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Amit Jogi: कौन है अमित जोगी, जिन्हें 23 साल पुराने जग्गी हत्याकांड में हुई उम्रकैद, हाईकोर्ट ने बदला फैसला


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oi-Kumari Sunidhi Raj

Amit Jogi: छत्तीसगढ़ के सबसे चर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड में न्यायपालिका ने एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य के पहले मुख्यमंत्री स्वर्गीय अजीत जोगी के बेटे और पूर्व विधायक अमित जोगी को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है।

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा की खंडपीठ ने निचली अदालत के फैसले को पलट दिया। इस फैसले में अमित जोगी को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया था। कोर्ट ने उन्हें तीन सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का कड़ा आदेश दिया है।

Amit Jogi

4 जून 2003 को हुई राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के नेता रामावतार जग्गी की हत्या ने राज्य की राजनीति को हिलाकर रख दिया था। दो दशकों की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आए इस फैसले को जग्गी परिवार के लिए ‘न्याय की जीत’ और अमित जोगी के राजनीतिक भविष्य के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।

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Amit Jogi: कौन है अमित जोगी?

अमित जोगी छत्तीसगढ़ की राजनीति का एक प्रभावशाली और विवादास्पद नाम रहे हैं। उनकी पहचान मुख्य रूप से राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री अजीत जोगी (Ajit Jogi) के पुत्र के रूप में है। अमित जोगी खुद भी मारवाही विधानसभा क्षेत्र से विधायक रह चुके हैं और वर्तमान में अपनी पार्टी ‘जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे)’ के माध्यम से राजनीति में सक्रिय हैं।

हालांकि, उनका करियर विवादों से अछूता नहीं रहा है, चाहे वह अंतागढ़ टेप कांड हो या नागरिकता और जाति से जुड़े विवाद, अमित जोगी हमेशा सुर्खियों में रहे हैं। रामावतार जग्गी हत्याकांड उनके जीवन का सबसे गंभीर कानूनी मामला रहा है, जिसमें अब उन्हें दोषी पाया गया है।

Ramavatar Jaggi Murder Case: क्या था पूरा मामला?

यह मामला 4 जून 2003 का है, जब रायपुर में एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की गोली मारकर सरेराह हत्या कर दी गई थी। उस वक्त राज्य में अजीत जोगी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार सत्ता में थी। इस हत्याकांड ने पूरे प्रदेश में राजनीतिक उबाल ला दिया था। शुरुआत में मामले की जांच राज्य पुलिस ने की, लेकिन जांच में पक्षपात और राजनीतिक दबाव के आरोपों के चलते मामला सीबीआई (CBI) को सौंप दिया गया। सीबीआई ने अपनी जांच में इसे एक सोची-समझी राजनीतिक साजिश करार दिया था।

निचली अदालत से हाईकोर्ट तक का सफर

साल 2007 में विशेष सीबीआई कोर्ट ने इस मामले में 28 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। हालांकि, उस समय कोर्ट ने अमित जोगी को यह कहते हुए बरी कर दिया था कि उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं हैं। सीबीआई ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी। मामला कई वर्षों तक लटका रहा और सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंचा। आखिरकार, उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर हाईकोर्ट में फिर से सुनवाई शुरू हुई, जिसका परिणाम अब सजा के रूप में सामने आया है।

Ramavatar Murder Case फैसले पर प्रतिक्रियाएं

अमित जोगी: फैसले के बाद अमित जोगी ने इसे “अचानक लिया गया निर्णय” बताया। उनका कहना है कि उन्हें अपना पक्ष रखने का पूरा मौका नहीं दिया गया और वे जल्द ही इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।

जग्गी परिवार: मृतक नेता के बेटे सतीश जग्गी ने भावुक होते हुए कहा, “हमें 21 साल तक इस पल का इंतजार था। आज मेरे पिता को सही मायने में न्याय मिला है।”

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