राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेल की बढ़ती कीमतों को कम करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। उन्होंने 18 मार्च 2026 को जोन्स एक्ट के माल ढुलाई नियमों में 60 दिनों की छूट देने की घोषणा की है। यह छूट अमेरिकी बंदरगाहों के बीच माल ढुलाई के लिए अमेरिकी ध्वज वाले जहाजों की आवश्यकता पर लागू होगी।
जोन्स एक्ट 1920 के दशक का एक शताब्दी पुराना कानून है। इसका उद्देश्य अमेरिकी जहाज निर्माण क्षेत्र की रक्षा करना है। यह कानून अक्सर गैस की कीमतों को महंगा बनाने के लिए जिम्मेदार ठहराया जाता है। यह कदम रिपब्लिकन प्रशासन पर बढ़ते दबाव को दर्शाता है। प्रशासन पर बढ़ती तेल कीमतों को कम करने का भारी दबाव है। अमेरिका और इस्राइल ईरान के साथ एक अनिश्चित युद्ध लड़ रहे हैं। इस युद्ध से वैश्विक तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में यातायात रोक दिया है। यह जलडमरूमध्य दुनिया के एक-पांचवें हिस्से तेल का महत्वपूर्ण मार्ग है।
जोन्स एक्ट के कारण क्या हो रही दिक्कत?
जोन्स एक्ट के तहत अमेरिकी बंदरगाहों के बीच माल केवल अमेरिकी जहाजों से ही ले जाया जा सकता है। इन जहाजों का निर्माण व स्वामित्व अमेरिकी कंपनियों के पास होना चाहिए। इनका संचालन अमेरिकी चालक दल द्वारा अनिवार्य है। यह नियम घरेलू उद्योग को बढ़ावा देता है पर माल ढुलाई लागत बढ़ाता है।
वैश्विक तेल बाजार पर दबाव क्यों?
अमेरिका-इस्राइल के ईरान युद्ध ने वैश्विक तेल बाजार में अनिश्चितता बढ़ाई है। ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य बंद करने से आपूर्ति श्रृंखला बाधित हुई। यह जलडमरूमध्य वैश्विक तेल व्यापार का महत्वपूर्ण मार्ग है। इस रुकावट से कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं।



