी व्हिप का पालन करना अनिवार्य है। यदि कोई व्यक्ति पार्टी लाइन के विपरीत जाता है, तो उस पर कार्रवाई होना निश्चित है।

“समोसे की बात या देश के मुद्दे?”

दिल्ली सरकार के मंत्री सौरभ भारद्वाज ने राघव चड्ढा के संसदीय योगदान पर कटाक्ष करते हुए कहा कि संसद में एक छोटी पार्टी को बहुत कम समय मिलता है। उस समय का उपयोग देश के बड़े मुद्दों के लिए होना चाहिए।

भारद्वाज ने कहा, “अगर कोई संसद में समोसों की कीमत कम करने जैसे सॉफ्ट पीआर (PR) स्टंट कर रहा है, तो वह जनता के साथ न्याय नहीं कर रहा। भाजपा उन्हें सोशल मीडिया पर समर्थन दे रही है, यह सोचने वाली बात है कि वह कहां से चले थे और कहां आ गए हैं।”

उन्होंने यह भी याद दिलाया कि जब अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी हुई और पूरी पार्टी सड़कों पर लाठियां खा रही थी, तब राघव चड्ढा देश छोड़कर लंदन में “छिपे” हुए थे।

लोकतंत्र के संकट पर चुप्पी और भाजपा से ‘खौफ’

मंत्री आतिशी ने चड्ढा की मंशा पर कड़े सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि आज देश का लोकतंत्र खतरे में है और चुनाव आयोग का दुरुपयोग हो रहा है, लेकिन राघव चड्ढा इन विषयों पर चुप हैं। आतिशी ने कहा, “हो सकता है राघव चड्ढा जेल जाने से डरते हों या मोदी जी से डरते हों, लेकिन हमें अपनी जिम्मेदारी पता है। एलपीजी के दाम पर एक आम आदमी त्रस्त है, लेकिन चड्ढा ने इस पर बोलने से भी परहेज किया।”

अनुराग ढांडा बोले, “जो डर गया, समझो मर गया”

पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने भी चड्ढा के रवैये को निराशाजनक बताया। उन्होंने कहा कि गुजरात में ‘आप’ के कार्यकर्ताओं पर अत्याचार हुआ, लेकिन सांसद साहब ने सदन में आवाज नहीं उठाई। उन्होंने सीधे शब्दों में कहा कि पिछले कुछ समय से राघव चड्ढा मोदी सरकार के खिलाफ बोलने से घबरा रहे हैं, और राजनीति में डरने वालों के लिए कोई जगह नहीं है।



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