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Amit Shah Meeting: बजट सत्र के बचे दिनों में विपक्ष की काट तैयार, NDA सांसदों के साथ शाह ने बनाई रणनीति


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Amit Shah Meeting: संसद परिसर में सोमवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अगुवाई में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के सांसदों की अहम बैठक शुरू हुई। इस बैठक में केंद्र सरकार के कई वरिष्ठ मंत्री और विभिन्न दलों के सांसद शामिल हुए। बैठक में किरण रिजिजू, ललन सिंह, अनुप्रिया पटेल, उपेंद्र कुशवाहा, श्रीकांत शिंदे, मिलिंद देवड़ा, एम. थंबी दुरई, प्रफुल पटेल और राजकुमार सांगवान समेत कई अन्य सांसद मौजूद रहे।

सूत्रों के मुताबिक, यह बैठक संसद के बजट सत्र के अंतिम सप्ताह को ध्यान में रखते हुए बुलाई गई है। बैठक का मुख्य उद्देश्य विपक्ष को साधने और सदन की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाने के लिए रणनीति तैयार करना बताया जा रहा है। सरकार चाहती है कि सत्र के आखिरी दिनों में महत्वपूर्ण विधेयकों को बिना किसी बाधा के पारित कराया जा सके।

Amit Shah Meeting

Amit Shah Meeting: विपक्ष के खिलाफ एकजुट रहेगा एनडीए

मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि बैठक में गृहमंत्री ने एनडीए सांसदों को एकजुट रहने का निर्देश दिया है। सरकार की कोशिश सत्र के बचे हुए दिनों में सदन को सुचारू तरीके से चलाने की है, ताकि कई अहम बिल पास कराए जा सकें। हंगामे की वजह से इस सेशन का कामकाज बुरी तरीके से प्रभावित हुआ है। इसके अलावा, स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ लाए अविश्वास प्रस्ताव पर हुई 10 घंटे की चर्चा की वजह से भी कई अहम बिल अब तक पेंडिंग हैं।

Budget Session अब आखिरी पड़ाव पर

संसद का बजट सत्र 2026 इस बार 28 जनवरी से शुरू होकर 2 अप्रैल तक चलेगा। यह सत्र दो चरणों में आयोजित किया जा रहा है। पहला चरण 28 जनवरी से 13 फरवरी तक चला, जबकि दूसरा चरण 9 मार्च से शुरू होकर 2 अप्रैल तक जारी रहेगा। इस दौरान कुल 30 बैठकों का आयोजन निर्धारित है। इस सत्र के दौरान 1 फरवरी को केंद्रीय बजट पेश किया गया था, जिसके बाद विभिन्न मुद्दों पर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। कई बार सदन की कार्यवाही भी बाधित हुई, जिससे महत्वपूर्ण कामकाज प्रभावित हुआ।

NDA सांसदों की अहम बैठक

ऐसे में NDA की यह बैठक काफी अहम मानी जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सत्र के अंतिम चरण में सरकार विपक्ष के साथ टकराव को कम कर विधायी कार्यों को प्राथमिकता देना चाहती है। संसद में जारी इस सियासी गतिविधि से यह साफ है कि आने वाले दिनों में राजनीतिक रणनीति और सहयोग का स्तर तय करेगा कि बजट सत्र कितना प्रभावी साबित होता है।



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